क्या फिच ने भारत के जीडीपी विकास दर अनुमान को वित्त वर्ष 26 के लिए 7.4 प्रतिशत तक बढ़ाया?

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क्या फिच ने भारत के जीडीपी विकास दर अनुमान को वित्त वर्ष 26 के लिए 7.4 प्रतिशत तक बढ़ाया?

सारांश

फिच रेटिंग्स ने भारत के जीडीपी विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत करने की घोषणा की है। यह वृद्धि मजबूत घरेलू मांग और टैक्स सुधारों के कारण हुई है। जानिए इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बातें

फिच ने जीडीपी विकास दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत किया।
मजबूत मांग और टैक्स सुधार इसका मुख्य कारण हैं।
वित्त वर्ष 27 में विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान।
महंगाई दर औसत 1.5 प्रतिशत रह सकती है।
आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।

नई दिल्ली, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। फिच रेटिंग्स ने आज भारत के जीडीपी विकास दर के अनुमान को वित्त वर्ष 26 के लिए 7.4 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जबकि पहले यह 6.9 प्रतिशत था। इसका मुख्य कारण देश में मजबूत मांग और टैक्स सुधारों का होना है।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में बढ़ता निजी उपभोग भारत की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है। इसे हाल में हुए जीएसटी सुधारों, आय वृद्धि और सकारात्मक ग्राहक धारणा से समर्थन मिल रहा है।

फिच रेटिंग का मानना है कि वित्त वर्ष 27 में भारत की विकास दर कम होकर 6.4 प्रतिशत हो जाएगी, लेकिन इसे मजबूत घरेलू मांग का लाभ मिलता रहेगा।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि सरकारी निवेश में कमी आ सकती है, जबकि वित्त वर्ष 27 की दूसरी छमाही में निजी निवेश में वृद्धि देखने को मिल सकती है।

भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

फिच ने यह भी बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था ने यह मजबूत विकास दर उस समय हासिल की है, जब अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगभग 35 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से मांग को एक बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है।

फिच का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत में महंगाई दर औसतन 1.5 प्रतिशत रह सकती है।

फिच ने आगे कहा कि महंगाई दर में कमी से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को 5 दिसंबर को ब्याज दरों में कटौती करने का एक और मौका मिल सकता है, जिससे रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर आ सकता है।

फिच ने कहा कि आरबीआई अपने ब्याज दरों में कटौती चक्र के अंत में है और आने वाले दो वर्षों तक रेपो रेट स्थिर रह सकता है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) की बैठक 3 दिसंबर को शुरू हुई थी और यह 5 दिसंबर को समाप्त होगी, जब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का ऐलान करेंगे।

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में अगले साल मजबूती देखने को मिल सकती है और यह 87 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में 90 के आसपास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम इस सकारात्मक विकास को एक अवसर के रूप में देखें। भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाएँ बढ़ रही हैं और हमें इसे यथासंभव सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिच ने भारत के जीडीपी विकास दर का अनुमान क्यों बढ़ाया?
फिच ने भारत के जीडीपी विकास दर का अनुमान बढ़ाने का कारण मजबूत मांग और टैक्स सुधारों को बताया है।
वित्त वर्ष 27 के लिए भारत की विकास दर कितनी होगी?
फिच का मानना है कि वित्त वर्ष 27 के दौरान भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत हो सकती है।
आरबीआई का ब्याज दर में कटौती का क्या प्रभाव होगा?
महंगाई दर में कमी से आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती करने का अवसर मिल सकता है, जिससे रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर आ सकता है।
भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान क्या है?
भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि वित्त वर्ष 26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति कैसे रहेगी?
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपए में अगले साल मजबूती देखने को मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस