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सोने में ₹1,443 की गिरावट, MCX पर ₹1,50,056 पर आया; चांदी भी ₹1,552 टूटकर ₹2,24,203 पर

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सोने में ₹1,443 की गिरावट, MCX पर ₹1,50,056 पर आया; चांदी भी ₹1,552 टूटकर ₹2,24,203 पर

सारांश

सोमवार को MCX पर सोना ₹1,443 और चांदी ₹1,552 टूटी — जबकि वैश्विक बाजार में तेजी थी। वजह? रुपए की मजबूती और मुनाफावसूली। अब बाजार की नजर अमेरिकी CPI और फेड के अगले कदम पर है।

मुख्य बातें

MCX पर 12 अक्टूबर 2026 को सोना दिन के निचले स्तर ₹1,50,056 प्रति 10 ग्राम तक फिसला — पिछले बंद से ₹1,443 (0.95%) की गिरावट।
चांदी भी दिन के निचले स्तर ₹2,24,203 प्रति किलोग्राम तक आई — पिछले सत्र से ₹1,552 (0.68%) नीचे।
गिरावट की मुख्य वजह रुपए में मजबूती और मुनाफावसूली बताई गई; RBI के हालिया कदमों से रुपया मजबूत होने की उम्मीद।
वैश्विक बाजार COMEX में सोना $4,200 प्रति औंस से ऊपर और चांदी $61.1 प्रति औंस पर — घरेलू-वैश्विक कीमतों में उलटा रुझान।
विशेषज्ञों के अनुसार सोने के लिए तात्कालिक सपोर्ट ₹1,50,000–₹1,50,700 ; टूटने पर ₹1,48,000 तक गिरावट संभव।
बाजार की नज़र अमेरिकी CPI आँकड़ों और फेडरल रिज़र्व की दिसंबर ब्याज दर नीति पर।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं में तीखी बिकवाली देखी गई। दिसंबर डिलीवरी वाला सोना दिन के निचले स्तर पर ₹1,50,056 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया — पिछले बंद भाव ₹1,51,499 के मुकाबले ₹1,443 यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट। चांदी भी दबाव में रही और ₹2,24,203 प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक आई, जो पिछले सत्र के बंद भाव ₹2,25,755 से ₹1,552 यानी 0.68 प्रतिशत कम है।

बाजार का मुख्य घटनाक्रम

MCX पर दिसंबर डिलीवरी सोना शुक्रवार को ₹1,51,499 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह ₹1,51,596 पर खुला, लेकिन शुरुआती घंटे में तेज बिकवाली के दबाव में ₹1,50,056 तक लुढ़क गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ₹1,50,000–₹1,50,700 का दायरा सोने के लिए तात्कालिक सपोर्ट ज़ोन है; यदि यह स्तर टूटता है तो भाव ₹1,48,000 तक आ सकते हैं।

ऊपर की ओर ₹1,52,000–₹1,53,000 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध माना जा रहा है। इसी तरह चांदी के लिए ₹2,24,000 का स्तर अहम समर्थन बताया जा रहा है, जबकि मजबूती आने पर ₹2,28,000 की ओर बढ़त संभव है।

गिरावट की मुख्य वजह

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू बाजार में इस गिरावट के दो प्रमुख कारण हैं — रुपए में मजबूती और मुनाफावसूली। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से रुपया और सुदृढ़ हो सकता है। मजबूत रुपए का सीधा असर यह होता है कि आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं, जिससे स्थानीय वायदा कीमतों पर दबाव बनता है।

गौरतलब है कि यह तब हुआ जब अंतरराष्ट्रीय बाजार — COMEX — में सोना $4,200 प्रति औंस के ऊपर और चांदी $61.1 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, यानी वैश्विक स्तर पर तेजी थी। यह घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच का विरोधाभास बताता है कि मुद्रा की चाल किस हद तक घरेलू धातु बाजार को प्रभावित कर सकती है।

वैश्विक संकेत और आगे की नज़र

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की निगाहें अब अमेरिकी मुद्रास्फीति (CPI) के आँकड़ों और फेडरल रिज़र्व की आगामी ब्याज दर नीति पर टिकी हैं। दिसंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका पहले से ही बाजार में समाहित है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की अपील को कमजोर करती हैं।

संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी (UNCTAD) ने हाल ही में अनुमान जताया है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह सकती है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों की अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं।

चांदी की स्थिति और औद्योगिक मांग

विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ हद तक समर्थन दे सकती है — विशेष रूप से सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में। हालांकि, निकट भविष्य में रुपए की मजबूती चांदी की कीमतों पर भी दबाव बनाए रख सकती है।

आम निवेशकों पर असर और आगे क्या

सोने और चांदी की इस गिरावट से घरेलू आभूषण बाजार में अल्पकालिक राहत मिल सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन देते रहेंगे। बाजार की दिशा काफी हद तक आने वाले अमेरिकी CPI आँकड़ों और फेड के रुख पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 के ऊपर कारोबार कर रहा था — फिर भी घरेलू बाजार में ₹1,443 की गिरावट आई। यह विरोधाभास बताता है कि मुद्रा की चाल कैसे कमोडिटी निवेशकों की रणनीति को उलट सकती है। RBI की नीतिगत सक्रियता अल्पावधि में धातु खरीदारों के लिए राहत देती है, लेकिन दीर्घावधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितता — पश्चिम एशिया, UNCTAD की 2.6% वृद्धि की चेतावनी — सोने को सुरक्षित पनाह के रूप में प्रासंगिक बनाए रखेगी। असली परीक्षा अमेरिकी CPI आँकड़ों के बाद होगी — फेड का रुख तय करेगा कि यह गिरावट खरीदारी का अवसर है या नई प्रवृत्ति की शुरुआत।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 अक्टूबर 2026 को MCX पर सोने का भाव कितना गिरा?
MCX पर दिसंबर डिलीवरी सोना 12 अक्टूबर 2026 को दिन के निचले स्तर ₹1,50,056 प्रति 10 ग्राम तक आया, जो पिछले बंद ₹1,51,499 से ₹1,443 यानी 0.95 प्रतिशत कम है। यह सप्ताह के पहले दिन शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली के कारण हुआ।
घरेलू सर्राफा बाजार में सोना-चांदी क्यों गिरे जबकि वैश्विक बाजार में तेजी थी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, RBI के हालिया कदमों से रुपए में मजबूती आई है और निवेशकों ने मुनाफावसूली की। मजबूत रुपए का मतलब है कि आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ते हैं, जिससे वायदा कीमतें नीचे आती हैं — भले ही COMEX पर वैश्विक भाव ऊँचे हों।
सोने के लिए अभी अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने के लिए ₹1,50,000–₹1,50,700 का दायरा तात्कालिक सपोर्ट ज़ोन है। यदि यह टूटता है तो भाव ₹1,48,000 तक आ सकते हैं। ऊपर की ओर ₹1,52,000–₹1,53,000 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध माना जा रहा है।
चांदी की कीमत पर क्या असर पड़ा और आगे क्या उम्मीद है?
दिसंबर डिलीवरी चांदी 12 अक्टूबर को ₹2,24,203 प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक फिसली — पिछले बंद ₹2,25,755 से ₹1,552 यानी 0.68 प्रतिशत नीचे। विश्लेषकों के अनुसार औद्योगिक मांग कुछ समर्थन दे सकती है, लेकिन रुपए की मजबूती निकट भविष्य में दबाव बनाए रख सकती है।
सोने-चांदी की आगे की दिशा किन वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की नज़र अमेरिकी CPI आँकड़ों और फेडरल रिज़र्व की दिसंबर ब्याज दर नीति पर है। उच्च ब्याज दरें सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की अपील को कम करती हैं। वहीं, UNCTAD द्वारा 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 2.6% रहने के अनुमान और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव दीर्घावधि में सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प बनाए रख सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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