8 अक्टूबर 2026
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भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश जनवरी-सितंबर 2026 में 39% उछाल, 5.9 अरब डॉलर पर पहुँचा

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भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश जनवरी-सितंबर 2026 में 39% उछाल, 5.9 अरब डॉलर पर पहुँचा

सारांश

वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र मज़बूत — जनवरी-सितंबर 2026 में संस्थागत निवेश 39% उछलकर 5.9 अरब डॉलर पर पहुँचा। घरेलू निवेशक 3.5 अरब डॉलर के साथ 60% हिस्सेदारी लेकर बाज़ार की अगुआई कर रहे हैं, जो भारतीय रियल एस्टेट की बढ़ती परिपक्वता का प्रमाण है।

मुख्य बातें

भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश जनवरी-सितंबर 2026 में 5.9 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 39% अधिक है।
घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी 3.5 अरब डॉलर (60%) ; घरेलू प्रवाह में 59% की वार्षिक बढ़ोतरी।
विदेशी निवेश 17% बढ़कर लगभग 2.4 अरब डॉलर ; ज़्यादातर विकास-संबंधी परिसंपत्तियों में।
तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में निवेश 1.4 अरब डॉलर ; सालाना 12% वृद्धि, लेकिन पिछली तिमाही से 51% कम।
ऑफिस एसेट्स की कुल निवेश में 37% हिस्सेदारी; बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली एनसीआर मिलकर करीब एक-तिहाई।

भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश जनवरी-सितंबर 2026 की अवधि में लगभग 5.9 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। कोलियर्स इंडिया की 8 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र ने उल्लेखनीय स्थिरता बनाए रखी।

घरेलू निवेशकों की अगुआई

इस नौ महीने की अवधि में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी कुल निवेश के 60 प्रतिशत, यानी लगभग 3.5 अरब डॉलर, पर रही। रिपोर्ट में बताया गया कि घरेलू पूंजी के प्रवाह में साल-दर-साल 59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो भारत में मुख्य रियल एस्टेट परिसंपत्ति वर्गों की बढ़ती गहराई और परिपक्वता को रेखांकित करती है।

गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के बाज़ारों में पूंजी आवंटन को लेकर सावधानी बरती जा रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था का आउटलुक कमज़ोर बना हुआ है।

विदेशी निवेश की स्थिति

रियल एस्टेट में विदेशी निवेश 17 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.4 अरब डॉलर हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश विदेशी पूंजी विकास-संबंधी परिसंपत्तियों में लगाई गई, क्योंकि वैश्विक निवेशक अल्टरनेटिव, हॉस्पिटैलिटी और मिक्स्ड-यूज परियोजनाओं में दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

तीसरी तिमाही का प्रदर्शन

जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में निवेश प्रवाह 1.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 12 प्रतिशत अधिक है, हालाँकि अप्रैल-जून तिमाही की तुलना में यह 51 प्रतिशत कम है।

कोलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक ने कहा, 'तीसरी तिमाही में घरेलू निवेशकों ने लगभग 0.9 अरब डॉलर का निवेश किया, जो कुल निवेश का करीब दो-तिहाई था। स्थानीय निवेशक अभी भी कोर एसेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस तिमाही में घरेलू निवेश का 46 प्रतिशत हिस्सा आवासीय और ऑफिस सेगमेंट में गया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आवासीय निवेश मुख्यतः विकास परियोजनाओं में हुआ, जबकि ऑफिस निवेश का केंद्रबिंदु परिचालनगत परिसंपत्तियाँ रहीं।

प्रमुख परिसंपत्ति वर्ग और शहर

नौ महीने की अवधि में ऑफिस एसेट्स सबसे महत्वपूर्ण परिसंपत्ति वर्ग रहे और कुल निवेश में उनकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही। इसके बाद मिक्स्ड-यूज और वैकल्पिक परिसंपत्तियों का स्थान रहा, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 16-17 प्रतिशत थी। ग्रेड-A ऑफिस एसेट्स में निरंतर लीजिंग गतिविधि और दीर्घकालिक माँग की संभावनाओं ने इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनाए रखी है।

बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली एनसीआर मिलकर कुल निवेश के करीब एक-तिहाई के लिए जिम्मेदार रहे। उल्लेखनीय रूप से, कई शहरों में एक साथ हुई डील्स में सालाना आधार पर दोगुने से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

आगे की संभावनाएँ

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि जोखिम-प्रतिफल के दायरे में बदलती प्राथमिकताएँ और घरेलू पूंजी की बढ़ती गहराई आगामी तिमाहियों में भारतीय रियल एस्टेट निवेश को और गति देंगी। इसके साथ ही विदेशी निवेश की मात्रा में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है। भारत का रियल एस्टेट बाज़ार वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक स्थिर और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तिमाही-दर-तिमाही 51% की गिरावट एक महत्वपूर्ण चेतावनी है जिसे वार्षिक वृद्धि के उत्साह में नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। घरेलू पूंजी का 60% हिस्सेदारी तक पहुँचना भारतीय बाज़ार की बढ़ती आत्मनिर्भरता का संकेत है, लेकिन इसका एक और अर्थ यह भी है कि विदेशी संस्थागत निवेशक अभी भी वैश्विक अनिश्चितता में सतर्क बने हुए हैं। ऑफिस सेगमेंट की 37% हिस्सेदारी और ग्रेड-A परिसंपत्तियों की निरंतर माँग यह दर्शाती है कि भारतीय कॉर्पोरेट रियल एस्टेट बाज़ार 'वर्क फ्रॉम होम' के बाद के दौर में पुनर्संतुलित हो रहा है — यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में निवेश की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश 2026 में कितना रहा?
कोलियर्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-सितंबर 2026 में भारत में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश लगभग 5.9 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। इसमें घरेलू निवेशकों की 60 प्रतिशत यानी 3.5 अरब डॉलर की हिस्सेदारी रही।
भारतीय रियल एस्टेट में घरेलू और विदेशी निवेश का अनुपात क्या है?
जनवरी-सितंबर 2026 में घरेलू निवेशकों ने 3.5 अरब डॉलर (60%) का योगदान दिया, जबकि विदेशी निवेश 2.4 अरब डॉलर (40%) रहा। घरेलू पूंजी प्रवाह में साल-दर-साल 59 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं विदेशी निवेश 17 प्रतिशत बढ़ा।
भारत में रियल एस्टेट के किस सेगमेंट में सबसे अधिक निवेश हुआ?
ऑफिस एसेट्स सबसे प्रमुख परिसंपत्ति वर्ग रहे और नौ महीनों में कुल निवेश में उनकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी। इसके बाद मिक्स्ड-यूज और वैकल्पिक परिसंपत्तियाँ रहीं, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 16-17 प्रतिशत थी।
तीसरी तिमाही 2026 में रियल एस्टेट निवेश का प्रदर्शन कैसा रहा?
जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में निवेश 1.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 12 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि, अप्रैल-जून 2026 तिमाही की तुलना में यह 51 प्रतिशत कम रहा।
भारत में रियल एस्टेट निवेश के लिए कौन से शहर सबसे आगे हैं?
बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली एनसीआर मिलकर कुल संस्थागत रियल एस्टेट निवेश के करीब एक-तिहाई के लिए जिम्मेदार हैं। कई शहरों में एक साथ हुई डील्स में सालाना आधार पर दोगुने से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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