भारत का प्राइवेट क्रेडिट एयूएम 2030 तक ₹65 अरब डॉलर पार करेगा, 21-24% CAGR का अनुमान: केयरएज
सारांश
मुख्य बातें
भारत-केंद्रित प्राइवेट क्रेडिट के तहत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2030 तक बढ़कर 56-65 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो कैलेंडर वर्ष 2025 के 21.8 अरब डॉलर के मुकाबले लगभग तीन गुना अधिक है। केयरएज रेटिंग्स द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह विस्तार 21-24 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है।
बाज़ार अभी शुरुआती चरण में
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार अभी विकास के प्रारंभिक दौर में है। जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी महज 0.6 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में यह 4.4 प्रतिशत और ब्रिटेन में 8.4 प्रतिशत है। यह तुलना इस क्षेत्र में दीर्घकालिक विस्तार की बड़ी संभावनाओं को उजागर करती है।
भारत का क्रेडिट-टू-जीडीपी अनुपात, जो सामान्यतः 90 से 102 प्रतिशत के दायरे में रहता है, 2022 में गिरकर 88.3 प्रतिशत पर आ गया था। इसके बाद यह क्रमशः 2023 में 93.8 प्रतिशत, 2024 में 95.3 प्रतिशत और 2025 में 102.3 प्रतिशत तक पहुँच गया। वहीं, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह अनुपात 140 से 200 प्रतिशत के बीच बना हुआ है।
प्राइवेट क्रेडिट की भूमिका और वृद्धि के कारण
प्राइवेट क्रेडिट मुख्यतः उन मध्यम आकार की कंपनियों, विकास के चरण में मौजूद कारोबारों और कम परिसंपत्ति-आधार वाले व्यवसायों की वित्तपोषण ज़रूरतें पूरी करता है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग माध्यमों से पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बैंकों के सख्त ऋण नियम और नियामकीय अनुपालन की जटिलताएँ बढ़ी हैं।
रिपोर्ट में वृद्धि के प्रमुख कारणों में विशेष जरूरतों के अनुरूप वित्तपोषण की माँग, ऋण पुनर्वित्तपोषण के बड़े अवसर और दिवाला एवं ऋण वसूली व्यवस्था का मजबूत होना शामिल हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
केयरएज एडवाइजरी की सीनियर डायरेक्टर तन्वी शाह ने कहा, 'लचीली पूंजी की बढ़ती कॉरपोरेट माँग के चलते भारत का प्राइवेट क्रेडिट बाज़ार 2030 तक 56-65 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। मानकीकृत ऋण उत्पादों से इतर वित्तपोषण की माँग इस वृद्धि को समर्थन देगी। डायरेक्ट लेंडिंग, वेंचर डेट, स्पेशल सिचुएशंस और रियल एस्टेट क्रेडिट इस विस्तार को गति देने की उम्मीद है।'
शाह ने यह भी कहा कि बाज़ार की वृद्धि को टिकाऊ रिटर्न में बदलने के लिए अनुशासित ऋण मूल्यांकन, जोखिम के अनुरूप ब्याज दरें और मज़बूत ऋण शर्तों का संरक्षण अनिवार्य होगा।
केयरएज एडवाइजरी के असिस्टेंट डायरेक्टर कल्पेश मंत्री ने कहा, 'प्राइवेट क्रेडिट पारंपरिक ऋण व्यवस्था की जगह लेने के बजाय उसके साथ पूरक की भूमिका निभाएगा। यह उन कर्जदारों के लिए लचीले और आवश्यकता-अनुरूप वित्तपोषण समाधान उपलब्ध कराकर समग्र वित्तपोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा।'
सबसे तेज़ उभरते क्षेत्र
रिपोर्ट के अनुसार, निकट भविष्य में डायरेक्ट लेंडिंग, वेंचर डेट और रियल एस्टेट डेट प्राइवेट क्रेडिट क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली रणनीतियाँ रहेंगी। यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक भूमिका निभा सकता है।