7 नवंबर 2026
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दिवाली 2026: देशभर में बिक्री ₹7 लाख करोड़ के पार, दिल्ली में ₹1 लाख करोड़ का रिकॉर्ड — कैट

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दिवाली 2026: देशभर में बिक्री ₹7 लाख करोड़ के पार, दिल्ली में ₹1 लाख करोड़ का रिकॉर्ड — कैट

सारांश

दिवाली 2026 सिर्फ उत्सव नहीं, उपभोक्ता शक्ति का प्रदर्शन बनी। कैट के अनुसार दिल्ली में ₹1 लाख करोड़ और देशभर में ₹7 लाख करोड़ की बिक्री का अनुमान, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ती प्राथमिकता और लाखों छोटे व्यापारियों को राहत — यह त्योहारी सीज़न भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मज़बूत संकेत है।

मुख्य बातें

कैट (CAIT) के अनुसार, दिवाली 2026 में नई दिल्ली में त्योहारी कारोबार ₹1 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया।
राष्ट्रीय स्तर पर कुल बिक्री ₹6 लाख करोड़ से ऊपर पहुँच चुकी है और ₹7 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
सोना-चाँदी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, ऑटोमोबाइल और स्वदेशी उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय तेज़ी दर्ज की गई।
कैट महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि लाखों छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी विक्रेता और दिहाड़ी मज़दूर इस त्योहारी खरीदारी से लाभान्वित हुए।
उपभोक्ताओं में वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
1 नवंबर 2026 की विपक्षी रैली से हुए व्यापारिक नुकसान की भरपाई त्योहारी खरीदारी से हुई — कैट के अनुसार।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट / CAIT) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दिवाली और धनतेरस के दौरान नई दिल्ली में त्योहारी कारोबार ₹1 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कुल बिक्री ₹7 लाख करोड़ के आँकड़े को छूने की दिशा में बढ़ रही है। 7 नवंबर 2026 को जारी इस बयान में कैट ने इसे देश के व्यापार जगत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

कौन-सी श्रेणियाँ रहीं सबसे आगे

इस त्योहारी सीज़न में लगभग सभी प्रमुख उपभोक्ता श्रेणियों में मज़बूत माँग दर्ज की गई। सोना, चाँदी और आभूषण के साथ-साथ मोबाइल फोन, एलईडी टेलीविज़न, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर की बिक्री में उल्लेखनीय तेज़ी आई।

कपड़ा और फैशन क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन किया — साड़ियाँ, सूट, कुर्ते, रेडीमेड परिधान, बच्चों के कपड़े और पारंपरिक वेशभूषा की माँग में बड़ा उछाल देखने को मिला। मिट्टी के दीये, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियाँ, पूजा सामग्री, मिठाइयाँ और अन्य खाद्य उत्पादों की बिक्री भी काफ़ी बढ़ी।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी खरीदारों की सक्रिय भागीदारी रही — कारों, दोपहिया और वाणिज्यिक वाहनों में सकारात्मक रुझान दिखा। इसके अलावा खादी, हथकरघा उत्पाद, हस्तशिल्प, स्थानीय कारीगरों की वस्तुएँ और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार सामानों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

कैट महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का बयान

कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में दिवाली से संबंधित कारोबार ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा ₹6 लाख करोड़ को पार कर चुका है। उन्होंने कहा, 'बाज़ारों में लगातार बढ़ती ग्राहकों की भीड़ और मज़बूत खरीदारी रुझान को देखते हुए कुल कारोबार ₹7 लाख करोड़ से अधिक होने की संभावना है।'

खंडेलवाल ने यह भी बताया कि यह विशाल कारोबार केवल बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे छोटे और मध्यम व्यापारी, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, दिहाड़ी मज़दूर, सूक्ष्म और कुटीर उद्योग, स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमी, कारीगर, परिवहन व्यवसायी, पैकेजिंग उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता — लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिला है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ती प्राथमिकता

खंडेलवाल के अनुसार, इस वर्ष के त्योहारी बाज़ारों में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया — उपभोक्ता अब पहले की तुलना में अधिक संख्या में भारतीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' की अपील का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी आदतों में स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

गौरतलब है कि स्थानीय कारीगरों, निर्माताओं, लघु उद्योगों और स्थानीय उद्यमियों को मिल रहे उपभोक्ता समर्थन से घरेलू उत्पादन और स्थानीय रोज़गार को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

राजनीतिक व्यवधान और त्योहारी राहत

खंडेलवाल ने बताया कि बाज़ारों में अभूतपूर्व भीड़ ने हाल के दिनों में दिल्ली में हुए राजनीतिक प्रदर्शनों और विरोध रैलियों के कारण हुए कारोबारी नुकसान की भरपाई का अवसर भी दिया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 1 नवंबर 2026 को आयोजित विपक्षी रैली के कारण व्यापार को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन त्योहारी खरीदारी ने व्यापारियों को राहत दी।

कैट ने दिल्ली के व्यापारिक समुदाय की ओर से नागरिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस वर्ष दिवाली के दौरान उपभोक्ताओं ने जो उत्साह और भागीदारी दिखाई, उसने पूरे व्यापार जगत को नई ऊर्जा दी है।

आगे की दिशा

कैट के अनुमान के अनुसार त्योहारी खरीदारी का यह सिलसिला आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिससे अंतिम बिक्री के आंकड़े और भी ऊँचे हो सकते हैं। यह रुझान यह भी संकेत देता है कि भारतीय उपभोक्ता भावना इस त्योहारी सीज़न में मज़बूत बनी रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि ये एक व्यापारी संगठन के स्व-रिपोर्ट किए गए अनुमान हैं, जिनकी स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुई है। हर साल दिवाली के बाद ऐसे बड़े आंकड़े आते हैं, लेकिन क्या ये वास्तविक खुदरा डेटा, GST संग्रह या उपभोक्ता खर्च सर्वेक्षणों से मेल खाते हैं — यह सवाल अनुत्तरित रहता है। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ती प्राथमिकता का दावा सकारात्मक है, परंतु ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की बढ़ती हिस्सेदारी — जिसमें कई विदेशी ब्रांड और आयातित सामान शामिल हैं — को इस तस्वीर से अलग नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है: क्या यह उपभोक्ता उत्साह टिकाऊ है, या यह बड़े पैमाने पर ब्याज-मुक्त EMI और छूट-आधारित खरीदारी से संचालित है?
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 में देशभर में कितनी बिक्री हुई?
कैट (CAIT) के अनुमानों के अनुसार, दिवाली 2026 में देशभर में कुल बिक्री ₹7 लाख करोड़ से अधिक होने की संभावना है, जबकि अब तक ₹6 लाख करोड़ से ऊपर का आंकड़ा दर्ज किया जा चुका है। ये अनुमान कैट के सदस्य व्यापारियों द्वारा दिए गए आंकड़ों पर आधारित हैं।
दिल्ली में दिवाली का कारोबार कितना रहा?
कैट के अनुसार, नई दिल्ली में दिवाली 2026 के दौरान त्योहारी कारोबार ₹1 लाख करोड़ के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया। यह संगठन के इतिहास में दिल्ली के लिए एक नया उच्चतम स्तर बताया जा रहा है।
इस दिवाली सबसे ज़्यादा किन उत्पादों की बिक्री हुई?
कैट के अनुसार सोना, चाँदी, आभूषण, मोबाइल फोन, एलईडी टेलीविज़न, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और पारंपरिक परिधानों की बिक्री में सबसे अधिक तेज़ी देखी गई। ऑटोमोबाइल और स्वदेशी हस्तशिल्प उत्पादों की माँग भी उल्लेखनीय रही।
इस त्योहारी खरीदारी से किसे फायदा हुआ?
कैट महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, इस बिक्री का लाभ केवल बड़े व्यापारियों तक नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, दिहाड़ी मज़दूरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं तक भी पहुँचा।
क्या इस दिवाली उपभोक्ताओं ने स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी?
कैट के अनुसार, इस वर्ष उपभोक्ताओं ने पहले की तुलना में अधिक संख्या में भारतीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी। खंडेलवाल ने इसे 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के प्रभाव से जोड़ा, हालाँकि यह दावा संगठन के स्वयं के आकलन पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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