त्योहारी सीजन 2026 में ₹7 लाख करोड़ से अधिक कारोबार का अनुमान, पिछले साल से 15-18% बढ़ोतरी: कैट
सारांश
मुख्य बातें
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमानों के अनुसार, भारत में 2026 के त्योहारी सीजन — नवरात्रि से दीपावली तक — में कुल कारोबार ₹7 लाख करोड़ से अधिक पहुँच सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 से 18 प्रतिशत की वृद्धि होगी। नई दिल्ली में 14 अक्टूबर 2026 को जारी यह अनुमान देशभर के व्यापार संघों, बाज़ार रुझानों और ग्रामीण-अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में बढ़ी व्यावसायिक गतिविधियों पर आधारित है।
पिछले साल के मुकाबले कितना बड़ा होगा यह सीजन
कैट के नेशनल सेक्रेटरी जनरल और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि 2025 के त्योहारी सीजन में कुल कारोबार लगभग ₹6.05 लाख करोड़ रहा था, जिसमें ₹5.40 लाख करोड़ का माल व्यापार और ₹65,000 करोड़ की सेवाएँ शामिल थीं। इस बार सेवा क्षेत्र में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिससे सर्विस सेक्टर का कारोबार ₹80,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ के बीच रहने की संभावना है।
किन सेक्टरों को होगा सबसे अधिक फायदा
कैट के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, त्योहारी व्यापार में ग्रोसरी और एफएमसीजी की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद सोना, चाँदी और ज्वेलरी (10 प्रतिशत), इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान (8 प्रतिशत), तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रेडीमेड कपड़े और गिफ्ट आइटम (प्रत्येक 7 प्रतिशत) का स्थान है।
होम डेकोर और फर्नीचर व फर्निशिंग — दोनों की हिस्सेदारी 5-5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अलावा टेक्सटाइल, मिठाई-नमकीन, पूजा सामग्री, फल-ड्राई फ्रूट्स, बेकरी, जूते-चप्पल और संबंधित व्यवसाय भी त्योहारी माँग से लाभान्वित होंगे।
सेवा क्षेत्र में ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्टोरेंट, टूरिज्म, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट और लोकल ट्रांसपोर्टेशन को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
सांस्कृतिक आयोजनों से भी आर्थिक उत्साह
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि रामलीला, दुर्गा पूजा उत्सव, गरबा-डांडिया इवेंट्स, मेले, प्रदर्शनियाँ और सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से भी आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह संकेत देता है कि त्योहारी माँग अब केवल उत्पाद-केंद्रित नहीं रही, बल्कि अनुभव-आधारित खर्च भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
स्थानीय उत्पादों और एमएसएमई को प्राथमिकता
खंडेलवाल ने इस बार के उपभोक्ता रुझान में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, उपभोक्ता अब स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों, हस्तशिल्प, भारतीय ब्रांड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के उत्पादों को अधिक पसंद कर रहे हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति के लिए 'वोकल फॉर लोकल', 'मेड इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों को आंशिक रूप से श्रेय दिया।
उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे इस त्योहारी मौसम में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे व्यापारियों, कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और स्थानीय सेवा प्रदाताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
क्या होगा आगे
कैट को उम्मीद है कि नवरात्रि से दीपावली 2026 तक का यह त्योहारी सीजन देश के व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा। गौरतलब है कि ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में बढ़ती क्रय शक्ति इस बार के आँकड़ों को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक व्यापक आधार दे रही है। यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय खुदरा और सेवा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक त्योहारी सीजन बन सकता है।