सोना-चांदी में वैश्विक दबाव से बड़ी गिरावट: MCX पर चांदी ₹6,799 टूटी, ₹2 लाख से नीचे फिसली
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 23 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी दोनों में तीखी गिरावट दर्ज की गई, जब वैश्विक बाज़ारों में बिकवाली, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊँचे रहने की आशंका ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया। चांदी दिन के कारोबार में ₹6,799 यानी 3.40 प्रतिशत टूटकर ₹1,92,800 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गई और इस तरह ₹2 लाख प्रति किलोग्राम की मनोवैज्ञानिक सीमा से नीचे खिसक गई।
MCX पर सोने का हाल
दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव ₹1,43,309 प्रति 10 ग्राम से ₹1,251 यानी 0.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,42,058 पर खुला। दिन के कारोबार में एक समय यह ₹1,503 यानी 1.04 प्रतिशत फिसलकर ₹1,41,806 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गया।
कारोबार में बाद में कुछ सुधार हुआ, लेकिन रिपोर्ट तैयार होने तक सोना ₹629 यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,42,680 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
चांदी में और भी गहरी चोट
दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव ₹1,99,599 प्रति किलोग्राम से ₹3,012 यानी 1.50 प्रतिशत लुढ़ककर ₹1,96,587 पर खुली। दिन में अपने निचले स्तर पर यह ₹6,799 यानी 3.40 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ ₹1,92,800 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई।
बाद में कुछ पुनर्प्राप्ति देखी गई और चांदी 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,96,276 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नज़र आई। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में चांदी ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुँची थी — यानी मौजूदा कीमत अपने रिकॉर्ड से करीब आधी रह गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुख
अंतरराष्ट्रीय वायदा बाज़ार COMEX पर भी कमज़ोरी का माहौल बना रहा। सोना करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ $4,034 प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी 1.30 प्रतिशत टूटकर $54.29 प्रति औंस के आसपास रही। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, सोना वैश्विक बाज़ार में $4,000 प्रति औंस के आसपास आ गया है, जो कमज़ोरी के माहौल का संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और ऊँची ऊर्जा कीमतें महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि महंगाई ऊँची बनी रहती है तो प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊँचे स्तर पर रख सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ऊँची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दर कटौती की उम्मीदों के कमज़ोर पड़ने से सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बना हुआ है।
हालाँकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डॉलर में कमज़ोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आगे चलकर कुछ समर्थन दे सकती है। इस साल की शुरुआत में सोने ने MCX पर ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, और मौजूदा कीमतें उससे काफी नीचे हैं।
आगे क्या होगा
बाज़ार जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी। निवेशकों का ध्यान अब केंद्रीय बैंकों की अगली नीतिगत बैठकों और महंगाई के रुझान पर टिका है, जो कीमती धातुओं की अगली दिशा तय करेंगे।