मुक्त व्यापार समझौते भारत को वैश्विक झटकों से बचा रहे हैं: HSBC की प्रांजुल भंडारी
सारांश
मुख्य बातें
HSBC में भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने 9 जून 2026 को कहा कि भारत ने बीते 12 वर्षों में 6 से 6.5 प्रतिशत की औसत विकास दर बनाए रखी है, और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश को मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच आर्थिक मजबूती दे रहे हैं। उनके अनुसार, ये समझौते भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने, घरेलू उत्पादन को गति देने और निर्यात क्षमता विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
मुक्त व्यापार समझौतों की भूमिका
भंडारी ने कहा, 'हमने कई विकसित देशों से ट्रेड डील साइन की हैं, इससे भारत में FDI में बढ़ोतरी होगी। इससे हम और मैन्युफैक्चर कर पाएंगे और ज्यादा निर्यात कर सकेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्गठन के दौर से गुजर रही हैं और कई देश उत्पादन आधार के विविधीकरण की तलाश में हैं।
चीन प्लस वन रणनीति से भारत को अवसर
भंडारी ने रेखांकित किया कि दुनिया चीन प्लस वन रणनीति के तहत व्यापार के नए साझेदारों और नए केंद्रों की खोज में है। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति भारत के लिए एक बड़ा अवसर है — बशर्ते देश अपनी विनिर्माण क्षमता और बुनियादी ढाँचे को समय पर मजबूत करे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों का ध्यान खींचा है।
दोहरे झटके: ऊर्जा और अल नीनो
आर्थिक विकास की संभावनाओं पर भंडारी ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027 'सप्लाई शॉक और एनर्जी शॉक का साल' है। इसके अलावा, उन्होंने अल नीनो जलवायु प्रभाव की भी चेतावनी दी — जिसके अगले कुछ महीनों में आने की संभावना है।
भंडारी ने कहा, 'अगर आपको दोहरे झटके — एनर्जी शॉक और अल नीनो क्लाइमेट शॉक — का सामना करना पड़े, तो ऐसे साल में बहुत तेजी से विकास करना मुश्किल होता है और यह सिर्फ भारत के लिए नहीं है। मुझे लगता है कि यह दुनिया भर के सभी देशों के लिए है।'
वित्त वर्ष 2027 के लिए HSBC का विकास अनुमान
भंडारी ने स्पष्ट किया कि HSBC का वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, 'हमें अभी तक डेटा में ग्रोथ पर पड़ने वाला झटका दिखाई नहीं दिया है क्योंकि इसे दिखने में कुछ समय लगता है। लेकिन मुझे लगता है कि सितंबर तिमाही से शुरू होकर, लगभग दो से तीन तिमाहियों तक ग्रोथ में काफी कमी आ सकती है, क्योंकि हम ऊर्जा और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में उछाल का सामना कर रहे हैं।'
आगे की राह
भंडारी के विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सभी अर्थव्यवस्थाओं को इन दोनों आपूर्ति झटकों की कीमत चुकानी होगी। भारत की दीर्घकालिक स्थिति मजबूत बनी हुई है — लेकिन निकट भविष्य में ऊर्जा और खाद्य मूल्य दबाव विकास दर पर असर डालने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।