भारत की GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रहेगी, FTA और खपत बनेंगे इंजन: HSBC MF इंडिया CEO कैलाश कुलकर्णी
सारांश
मुख्य बातें
HSBC म्यूचुअल फंड इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैलाश कुलकर्णी ने 5 अगस्त 2025 को कहा कि मजबूत घरेलू खपत और बढ़ते निर्यात के बल पर भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर प्रदर्शन करता रहेगा। उनके अनुसार, हाल ही में कई देशों के साथ हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से निर्यात को नई गति मिलेगी और देश की विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के तीन स्तंभ
कुलकर्णी ने एक विशेष साक्षात्कार में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के पीछे तीन मुख्य कारण गिनाए। पहला — सरकार का ध्यान बैलेंसशीट को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होना। दूसरा — देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का निरंतर बढ़ना। तीसरा — भारत द्वारा दुनिया के कई देशों के साथ FTA पर हस्ताक्षर करना, जो बहुक्षेत्रीय निर्यात को प्रोत्साहित करेगा।
उन्होंने रेखांकित किया कि ये समझौते केवल किसी एक उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जूट, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, रक्षा, आईटी सहित अनेक क्षेत्रों को इनका लाभ मिलेगा।
RBI गवर्नर ने भी की खपत की पुष्टि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में देश में निजी खपत के मजबूत बने रहने की पुष्टि की है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के चलते अनिश्चितता का माहौल है। गौरतलब है कि मजबूत घरेलू माँग भारत के लिए पारंपरिक रूप से बाहरी झटकों के विरुद्ध एक प्रभावी ढाल रही है।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर दृष्टिकोण
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के भविष्य के प्रदर्शन पर कुलकर्णी ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से इन श्रेणियों ने लार्जकैप की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी अधिक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाज़ार में अस्थिरता के दौर में मिडकैप और स्मॉलकैप में अल्पकालिक कमज़ोरी देखी जा सकती है, परंतु दीर्घकालिक निवेश के नज़रिए से ये लार्जकैप से आगे रहते हैं।
SIP और निवेशक जागरूकता
वैश्विक अस्थिरता के बीच खुदरा निवेशकों की परिपक्वता पर कुलकर्णी ने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चले निवेश जागरूकता अभियानों के कारण निवेशक अब बाज़ार के उतार-चढ़ाव को समझकर निर्णय ले रहे हैं। इसी का परिणाम है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के आँकड़े लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं।
आगे चलकर, FTA के क्रियान्वयन की गति और वैश्विक माँग में सुधार यह तय करेंगे कि भारत का निर्यात-आधारित विकास का यह नया अध्याय कितना टिकाऊ साबित होता है।