भारत-न्यूजीलैंड FTA से MSME और कृषि-खाद्य निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाज़ार, उद्योगों ने किया स्वागत
सारांश
Key Takeaways
- भारत-न्यूजीलैंड FTA पर 28 अप्रैल 2025 को हस्ताक्षर हुए; उद्योग संगठनों ने स्वागत किया।
- FIEO अध्यक्ष एससी रल्हन के अनुसार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, IT और सेवा क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा।
- आयुष उत्पादों को पहली बार न्यूजीलैंड के बाज़ार में प्रवेश मिलेगा; जैविक प्रमाणन के लिए MRA लागू होगा।
- TPCI अध्यक्ष रोहित सिंगला ने कहा — प्रसंस्कृत खाद्य, मसाले और समुद्री उत्पादों के लिए शुल्क कम होंगे।
- न्यूजीलैंड को भारत में मनुका शहद, कीवी फल, सेब और भेड़ का मांस पर निर्धारित कोटे के तहत रियायती शुल्क मिलेगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच 28 अप्रैल 2025 को हस्ताक्षरित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने स्वागत किया है। इस समझौते से भारतीय कृषि-खाद्य उत्पादों, समुद्री उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं के लिए न्यूजीलैंड में बाज़ार पहुँच बेहतर होगी, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नए निर्यात अवसर खुलेंगे।
समझौते में क्या शामिल है
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि FTA से कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान और आईटी एवं आईटीईएस जैसी सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए द्विपक्षीय व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि व्यावसायिक सेवाओं, इंजीनियरिंग, शिक्षा, निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं को भी इस समझौते का लाभ मिलेगा।
FTA के ढाँचे के तहत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, डेयरी अल्टरनेटिव और जैविक उत्पाद जैसे क्षेत्रों में मज़बूत वृद्धि की संभावना है। जैविक प्रमाणन के लिए पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (MRA) से बाज़ार में प्रवेश आसान होगा, जबकि आयुष उत्पादों को पहली बार न्यूजीलैंड के बाज़ार में प्रवेश मिलेगा।
MSME और निर्यातकों को फायदा
रल्हन ने कहा कि इससे हमारे निर्यातकों, विशेष रूप से MSME को गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती माँग वाले उच्च मूल्य वाले बाज़ार में प्रवेश करने के अपार अवसर प्राप्त होंगे। कम टैरिफ बाधाओं और सुव्यवस्थित व्यापार प्रक्रियाओं के साथ भारतीय व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से भारत के निर्यात गंतव्यों में विविधता आएगी और पारंपरिक बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी। FIEO ने निर्यातकों से आग्रह किया है कि वे इस समझौते की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए अपने उत्पाद मानकों और विपणन रणनीतियों को सक्रिय रूप से संरेखित करें।
कृषि-खाद्य और समुद्री उत्पादों को सबसे अधिक लाभ
ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) के अध्यक्ष रोहित सिंगला ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि-खाद्य उत्पादों — जिनमें प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, मसाले और समुद्री उत्पाद शामिल हैं — के लिए बाज़ार पहुँच को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। उनके अनुसार शुल्क कम होने और गैर-शुल्क बाधाएँ दूर होने से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होगा।
सिंगला ने यह भी कहा कि खाद्य सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी और टिकाऊ प्रथाओं में न्यूजीलैंड की विशेषज्ञता भारत की बढ़ती क्षमताओं को पूरक कर सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रभावी ढंग से एकीकृत होने में मदद मिलेगी।
न्यूजीलैंड को भी मिलेंगी रियायतें
यह समझौता एकतरफा नहीं है। न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत में भेड़ का मांस, कुछ फल, मनुका शहद और प्रीमियम पेय पदार्थ जैसे उत्पादों पर रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा। कीवी फल, सेब, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे उत्पादों पर रियायतें निर्धारित कोटे के तहत दी गई हैं।
गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ FTA वार्ता तेज़ कर रहा है। सेवा क्षेत्र को बेहतर गतिशीलता प्रावधानों और व्यावसायिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता से लाभ होने की संभावना है, जो भारतीय पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।