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भारत की GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रहेगी, FTA और खपत बनेंगे इंजन: HSBC MF इंडिया CEO कैलाश कुलकर्णी

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भारत की GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रहेगी, FTA और खपत बनेंगे इंजन: HSBC MF इंडिया CEO कैलाश कुलकर्णी

सारांश

वैश्विक उथल-पुथल के बीच HSBC MF इंडिया के CEO कैलाश कुलकर्णी का दावा है कि मजबूत खपत, बढ़ता FDI और नए FTA भारत को 7% से ऊपर की ग्रोथ पर टिकाए रखेंगे। जूट से लेकर डिफेंस तक — FTA का दायरा बहुक्षेत्रीय है, और SIP के बढ़ते आँकड़े निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता की गवाही दे रहे हैं।

मुख्य बातें

HSBC MF इंडिया के CEO कैलाश कुलकर्णी ने कहा कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद 7% से अधिक की विकास दर बनाए रखेगा।
भारतीय ग्रोथ के तीन मुख्य स्तंभ: मजबूत बैलेंसशीट , बढ़ता FDI , और बहुदेशीय FTA ।
FTA से जूट, टेक्सटाइल, ऑटो, रक्षा, आईटी सहित अनेक क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त MPC बैठक में निजी खपत के मजबूत बने रहने की पुष्टि की।
मिडकैप और स्मॉलकैप दीर्घकाल में लार्जकैप से बेहतर, लेकिन अल्पकाल में अस्थिरता अधिक ।
SIP के आँकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जो खुदरा निवेशकों की बढ़ती जागरूकता का संकेत।

HSBC म्यूचुअल फंड इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलाश कुलकर्णी ने 5 अगस्त 2025 को कहा कि मजबूत घरेलू खपत और बढ़ते निर्यात के बल पर भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा। उनके अनुसार, हाल ही में कई देशों के साथ हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से निर्यात को नई गति मिलेगी और देश की विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के तीन स्तंभ

कुलकर्णी ने एक विशेष साक्षात्कार में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे तीन मुख्य कारण गिनाए। पहला — सरकार का ध्यान बैलेंसशीट को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होना। दूसरा — देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का निरंतर बढ़ना। तीसरा — भारत द्वारा दुनिया के कई देशों के साथ FTA पर हस्ताक्षर करना, जो बहुक्षेत्रीय निर्यात को प्रोत्साहित करेगा।

उन्होंने रेखांकित किया कि ये समझौते केवल किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जूट, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा, आईटी सहित अनेक क्षेत्रों को इनका लाभ मिलेगा।

RBI गवर्नर ने भी की खपत की पुष्टि

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में देश में निजी खपत के मजबूत बने रहने की पुष्टि की है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के चलते अनिश्चितता का माहौल है। गौरतलब है कि मजबूत घरेलू माँग भारत के लिए पारंपरिक रूप से बाहरी झटकों के विरुद्ध एक प्रभावी ढाल रही है।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर दृष्टिकोण

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के भविष्य के प्रदर्शन पर कुलकर्णी ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से इन श्रेणियों ने लार्जकैप की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी अधिक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाज़ार में अस्थिरता के दौर में मिडकैप और स्मॉलकैप में अल्पकालिक कमज़ोरी देखी जा सकती है, परंतु दीर्घकालिक निवेश के नज़रिए से ये लार्जकैप से आगे रहते हैं।

SIP और निवेशक जागरूकता

वैश्विक अस्थिरता के बीच खुदरा निवेशकों की परिपक्वता पर कुलकर्णी ने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चले निवेश जागरूकता अभियानों के कारण निवेशक अब बाज़ार के उतार-चढ़ाव को समझकर निर्णय ले रहे हैं। इसी का परिणाम है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के आँकड़े लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं।

आगे चलकर, FTA के क्रियान्वयन की गति और वैश्विक माँग में सुधार यह तय करेंगे कि भारत का निर्यात-आधारित विकास का यह नया अध्याय कितना टिकाऊ साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन FTA के वास्तविक निर्यात प्रभाव को दिखने में समय लगता है — भारत-UAE और भारत-ऑस्ट्रेलिया FTA के शुरुआती आँकड़े मिले-जुले रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या घरेलू खपत की यह मजबूती ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत तक समान रूप से पहुँच रही है, या यह मुख्यतः शहरी मध्यवर्ग तक सीमित है। SIP के बढ़ते आँकड़े उत्साहजनक हैं, परंतु बाज़ार में तेज गिरावट आने पर खुदरा निवेशकों की वास्तविक परिपक्वता की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HSBC MF इंडिया के CEO ने भारत की ग्रोथ को लेकर क्या कहा?
HSBC म्यूचुअल फंड इंडिया के CEO कैलाश कुलकर्णी ने कहा कि मजबूत घरेलू खपत, बढ़ता FDI और बहुदेशीय FTA मिलकर भारत की GDP ग्रोथ को 7% से ऊपर बनाए रखेंगे। उनके अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन करेगा।
FTA से भारत के किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
कुलकर्णी के अनुसार, FTA का लाभ किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा — जूट, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा और आईटी सहित कई क्षेत्रों को इससे निर्यात के नए अवसर मिलेंगे। यह बहुक्षेत्रीय विस्तार भारत के निर्यात आधार को व्यापक बनाएगा।
RBI गवर्नर ने खपत को लेकर क्या रुख अपनाया है?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त की मौद्रिक नीति समिति बैठक में देश में निजी खपत के मजबूत बने रहने की पुष्टि की है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक भी घरेलू माँग को भारत की विकास गाथा का मजबूत आधार मान रहा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश करना कितना सुरक्षित है?
कुलकर्णी के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप ने दीर्घकाल में लार्जकैप से बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इनमें अल्पकालिक उतार-चढ़ाव अधिक होता है। बाज़ार में अस्थिरता के दौर में इन श्रेणियों में कमज़ोरी देखी जा सकती है, इसलिए दीर्घकालिक नज़रिए से निवेश करना उचित रहता है।
SIP के आँकड़े क्यों लगातार बढ़ रहे हैं?
कुलकर्णी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में चले निवेश जागरूकता अभियानों के कारण खुदरा निवेशक अब बाज़ार के उतार-चढ़ाव को समझकर निवेश कर रहे हैं। SIP बाज़ार की अस्थिरता से बचाव का एक प्रभावी तरीका है और निवेशकों की यह समझ ही SIP के बढ़ते आँकड़ों में परिलक्षित हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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