भारत में AI बूम से शेयर बाज़ार में $100 अरब तक की वृद्धि संभव, Goldman Sachs रिपोर्ट में दावा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के तेज़ी से विस्तार पा रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इकोसिस्टम से अगले दो से तीन वर्षों में सूचीबद्ध कंपनियों का बाज़ार मूल्यांकन 50 से 100 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। Goldman Sachs की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस उछाल की मुख्य वजह निजी AI स्टार्टअप्स का IPO के ज़रिये शेयर बाज़ार में प्रवेश करना होगा। 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई यह रिपोर्ट भारत के AI परिदृश्य की बदलती तस्वीर को रेखांकित करती है।
IPO की संभावना और मूल्यांकन का गणित
Goldman Sachs की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत में लगभग 70 मिड-टू-लेट-स्टेज निजी AI कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत आने वाले समय में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) ला सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों की लिस्टिंग उनके मौजूदा अनुमानित मूल्य से औसतन लगभग चार गुना अधिक वैल्यूएशन पर हो सकती है — यानी निवेशकों के लिए यह एक बड़ा दांव हो सकता है।
Goldman Sachs में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो ने कहा, 'इन लिस्टिंग से भारत में AI से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का दायरा बढ़ सकता है, जिससे AI वैल्यू चेन के कई ऐसे हिस्से भी पब्लिक मार्केट में आ सकते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व अभी तक कम रहा है।'
फंडिंग में तीन गुना उछाल, वैश्विक पहचान
2024 के बाद से भारतीय AI स्टार्टअप्स के लिए प्राइवेट इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो चुकी है। साथ ही, कुल प्राइवेट इक्विटी निवेश में AI का हिस्सा चार गुना बढ़कर देश में लगाई गई कुल प्राइवेट पूंजी का लगभग पाँचवाँ हिस्सा हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर AI में निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब प्राइवेट AI फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल है, और नई फंडिंग पाने वाली AI कंपनियों के लिहाज़ से शीर्ष चार देशों में आता है। रिपोर्ट में 84 प्राइवेट कंपनियों को 'प्राइवेट AI कंटेंडर्स' के रूप में चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल अनुमानित वैल्यू 55 अरब डॉलर है।
अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स में सबसे बड़ा अवसर
रिपोर्ट के अनुसार 2025 के बाद से भारत में AI से जुड़ी कुल प्राइवेट फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत इन्हीं 'कंटेंडर' कंपनियों को मिला है। सबसे बड़ा अवसर 'अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स' — यानी AI को संभव बनाने वाले आधारभूत क्षेत्रों — में है, जिनकी वैल्यू लगभग 35 अरब डॉलर आँकी गई है।
इस श्रेणी में पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, चिप डिज़ाइन, क्वांटम कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विसेज़ और डेटा मैनेजमेंट के क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियाँ शामिल हैं। Goldman Sachs का अनुमान है कि भविष्य में AI कंपनियों की लिस्टिंग की कुल संभावित वैल्यू में से लगभग दो-तिहाई (66%) हिस्सा 'अपस्ट्रीम AI इनेबलर्स' का हो सकता है।
भारत के बाज़ार पर व्यापक असर
गौरतलब है कि भारतीय शेयर बाज़ार अब तक मुख्यतः IT सेवा, बैंकिंग और FMCG क्षेत्रों पर टिका रहा है। AI स्टार्टअप्स की लिस्टिंग एक नया 'टेक-प्योर-प्ले' सेगमेंट बना सकती है, जो घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों दोनों को आकर्षित कर सकता है। यह पहली बार नहीं है जब किसी रिपोर्ट ने भारत के डिजिटल टेक सेक्टर में बड़े मूल्यांकन की भविष्यवाणी की हो — लेकिन AI-केंद्रित संरचना इस बार नई और विशिष्ट है।
आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि बाज़ार नियामक सेबी (SEBI) और नीति-निर्माता AI स्टार्टअप्स के IPO के लिए किस तरह का नियामकीय ढाँचा तैयार करते हैं, और क्या इन कंपनियों का वास्तविक राजस्व प्रदर्शन निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरता है।