खाद्य पीएलआई योजना में 9,207 करोड़ का निवेश, 3.29 लाख रोजगार सृजित: केंद्र सरकार
सारांश
Key Takeaways
- खाद्य पीएलआई योजना के तहत 9,207 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।
- यह योजना 3.29 लाख रोजगार सृजित कर चुकी है।
- 128 कंपनियों को इस योजना के तहत मंजूरी मिली है।
- मिलेट उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- इस योजना का कुल बजट 10,900 करोड़ रुपए है।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है और लगभग 3.29 लाख नौकरियां सृजित की हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने मंगलवार को साझा की।
यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक के लिए लागू की गई है, जिसका कुल बजट 10,900 करोड़ रुपए है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य वैल्यू एडिशन को बढ़ाना, प्रोसेसिंग क्षमता को विस्तारित करना और विशेष रूप से ग्रामीण और गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
इस योजना के अंतर्गत रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट (आरटीसी/आरटीई) फूड, प्रसंस्कृत फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोजरेला चीज जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही, एमएसएमई सेक्टर के नवोन्मेषी और जैविक उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, और भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक पहचान को मजबूत करने के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है।
अब तक इस योजना के अंतर्गत 128 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जो पूरे देश में 274 यूनिट्स चला रही हैं। इसमें 68 एमएसएमई कंपनियां और 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत कई राज्यों में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट्स की क्षमता में वृद्धि हुई है, तकनीकी सुधार हुए हैं और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला है।
इस योजना के तहत कुल निवेश प्रारंभिक अनुमानों से अधिक है, और 22 राज्यों में 7,722 करोड़ रुपए के लक्ष्य की तुलना में अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है।
इसी के साथ, लगभग 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता भी जोड़ी गई है।
सरकार ने बताया कि पीएलआई योजना के अंतर्गत आने वाले उत्पादों की बिक्री में 10.58 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि (सीएजीआर) दर्ज की गई है, जबकि निर्यात में 7.41 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है, वह भी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद।
इस योजना के तहत मिलेट (मोटे अनाज) से बने उत्पादों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनकी बिक्री वित्त वर्ष 2023 में 345.73 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,845.25 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इस अवधि के दौरान बाजरा (मिलेट) की खरीद में भी महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है।