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भारत का ग्रीन अमोनिया मिशन: प्राकृतिक गैस संयंत्र बनेगा 11 लाख टन क्षमता वाला विश्व के सबसे बड़े प्लांट में से एक

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भारत का ग्रीन अमोनिया मिशन: प्राकृतिक गैस संयंत्र बनेगा 11 लाख टन क्षमता वाला विश्व के सबसे बड़े प्लांट में से एक

सारांश

भारत का एक मौजूदा गैस-आधारित अमोनिया-यूरिया संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया प्लांट में से एक बन सकता है — 11 लाख टन वार्षिक क्षमता के साथ। ADB और जापान की ACCEL पहल के तहत 10 करोड़ डॉलर के वित्तपोषण से यह परियोजना भारत के नेट-जीरो और ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्यों को नई ऊर्जा देती है।

मुख्य बातें

भारत एक मौजूदा प्राकृतिक गैस-आधारित अमोनिया और यूरिया संयंत्र को ग्रीन अमोनिया प्लांट में परिवर्तित करने की योजना बना रहा है।
रूपांतरण के बाद यह संयंत्र विश्व के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है, अनुमानित वार्षिक क्षमता 11 लाख टन ।
परियोजना को एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी; ADB और जापान का वित्तीय समर्थन प्राप्त है।
वित्तपोषण में JICA -समर्थित फंड के माध्यम से 10 करोड़ डॉलर का ऋण शामिल है।
यह ACCEL पहल (मई 2026 में शुरू) के तहत ADB-जापान का पहला संयुक्त निवेश है।
भारत जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता हासिल कर चुका है; 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य है।

भारत एक मौजूदा प्राकृतिक गैस-आधारित अमोनिया और यूरिया संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा-चालित ग्रीन अमोनिया प्लांट में रूपांतरित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सिंगापुर स्थित एशियन पावर (Asian Power) की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, रूपांतरण के बाद यह संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया उत्पादन केंद्रों में गिना जा सकता है, जिसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख टन होगी। यह परियोजना भारत के ग्रीन हाइड्रोजन और नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

परियोजना का स्वरूप और प्रमुख भागीदार

रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी। परियोजना को एशियाई विकास बैंक (ADB) और जापान का वित्तीय समर्थन प्राप्त है। यह दोनों पक्षों का पहला संयुक्त निवेश है, जो एक्शन फॉर क्रिएटिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस (ACCEL) पहल के अंतर्गत किया जा रहा है।

वित्तपोषण ढाँचे में 10 करोड़ डॉलर का ऋण भी शामिल है, जो लीडिंग एशियाज़ प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-2 के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस फंड को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) वित्तपोषित करती है और इसका संचालन ADB द्वारा किया जाता है।

ACCEL पहल की भूमिका

ACCEL पहल को मई 2026 में एशियाई विकास बैंक और जापान सरकार ने संयुक्त रूप से आरंभ किया था। इसका मूल उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों और व्यवसायों को ऊँची ऊर्जा लागत, ईंधन मूल्यों की अस्थिरता और आपूर्ति-शृंखला की चुनौतियों से निपटने में सहायता करना है। यह पहल दो स्तरों पर कार्य करती है — अल्पकालिक अवधि में, विशेष रूप से एमएसएमई (MSME) को तरलता सहायता देना; और दीर्घकालिक अवधि में, अधिक विविध एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों को प्रोत्साहन देना।

ADB के अध्यक्ष मासातो कांडा के हवाले से रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, 'जीवाश्म ईंधनों की जगह नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके भारत बहुत कम उत्सर्जन के साथ अमोनिया का उत्पादन कर सकता है और यह उत्पादन स्तर इस उद्योग की दिशा बदलने में मदद कर सकता है।'

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्धियाँ

गौरतलब है कि भारत जुलाई 2026 तक 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर चुका है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही लगभग 55.29 गीगावाट नई गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी गई — जो किसी एक वित्त वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। देश ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका रहने की उम्मीद है।

आम जनता और उद्योग पर असर

ग्रीन अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा भंडारण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर उर्वरक उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने का दबाव बढ़ रहा है। पारंपरिक यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस की भारी खपत होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन की मात्रा अधिक रहती है। यदि यह संयंत्र सफलतापूर्वक ग्रीन अमोनिया उत्पादन में परिवर्तित होता है, तो कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से कम-उत्सर्जन वाले उर्वरक उपलब्ध होने की संभावना बन सकती है।

आगे की राह

यह परियोजना भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के व्यापक ढाँचे के अनुरूप है और देश की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण योजनाओं को ठोस आधार देती है। आने वाले वर्षों में इस परियोजना के क्रियान्वयन की गति और परिचालन मील के पत्थर यह तय करेंगे कि भारत वैश्विक ग्रीन अमोनिया बाज़ार में कितनी जल्दी प्रतिस्पर्धी स्थिति हासिल करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारतीय कृषि क्षेत्र सब्सिडी-आधारित यूरिया का आदी है। जब तक ग्रीन अमोनिया से बने उर्वरकों की कीमत किसानों के लिए वहनीय नहीं होती, तब तक यह परियोजना निर्यात-केंद्रित बनी रहेगी और घरेलू कृषि परिवर्तन की गति धीमी रहेगी। ACCEL जैसी पहल सही दिशा में हैं, परंतु भारत के उर्वरक सब्सिडी ढाँचे में संरचनात्मक सुधार के बिना ग्रीन अमोनिया की घरेलू पैठ सीमित रह सकती है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में ग्रीन अमोनिया संयंत्र परियोजना क्या है?
यह एक प्रस्तावित परियोजना है जिसमें भारत के एक मौजूदा प्राकृतिक गैस-आधारित अमोनिया और यूरिया संयंत्र को नवीकरणीय ऊर्जा-चालित ग्रीन अमोनिया प्लांट में बदला जाएगा। रूपांतरण के बाद इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख टन होने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया संयंत्रों में शुमार हो सकता है।
इस परियोजना को कौन विकसित कर रहा है और इसे वित्त कहाँ से मिलेगा?
परियोजना को एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड विकसित करेगी। इसे एशियाई विकास बैंक (ADB) और जापान का समर्थन प्राप्त है, तथा वित्तपोषण में JICA-समर्थित लीडिंग एशियाज़ प्राइवेट इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-2 के माध्यम से 10 करोड़ डॉलर का ऋण शामिल है।
ACCEL पहल क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
ACCEL (एक्शन फॉर क्रिएटिंग एनर्जी सिक्योरिटी फॉर लॉन्ग-टर्म रेजिलिएंस) पहल को ADB और जापान सरकार ने मई 2026 में शुरू किया था। यह एशिया-प्रशांत देशों को ऊर्जा लागत और आपूर्ति चुनौतियों से निपटने में मदद करती है। भारत का यह ग्रीन अमोनिया प्लांट ACCEL के तहत ADB और जापान का पहला संयुक्त निवेश है।
ग्रीन अमोनिया क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रीन अमोनिया को भविष्य के स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा भंडारण माध्यम के रूप में देखा जाता है। यह नवीकरणीय ऊर्जा से बनाई जाती है, इसलिए इसका कार्बन उत्सर्जन पारंपरिक गैस-आधारित अमोनिया की तुलना में बहुत कम होता है। यह भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और नेट-जीरो लक्ष्यों से सीधे जुड़ी है।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता अभी कहाँ खड़ी है?
जुलाई 2026 तक भारत 300 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली क्षमता हासिल कर चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 55.29 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई। देश का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता तक पहुँचना है।
राष्ट्र प्रेस
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