क्या डॉलर के मजबूत होने से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है?
सारांश
Key Takeaways
- सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट मुख्यतः डॉलर की मजबूती के कारण है।
- भू-राजनीतिक तनावों का भी कीमतों पर प्रभाव पड़ता है।
- विशेषज्ञ भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना जता रहे हैं।
मुंबई, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को एमसीएक्स और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूती से बढ़ना रहा।
अमेरिका में साप्ताहिक बेरोजगारी से संबंधित आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहे, जिसके चलते डॉलर में तेजी आई, जिसका प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा।
साथ ही, ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नरम रुख के कारण निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई, जिससे सोने और चांदी पर दबाव बना।
सुबह के कारोबार में एमसीएक्स गोल्ड फरवरी वायदा 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,743 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि, बाद में थोड़ी मजबूती देखने को मिली।
वहीं, एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 0.94 प्रतिशत गिरकर 2,88,824 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना लगभग 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,602.43 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। हालांकि, पूरे सप्ताह के दौरान सोना अब भी लगभग 2 प्रतिशत ऊपर बना हुआ है।
हाजिर चांदी की कीमत लगभग 0.8 प्रतिशत गिरकर 91.69 डॉलर प्रति औंस हो गई। इससे पहले कारोबार के दौरान चांदी ने 93.57 से 93.70 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट इस कारण आई क्योंकि डॉलर इंडेक्स बढ़कर 99.49 तक पहुंच गया, जो दिसंबर की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि ईरान में अशांति और वेनेजुएला तथा ग्रीनलैंड से जुड़े तनाव जैसे भू-राजनीतिक जोखिम अब भी सोने और चांदी की मांग को सहारा दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह डॉलर सूचकांक में उतार-चढ़ाव और अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले से पहले सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर नए टैरिफ की घोषणा न करने से चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ बातचीत जारी रखेगा ताकि जरूरी खनिजों की आपूर्ति बनी रहे और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम किए जा सकें।
हालांकि, यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो आयात पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में मुनाफावसूली के कारण कीमतों में कुछ और गिरावट आ सकती है, लेकिन इसके बाद कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। निवेशक अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक से मिलने वाले संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ रही है। नवंबर में उत्पादक महंगाई और दिसंबर में उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े अपेक्षा से नरम रहने के कारण यह संभावना बढ़ी है कि इस साल अमेरिकी फेड द्वारा कई बार ब्याज दरों में कटौती हो सकती है।