भारत के रियल एस्टेट में Q2 2026 संस्थागत निवेश 16% उछला, 1.9 अरब डॉलर पर पहुँचा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में अप्रैल-जून 2026 (दूसरी तिमाही) के दौरान संस्थागत निवेश तिमाही आधार पर 16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.9 अरब डॉलर पर पहुँच गया। 21 जुलाई 2026 को जारी कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों का भरोसा मज़बूत बना हुआ है।
पहली छमाही का समग्र प्रदर्शन
जनवरी-जून 2026 की पूरी पहली छमाही में संस्थागत निवेशकों ने कुल 3.5 अरब डॉलर का निवेश किया — जो 2025 की समान अवधि की तुलना में करीब 6 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार यह आँकड़ा दर्शाता है कि भू-राजनीतिक और मुद्रास्फीति संबंधी दबावों के बीच भी भारत एक स्थिर निवेश गंतव्य बना हुआ है। गौरतलब है कि यह लगातार दूसरा वर्ष है जब पहली छमाही में निवेश प्रवाह में वृद्धि दर्ज की गई है।
ऑफिस एसेट्स का दबदबा बरकरार
दूसरी तिमाही में ऑफिस एसेट्स ने निवेश प्रवाह में अपना प्रभुत्व बनाए रखा। इस श्रेणी में लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश आया, जो कुल निवेश का 51 प्रतिशत है। यह लगातार चौथी तिमाही है जब ऑफिस एसेट्स निवेश की दृष्टि से सबसे आगे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इस रुचि को मुख्य रूप से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) की मज़बूत माँग, प्रमुख ऑफिस बाज़ारों में घटती रिक्तता (वैकेंसी) और प्रीमियम माइक्रो-मार्केट्स में लगातार बढ़ते किराये का समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि GCC विस्तार की लहर अगले दो-तीन वर्षों तक ऑफिस माँग को ऊँचा बनाए रखेगी।
डेटा सेंटर बने दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण
डेटा सेंटर दूसरी तिमाही में पूँजी आकर्षित करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरे और उन्होंने कुल निवेश का 40 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया। इस उभार के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते उपयोग, क्लाउड सेवाओं के विस्तार और डेटा लोकलाइज़ेशन संबंधी नियामक आवश्यकताओं से उत्पन्न माँग प्रमुख कारण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर क्षमता को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
घरेलू बनाम विदेशी निवेश
2026 की पहली छमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों का योगदान 2.2 अरब डॉलर रहा, जो कुल निवेश का 64 प्रतिशत है — जबकि 2025 की समान अवधि में यह हिस्सेदारी केवल 43 प्रतिशत थी। यह घरेलू पूँजी की बढ़ती परिपक्वता और रियल एस्टेट को दीर्घकालिक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में स्वीकार्यता का संकेत है।
दूसरी ओर, विदेशी निवेश 1.3 अरब डॉलर रहा, जो कुल का 36 प्रतिशत है — 2025 की समान अवधि के 57 प्रतिशत से उल्लेखनीय रूप से कम। आलोचकों का कहना है कि विदेशी हिस्सेदारी में यह गिरावट वैश्विक ब्याज दरों और मुद्रा जोखिम को लेकर बाहरी निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।
प्राइवेट इक्विटी और REIT की भूमिका
प्राइवेट इक्विटी निवेशक दूसरी तिमाही 2026 में संस्थागत पूँजी के सबसे बड़े स्रोत बने रहे और उनका योगदान कुल निवेश का 85 प्रतिशत रहा। REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) आधारित निवेशों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत रही।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के कैपिटल मार्केट्स के एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर सोमी थॉमस ने कहा कि निवेशक अब अधिक स्केल और बेहतर डाइवर्सिफिकेशन हासिल करने के लिए पोर्टफोलियो और मल्टी-सिटी निवेश अवसरों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि भारत की मज़बूत व्यापक आर्थिक बुनियाद और बुनियादी ढाँचे पर आधारित निरंतर विकास के समर्थन से 2026 की दूसरी छमाही में भी संस्थागत निवेश गतिविधियाँ स्थिर रहने की उम्मीद है।