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क्या जीएसटी दरों में कटौती कृषि और डेयरी क्षेत्रों के लिए एक बूस्टर शॉट साबित होगी?

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क्या जीएसटी दरों में कटौती कृषि और डेयरी क्षेत्रों के लिए एक बूस्टर शॉट साबित होगी?

सारांश

कृषि मंत्रालय की हालिया घोषणा में जीएसटी की दरों में कमी से किसानों को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि लागत में कमी और उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी, जो डेयरी और कृषि क्षेत्रों को नई दिशा में ले जाएगा। जानिए इस फैसले के पीछे के तथ्य और इसके प्रभाव।

मुख्य बातें

जीएसटी दरों में कमी से किसानों को लाभ होगा।
खेती की लागत में कमी आएगी।
डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
इकोफ्रेंडली विकल्पों की ओर बढ़ने का अवसर मिलेगा।
आदिवासी समुदायों की आजीविका मजबूत होगी।

नई दिल्ली, 9 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा मंगलवार को दी गई जानकारी के अनुसार, जीएसटी की दरों में कटौती कृषि और डेयरी क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी, जिससे छोटे और मध्यम किसानों को खास लाभ मिलेगा।

कृषि मशीनरी और सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों पर जीएसटी में कमी से खेती की लागत में कमी आएगी और इससे किसानों के लाभ में इजाफा होगा।

जैव-कीटनाशकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी में कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा, जिससे वे रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक विकल्पों की ओर बढ़ेंगे।

बयान में उल्लेख किया गया है कि दूध और पनीर पर जीएसटी ना लगने से इनकी कीमतें घटेंगी, जबकि मक्खन और घी पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की जाएगी, जिससे इन उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इससे कुल मिलाकर किसानों और पशुपालकों को लाभ होगा। जीएसटी सुधार संयुक्त खेती को भी प्रोत्साहित करेंगे। पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, कृषि वानिकी और मुर्गी पालन में भी लाभ दिखाई देंगे।

इसके अलावा, तेंदू पत्ते पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से आदिवासी समुदायों की आजीविका मजबूत होगी, जबकि वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों पर जीएसटी में कमी से कृषि उत्पादों का परिवहन सस्ता होगा।

बयान में यह भी कहा गया है कि 1800 सीसी से कम ट्रैक्टर और उनके पुर्जों पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे ट्रैक्टरों की कीमतों में कमी आएगी और छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए मशीनीकरण सुलभ होगा। यह समय की बचत करेगा, श्रम लागत कम करेगा और उत्पादकता को बढ़ाएगा।

अमोनिया, सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से उर्वरक उत्पादन में इनपुट लागत कम होगी।

इसी प्रकार, 12 जैव-कीटनाशकों और कई सूक्ष्म पोषक तत्वों पर जीएसटी में कमी से इकोफ्रेंडली और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा मिलेगा।

'तैयार या संरक्षित मछली' पर भी जीएसटी में कमी लाई गई है, जिससे जलीय कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

संरक्षित सब्जियों, फलों और मेवों पर जीएसटी में कमी से कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। इससे जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की बर्बादी में कमी आएगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि देश की कृषि उत्पादकता को भी बढ़ावा देगा। यह सरकार का एक ऐसा प्रयास है, जो किसानों की भलाई के लिए लक्षित है और इसे सभी स्तरों पर समर्थन मिलना चाहिए।
RashtraPress
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