भारत का क्रेडिट बाज़ार AUM जून 2026 में 18% उछलकर ₹142 लाख करोड़ पर, Experian रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत का क्रेडिट बाज़ार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मज़बूत रफ़्तार से आगे बढ़ा। Experian India की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹142 लाख करोड़ हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि असुरक्षित ऋणों की तेज़ी, उपभोक्ता माँग और गिरते डिलिंक्वेंसी स्तरों से प्रेरित रही।
मुख्य आँकड़े और वृद्धि का दायरा
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुल लोन सोर्सिंग वैल्यू ₹20 लाख करोड़ रही, जिसमें सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालाँकि आँकड़ों के अनुसार यह वृद्धि पिछली तिमाही — वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही — की तुलना में कुछ धीमी रही।
उत्पाद-आधारित आँकड़ों पर नज़र डालें तो पर्सनल लोन AUM बढ़कर ₹16.2 लाख करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर 14 प्रतिशत अधिक है। नए पर्सनल लोन वितरण में 32 प्रतिशत की उछाल के साथ यह आँकड़ा ₹3 लाख करोड़ तक पहुँच गया।
असुरक्षित और सुरक्षित ऋण का संतुलन
क्रेडिट बाज़ार की वृद्धि में असुरक्षित ऋण (अनसेक्योर्ड लेंडिंग) महत्त्वपूर्ण योगदानकर्ता बनकर उभरे। इस श्रेणी में नए ऋण वितरण की मात्रा 26 प्रतिशत बढ़ी, जिसे पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन और क्रेडिट कार्ड श्रेणी ने गति दी। क्रेडिट कार्ड AUM ₹3.15 लाख करोड़ रहा — इसमें मामूली 0.1 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन नए कार्ड और उपयोग में फिर से सुधार के संकेत दिखे।
दूसरी ओर, खुदरा ऋण पोर्टफोलियो के मूल्य के लिहाज़ से सुरक्षित ऋण (सेक्योर्ड लेंडिंग) की हिस्सेदारी अभी भी प्रमुख बनी हुई है। होम लोन AUM 13 प्रतिशत बढ़कर ₹43.6 लाख करोड़ रहा, और औसत होम लोन टिकट साइज़ बढ़कर ₹34.8 लाख हो गया, जो एक वर्ष पहले ₹32.2 लाख था।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन AUM 37 प्रतिशत उछलकर ₹1.1 लाख करोड़ हो गया, जबकि टू-व्हीलर लोन AUM बढ़कर ₹1.8 लाख करोड़ पर पहुँच गया।
क्रेडिट गुणवत्ता में सुधार
क्रेडिट गुणवत्ता के मोर्चे पर भी स्थिति बेहतर रही। जून 2026 में नेट 30+ डिलिंक्वेंसी का स्तर 3 प्रतिशत रहा, जो जून 2025 के 4.1 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है। इससे संकेत मिलता है कि ऋण चूक का दबाव नियंत्रित बना हुआ है।
NBFC और बैंकों की बदलती भूमिका
रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC) उपभोग आधारित ऋण उत्पादों — विशेष रूप से पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन और दोपहिया वाहन ऋण — में अपनी स्थिति मज़बूत कर रही हैं। वहीं, बैंक होम लोन और ऑटो लोन जैसे बड़े टिकट आकार वाले सुरक्षित ऋण उत्पादों में मज़बूत उपस्थिति बनाए हुए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) असुरक्षित ऋणों पर जोखिम भार को लेकर सतर्क दृष्टिकोण बनाए हुए है। इस पृष्ठभूमि में NBFC का बढ़ता दबदबा नियामकीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
Experian India के कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष जैन ने कहा कि भारत का क्रेडिट बाज़ार लगातार मज़बूती दिखा रहा है और अच्छा एसेट क्वालिटी प्रदर्शन आगे के विस्तार के लिए मज़बूत आधार प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि असुरक्षित ऋणों की तेज़ी उपभोक्ताओं की बदलती वित्तीय ज़रूरतों को दर्शाती है, जबकि सुरक्षित ऋणों की मज़बूती बाज़ार के संतुलित विकास का संकेत है।
आगे की तिमाहियों में क्रेडिट बाज़ार की दिशा काफ़ी हद तक ब्याज दरों की गति, उपभोक्ता आय परिदृश्य और नियामकीय संकेतों पर निर्भर करेगी।