भारत का किराना बाजार FY30 तक $992 अरब पहुंचेगा, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल बनेगा गेमचेंजर
सारांश
मुख्य बातें
रेडसीर की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू किराना बाजार वित्त वर्ष 2030 तक 8 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ $658 अरब से बढ़कर $992 अरब पहुंचने की राह पर है। 26 जून 2026 को जारी इस रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि अभी भी 91 प्रतिशत किराना खरीदारी पारंपरिक स्टोर्स के ज़रिए होती है, जो दर्शाता है कि डिजिटल चैनलों की हिस्सेदारी अभी तक सीमित बनी हुई है।
बाजार का आकार और विकास की रफ्तार
रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत के 15 करोड़ से अधिक परिवार सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष लगभग $1 ट्रिलियन मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करेंगे, जिसमें किराना की हिस्सेदारी सर्वाधिक रहेगी। इन परिवारों की खर्च करने की क्षमता हर साल 4-5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो इस बाजार को दीर्घकालिक रूप से आकर्षक बनाती है।
टियर-2 और टियर-3 बाजार की अहमियत
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि किराना क्षेत्र में अगले दशक की वृद्धि केवल मेट्रो-केंद्रित रणनीतियों को टियर-2 और टियर-3 शहरों में दोहराकर हासिल नहीं की जा सकेगी। सफल ब्रांड वे होंगे जो स्थानीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं — क्षेत्रीय वैरायटी, छोटे पैक साइज़ और किफायती कीमतें — को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो, मूल्य निर्धारण और वितरण तंत्र में बदलाव करेंगे।
'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल का उभार
रिपोर्ट में एक नए 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल के उभरने का उल्लेख किया गया है, जो क्षेत्रीय उत्पादों, प्राइवेट लेबल और कम लागत वाली डिलीवरी पर आधारित है। इस मॉडल में एक बड़े 'वैल्यू ग्रॉसरी' प्लेयर के पास लगभग 278 क्षेत्रीय और प्राइवेट-लेबल ब्रांड होते हैं — जो पुराने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है।
इसी कड़ी में, इस मॉडल के लगभग 58 प्रतिशत SKU (स्टॉक कीपिंग यूनिट) क्षेत्रीय या प्राइवेट लेबल वाले हैं, जबकि पुराने प्लेटफॉर्म पर यह आंकड़ा मात्र 18-20 प्रतिशत है। यह अंतर स्पष्ट करता है कि नया मॉडल भारत के विविध उपभोक्ता वर्ग की ज़रूरतों के कहीं अधिक अनुरूप है।
डिजिटल कॉमर्स की संभावनाएं
रिपोर्ट के अनुसार, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल भारत के अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इंटरनेट की पहुंच और स्मार्टफोन उपयोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और ग्रामीण व अर्ध-शहरी उपभोक्ता भी धीरे-धीरे ऑनलाइन खरीदारी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस बाजार की दिशा और गति आने वाले वर्षों में भारतीय रिटेल परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।