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भारत शिक्षा क्षेत्र में विदेशी विश्वविद्यालयों के माध्यम से 2040 तक 113 अरब डॉलर की बचत कर सकता है: नई रिपोर्ट

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भारत शिक्षा क्षेत्र में विदेशी विश्वविद्यालयों के माध्यम से 2040 तक 113 अरब डॉलर की बचत कर सकता है: नई रिपोर्ट

सारांश

क्या भारत विदेशों में पढ़ाई के लिए जा रही भारी राशि को रोक सकता है? एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में बढ़ावा दिया जाए, तो भारत 2040 तक करीब 113 अरब डॉलर की बचत कर सकता है। जानें कैसे।

मुख्य बातें

भारत 2040 तक 113 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए 1.9 करोड़ वर्ग फुट स्पेस की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव।
उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षा संस्थानों में अवसरों की कमी।
एसटीईएम और डेटा साइंस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत यदि विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने देश में प्रभावी रूप से स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, तो वह 2040 तक लगभग 113 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। इसके लिए विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों को लगभग 1.9 करोड़ वर्ग फुट वर्टिकल कैंपस स्पेस की आवश्यकता होगी।

डेलॉइट इंडिया और नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी विश्वविद्यालयों की उपस्थिति से उन बड़ी राशियों में कमी लाई जा सकती है, जो छात्र विदेश में अध्ययन के लिए भेजते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभाव से भारत एक 'छात्र भेजने वाले देश' से 'वैश्विक ज्ञान केंद्र' बनने की दिशा में बढ़ रहा है। वर्तमान में, देश में लगभग 5.3 करोड़ छात्र उच्च शिक्षा में नामांकित हैं। सरकार का लक्ष्य 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है, जिसके लिए छात्रों की संख्या बढ़कर करीब 7.2 करोड़ हो सकती है।

रिपोर्ट में एक गंभीर विसंगति को उजागर किया गया है कि 'उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षा संस्थानों में अवसरों की भारी कमी है'।

रिपोर्ट के अनुसार, "2025 में लगभग 54,000 छात्रों ने इंजीनियरिंग के लिए जेईई के सभी स्तर पास किए, लेकिन प्रतिष्ठित आईआईटी केवल 18,000 सीटें ही उपलब्ध करा सके। इससे छात्रों की आकांक्षाओं और उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले ढांचे के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।"

नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय भागीदार, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत का शिक्षा क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 18 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है या उन्होंने संचालन शुरू कर दिया है, जिससे बदलाव की रफ्तार साफ दिखाई दे रही है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे केवल छात्रों की संख्या बढ़ाने के बजाय अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम की गुणवत्ता पर ध्यान दें। खासकर एसटीईएम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर फोकस जरूरी है।

रियल एस्टेट सेवाएं देने वाली कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई को ऐसे शहर बताया है जहां विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए बेहतर संभावनाएं हैं, क्योंकि यहां कॉर्पोरेट ढांचा मजबूत है। वहीं, चंडीगढ़, कोच्चि और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों को भी बेहतर प्रशासन और बुनियादी ढांचे के कारण उभरते केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिभा और प्रशासनिक सफलता के लिए मजबूत फैकल्टी पाइपलाइन तैयार करना और ऐसे प्रशासनिक मॉडल विकसित करना जरूरी है जो शैक्षणिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए भारतीय नियमों के अनुरूप हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हम न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं, बल्कि वैश्विक शिक्षा में भी एक महत्वपूर्ण स्थान बना सकते हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत विदेशी विश्वविद्यालयों को क्यों प्रोत्साहित कर रहा है?
भारत विदेशी विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहित करके उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए कदम उठा रहा है।
क्या इससे छात्रों की संख्या में वृद्धि होगी?
हाँ, रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम छात्रों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध अवसर दोनों में वृद्धि कर सकता है।
यह रिपोर्ट किसने प्रकाशित की है?
यह रिपोर्ट डेलॉइट इंडिया और नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा प्रस्तुत की गई है।
कितने छात्रों ने जेईई पास किया है?
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में लगभग 54,000 छात्रों ने इंजीनियरिंग के लिए जेईई के सभी स्तर पास किए।
भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
राष्ट्र प्रेस
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