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भारत का किराना बाजार FY30 तक $992 अरब पहुंचेगा, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल बनेगा गेमचेंजर

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भारत का किराना बाजार FY30 तक $992 अरब पहुंचेगा, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल बनेगा गेमचेंजर

सारांश

रेडसीर की रिपोर्ट बताती है कि भारत का किराना बाजार FY30 तक $992 अरब तक पहुंच सकता है — लेकिन असली दौड़ मेट्रो शहरों में नहीं, टियर-2 और टियर-3 बाजारों में है। 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल, जो क्षेत्रीय उत्पादों और प्राइवेट लेबल पर टिका है, अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों तक पहुंचने की कुंजी बन सकता है।

मुख्य बातें

रेडसीर रिपोर्ट के अनुसार भारत का किराना बाजार 8% से अधिक CAGR के साथ FY30 तक $992 अरब पहुंचने का अनुमान है।
अभी 91% किराना खरीदारी पारंपरिक स्टोर्स के ज़रिए होती है; डिजिटल की हिस्सेदारी अभी भी सीमित।
15 करोड़ से अधिक भारतीय परिवार 2030 तक सालाना $1 ट्रिलियन खर्च करेंगे; किराना की हिस्सेदारी सबसे अधिक।
'वैल्यू ग्रॉसरी' प्लेयर के पास 278 क्षेत्रीय व प्राइवेट-लेबल ब्रांड — पुराने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से तीन गुना अधिक।
इस मॉडल के 58% SKU क्षेत्रीय या प्राइवेट लेबल, जबकि पुराने प्लेटफॉर्म पर यह मात्र 18-20% ।
यह मॉडल भारत के अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने का प्रमुख माध्यम बन सकता है।

रेडसीर की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू किराना बाजार वित्त वर्ष 2030 तक 8 प्रतिशत से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ $658 अरब से बढ़कर $992 अरब पहुंचने की राह पर है। 26 जून 2026 को जारी इस रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि अभी भी 91 प्रतिशत किराना खरीदारी पारंपरिक स्टोर्स के ज़रिए होती है, जो दर्शाता है कि डिजिटल चैनलों की हिस्सेदारी अभी तक सीमित बनी हुई है।

बाजार का आकार और विकास की रफ्तार

रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत के 15 करोड़ से अधिक परिवार सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष लगभग $1 ट्रिलियन मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करेंगे, जिसमें किराना की हिस्सेदारी सर्वाधिक रहेगी। इन परिवारों की खर्च करने की क्षमता हर साल 4-5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो इस बाजार को दीर्घकालिक रूप से आकर्षक बनाती है।

टियर-2 और टियर-3 बाजार की अहमियत

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि किराना क्षेत्र में अगले दशक की वृद्धि केवल मेट्रो-केंद्रित रणनीतियों को टियर-2 और टियर-3 शहरों में दोहराकर हासिल नहीं की जा सकेगी। सफल ब्रांड वे होंगे जो स्थानीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं — क्षेत्रीय वैरायटी, छोटे पैक साइज़ और किफायती कीमतें — को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो, मूल्य निर्धारण और वितरण तंत्र में बदलाव करेंगे।

'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल का उभार

रिपोर्ट में एक नए 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल के उभरने का उल्लेख किया गया है, जो क्षेत्रीय उत्पादों, प्राइवेट लेबल और कम लागत वाली डिलीवरी पर आधारित है। इस मॉडल में एक बड़े 'वैल्यू ग्रॉसरी' प्लेयर के पास लगभग 278 क्षेत्रीय और प्राइवेट-लेबल ब्रांड होते हैं — जो पुराने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है।

इसी कड़ी में, इस मॉडल के लगभग 58 प्रतिशत SKU (स्टॉक कीपिंग यूनिट) क्षेत्रीय या प्राइवेट लेबल वाले हैं, जबकि पुराने प्लेटफॉर्म पर यह आंकड़ा मात्र 18-20 प्रतिशत है। यह अंतर स्पष्ट करता है कि नया मॉडल भारत के विविध उपभोक्ता वर्ग की ज़रूरतों के कहीं अधिक अनुरूप है।

डिजिटल कॉमर्स की संभावनाएं

रिपोर्ट के अनुसार, 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल भारत के अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में इंटरनेट की पहुंच और स्मार्टफोन उपयोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और ग्रामीण व अर्ध-शहरी उपभोक्ता भी धीरे-धीरे ऑनलाइन खरीदारी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस बाजार की दिशा और गति आने वाले वर्षों में भारतीय रिटेल परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डिजिटल खिलाड़ी इस विशाल पारंपरिक बाजार में कितनी हिस्सेदारी वास्तव में हासिल कर पाएंगे — जब 91% खरीदारी अभी भी ऑफलाइन है। 'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या ये प्लेटफॉर्म टियर-2 और टियर-3 शहरों में लॉजिस्टिक्स लागत को नियंत्रित रखते हुए मुनाफा कमा सकते हैं — जो अब तक भारतीय ई-कॉमर्स की सबसे बड़ी चुनौती रही है। रिपोर्ट सही दिशा में इशारा करती है, पर क्रियान्वयन की जटिलताओं पर चुप्पी साधती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के किराना बाजार का FY30 तक कितना बड़ा होने का अनुमान है?
रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का किराना बाजार 8% से अधिक CAGR के साथ वित्त वर्ष 2030 तक $658 अरब से बढ़कर $992 अरब पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि मुख्यतः बढ़ती घरेलू आय और उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी से संभव होगी।
'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल क्या है और यह क्यों अहम है?
'वैल्यू ग्रॉसरी' मॉडल क्षेत्रीय उत्पादों, प्राइवेट लेबल ब्रांड और कम लागत वाली डिलीवरी पर आधारित एक उभरता हुआ रिटेल मॉडल है। यह भारत के अगले 10 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों को डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है।
भारत में अभी डिजिटल किराना खरीदारी की क्या स्थिति है?
रेडसीर रिपोर्ट के अनुसार, अभी 91% किराना खरीदारी पारंपरिक स्टोर्स के ज़रिए होती है और डिजिटल चैनलों की हिस्सेदारी काफी कम है। हालांकि, इंटरनेट की बढ़ती पहुंच और स्मार्टफोन उपयोग के साथ यह अनुपात बदलने की संभावना है।
टियर-2 और टियर-3 बाजारों में किराना ब्रांड कैसे सफल हो सकते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो शहरों की रणनीतियों को सीधे टियर-2 और टियर-3 बाजारों में लागू करना काफी नहीं होगा। सफल ब्रांड वे होंगे जो क्षेत्रीय वैरायटी, छोटे पैक साइज़ और किफायती कीमतों के साथ स्थानीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों के अनुसार अपना पोर्टफोलियो और वितरण तंत्र ढालेंगे।
2030 तक भारतीय परिवारों का कुल उपभोग खर्च कितना होगा?
रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत के 15 करोड़ से अधिक परिवार सामूहिक रूप से प्रतिवर्ष लगभग $1 ट्रिलियन मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का उपभोग करेंगे। इन परिवारों की खर्च करने की क्षमता हर साल 4-5% की दर से बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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