गुजरात कपास किसान MSP पंजीकरण: 31 अक्टूबर तक 'कपास किसान' ऐप पर करें रजिस्ट्रेशन
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के कपास उत्पादक किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने हेतु पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्य के कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 खरीफ सीजन में MSP खरीद का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को 31 अक्टूबर 2026 तक कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के 'कपास किसान' मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि राज्य के प्रत्येक पात्र कपास किसान को सरकार द्वारा तय मूल्य का वास्तविक लाभ मिल सके।
MSP की दरें क्या हैं
केंद्र सरकार ने 2026-27 खरीफ सीजन के लिए कपास के दो प्रकारों पर अलग-अलग MSP घोषित की है। लंबे रेशे वाली कपास के लिए यह दर ₹8,667 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जबकि मध्यम रेशे वाली कपास के लिए ₹8,267 प्रति क्विंटल तय की गई है। गौरतलब है कि इन दरों की घोषणा खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने से पहले ही कर दी गई थी, ताकि किसान अपनी फसल योजना तदनुसार बना सकें।
पंजीकरण कैसे करें
किसान CCI के 'कपास किसान' मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद उन्हें नज़दीकी खरीद केंद्रों, खरीद की तिथियों और अन्य संबंधित सेवाओं की जानकारी सीधे ऐप पर मिलेगी। अधिक विवरण के लिए किसान CCI की आधिकारिक वेबसाइट www.cotcorp.org.in पर भी जा सकते हैं।
सहायता के लिए कहाँ संपर्क करें
जिन किसानों को पंजीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की कठिनाई हो, वे व्हाट्सएप नंबर 9428237246 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। विभाग ने विशेष रूप से यह अनुरोध किया है कि किसान अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द पंजीकरण पूरा करें।
MSP प्रणाली का उद्देश्य
सरकारी MSP खरीद प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी कृषि उपज पर पर्याप्त और लाभकारी प्रतिफल मिले, विशेष रूप से जब बाज़ार में कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे गिर जाएँ। यह प्रणाली कपास उत्पादकों को बाज़ार की अस्थिरता से सुरक्षा देती है।
किसानों से अपील
गुजरात कृषि निदेशालय ने राज्य के समस्त कपास उत्पादक किसानों से 31 अक्टूबर 2026 की अंतिम तिथि से पहले ही पंजीकरण पूरा कर लेने की अपील की है। यह पंजीकरण विंडो सरकारी खरीद प्रणाली के तहत अधिसूचित मूल्यों पर कपास बेचने का एकमात्र माध्यम है। यदि किसान इस समय सीमा से चूक जाते हैं, तो वे इस सीजन में MSP लाभ से वंचित रह सकते हैं।