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2030 तक भारतीय ई-कॉमर्स बाजार का आकार 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: नई रिपोर्ट

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2030 तक भारतीय ई-कॉमर्स बाजार का आकार 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: नई रिपोर्ट

सारांश

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक 280-300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में ऑफलाइन रिटेल की मजबूती और ऑनलाइन खरीदारों की संख्या में वृद्धि पर भी प्रकाश डाला गया है।

मुख्य बातें

2030 तक भारतीय ई-कॉमर्स बाजार का आकार 280-300 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
ऑफलाइन रिटेल में भी वृद्धि हो रही है।
भारत में 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं।
ई-सेवाओं की वृद्धि दर 20-22 प्रतिशत रहेगी।
महिला खरीदारों के लिए ऑनलाइन खरीदारी अधिक सुरक्षित है।

मुंबई, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार का आकार 2030 तक 280-300 अरब डॉलर के बीच पहुंचने का अनुमान है, जो वर्तमान में 120-140 अरब डॉलर के स्तर पर है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स की तेजी से वृद्धि के बावजूद, ऑफलाइन रिटेल मार्केट ने भी मजबूती दिखाई है, जो पिछले चार वर्षों में 13-14 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाजार अब ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल के सह-अस्तित्व के चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां मल्टी-चैनल खरीदारी सामान्य हो चुकी है और 10 में से 5 ऑफलाइन खरीदार ऑनलाइन चैनलों पर खरीदारी संबंधी जानकारी प्राप्त करते हैं।

वर्तमान में भारत में लगभग 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं, जिनकी संख्या 2030 तक बढ़कर 44 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत खरीदार ग्रामीण भारत से हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ई-कॉमर्स में ई-रिटेल और ई-सेवाएं शामिल हैं, जिनका अनुमानित मूल्य क्रमशः 75-85 अरब डॉलर और 45-55 अरब डॉलर है। ई-सेवाओं की वृद्धि दर 20-22 प्रतिशत रहेगी, जबकि ई-रिटेल की वृद्धि दर 16-18 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

विभिन्न क्षेत्रों के 12,000 से अधिक उपभोक्ताओं के सर्वेक्षण पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि "आजकल खरीदार सुविधा, विश्वास और आवश्यकता के आधार पर ऑनलाइन और ऑफलाइन के बीच आसानी से आवागमन करते हैं।"

लगभग दो-तिहाई महिला खरीदारों का मानना है कि ऑनलाइन खरीदारी अधिक सुरक्षित है, जिसका मुख्य कारण गोपनीयता, सुगम पहुंच और किसी भी समय स्वतंत्र रूप से खरीदारी करने की क्षमता है।

बीसीजी की पार्टनर और डायरेक्टर कनिका सांघी ने कहा, "भारत के खरीदारों में विविधता बढ़ती जा रही है। उपभोक्ता अपनी जरूरतों के अनुसार विभिन्न प्रारूपों का उपयोग कर रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारों का जनसांख्यिकीय मिश्रण अधिक लोकतांत्रिक होता जा रहा है, इसलिए प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स को सभी टचपॉइंट्स पर सरल और सुरक्षित अनुभव प्रदान करना होगा।"

क्विक कॉमर्स में 100 प्रतिशत से अधिक की सीएजीआर वृद्धि हुई है, जिससे तत्काल खरीदारी मुख्यधारा बन गई है। वहीं, सोशल और चैट कॉमर्स में 40-45 प्रतिशत की सीएजीआर वृद्धि देखने को मिली है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "ऑनलाइन ब्रांडों के लिए 100 करोड़ रुपए के वार्षिक राजस्व तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग 11 साल से घटकर 7 साल हो गया है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हालांकि ऑफलाइन रिटेल भी अपनी जगह बनाए हुए है। यह सह-अस्तित्व का दौर है और उपभोक्ताओं की आवश्यकताएं बदल रही हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक दोगुना हो जाएगा?
हाँ, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक 280-300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
क्या ऑफलाइन रिटेल भी बढ़ रहा है?
जी हाँ, रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑफलाइन रिटेल पिछले चार वर्षों में 13-14 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है।
भारत में कितने ऑनलाइन खरीदार हैं?
वर्तमान में भारत में लगभग 30 करोड़ ऑनलाइन खरीदार हैं, जिनकी संख्या 2030 तक 44 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
ई-कॉमर्स में क्या शामिल है?
ई-कॉमर्स में ई-रिटेल और ई-सेवाएं शामिल हैं, जिनका अनुमानित मूल्य क्रमशः 75-85 अरब डॉलर और 45-55 अरब डॉलर है।
क्या ऑनलाइन खरीदारी सुरक्षित है?
लगभग दो-तिहाई महिला खरीदारों का मानना है कि ऑनलाइन खरीदारी अधिक सुरक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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