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क्या जीएसटी 2.0 सुधार, बढ़ती ग्रामीण आय और घटती महंगाई भारत की उपभोग कहानी में बड़ा पुनरुत्थान लाएगा?

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क्या जीएसटी 2.0 सुधार, बढ़ती ग्रामीण आय और घटती महंगाई भारत की उपभोग कहानी में बड़ा पुनरुत्थान लाएगा?

सारांश

भारत की उपभोग कहानी में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। आगामी जीएसटी 2.0 सुधार, ग्रामीण आय में वृद्धि और महंगाई में कमी से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे यह संयोजन आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित कर सकता है।

मुख्य बातें

जीएसटी 2.0 सुधार से उपभोक्ता कीमतों में कमी संभव है।
ग्रामीण आय में वृद्धि से मांग में सुधार हो सकता है।
घटती महंगाई से सामान्य उपभोग को बढ़ावा मिलेगा।
बिग-टिकट आइटम पर जीएसटी में कमी की संभावना है।
एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल क्षेत्र में वृद्धि की उम्मीद है।

मुंबई, 2 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। जीएसटी 2.0 सुधार, बढ़ती ग्रामीण आय और घटती महंगाई का संयोजन भारत की उपभोग की कहानी में एक बड़े पुनरुत्थान का आधार तैयार कर सकता है। यह जानकारी मंगलवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई।

स्मॉलकेस के निवेश प्रबंधक राइट रिसर्च द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का उपभोग चक्र, जो पिछले कुछ वर्षों से सुस्त रहा है, संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है और अब ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

अगर जीएसटी 2.0 को त्योहारी सीजन से ठीक पहले अक्टूबर में अंतिम रूप दिया जाता है, तो इससे उपभोक्ता कीमतें कम हो सकती हैं, मांग बढ़ सकती है और घरेलू खर्च में वृद्धि हो सकती है।

अपेक्षित बदलावों में, जिन वस्तुओं पर वर्तमान में 12 प्रतिशत कर लगता है, उन्हें 5 प्रतिशत के स्लैब में लाया जा सकता है। इसमें प्रोसेस्ड फूड, किफायती जूते और कुछ स्वास्थ्य उत्पाद शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं और उपभोक्ता बिना ब्रांड वाले उत्पादों से ब्रांडेड उत्पादों की ओर रुख करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

बिग-टिकट आइटम में एयर कंडीशनर और बड़े टेलीविजन जैसे उत्पादों पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो सकता है, जिससे कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आएगी और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में इसकी पहुंच व्यापक होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, सीमेंट पर जीएसटी में कटौती खुदरा घरेलू परियोजनाओं और बड़ी निर्माण गतिविधियों, दोनों की लागत कम करेगी, जिस पर वर्तमान में 28 प्रतिशत कर लगता है।

राइट रिसर्च की संस्थापक और स्मॉलकेस की निवेश प्रबंधक सोनम श्रीवास्तव ने कहा, "जीएसटी 2.0 हाल के वर्षों में सबसे अधिक उपभोग-समर्थक नीतियों में से एक है। रोजमर्रा की श्रेणियों और बिग-टिकट ड्यूरेबल, दोनों में कीमतों में कमी कर, यह सुधार मांग में तेजी ला सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ग्रामीण आय और मुद्रास्फीति के रुझान अनुकूल हो रहे हैं।"

सेक्टोरल आउटलुक भी आशाजनक है। एफएमसीजी कंपनियों के वित्त वर्ष 26 में लगभग 10 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि देखने की उम्मीद है, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल के क्षेत्र में 21 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सुधारों को कितनी तेजी से लागू किया जाता है।

सीमेंट कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है, उनके ईबीआईटीडीए में 40 प्रतिशत से अधिक और मुनाफ़े में 80 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

एमएसएमई द्वारा डिजिटल समाधानों को अपनाए जाने के कारण इंटरनेट प्लेटफॉर्म के राजस्व में 35-40 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के कच्चे तेल की गिरती कीमतों के कारण नकदी प्रवाह में सुधार की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पुनरुद्धार के शुरुआती संकेत पहले ही दिखाई देने लगे हैं। प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों, क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट और पेंट कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में बिक्री में सुधार दर्ज किया है, जबकि छोटे शहरों के खुदरा विक्रेताओं की बिक्री में तेजी देखी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी 2.0 सुधार क्या है?
जीएसटी 2.0 सुधार एक प्रस्तावित परिवर्तन है जो उपभोक्ता वस्तुओं पर कर की दरों को संशोधित करेगा।
बढ़ती ग्रामीण आय का अर्थ क्या है?
बढ़ती ग्रामीण आय का अर्थ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, जिससे उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ रही है।
महंगाई में कमी का क्या प्रभाव होगा?
महंगाई में कमी से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें कम होंगी, जिससे लोगों के लिए चीजें खरीदना आसान होगा।
राष्ट्र प्रेस
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