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भारतीय शेयर बाजार फिर बना दुनिया का 5वाँ सबसे बड़ा, मार्केटकैप $5 ट्रिलियन पार

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भारतीय शेयर बाजार फिर बना दुनिया का 5वाँ सबसे बड़ा, मार्केटकैप $5 ट्रिलियन पार

सारांश

भारतीय शेयर बाजार ने $5 ट्रिलियन मार्केटकैप के साथ वैश्विक रैंकिंग में पाँचवाँ स्थान फिर हासिल किया। AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में मुनाफावसूली से ताइवान और दक्षिण कोरिया पिछड़े, जबकि जून में भारत का मार्केटकैप 2.75% बढ़ा।

मुख्य बातें

भारतीय शेयर बाजार का मार्केटकैप $5 ट्रिलियन पार कर दुनिया में 5वाँ स्थान हासिल हुआ।
ताइवान ($4.97 ट्रिलियन) और दक्षिण कोरिया ($4.66 ट्रिलियन) भारत से पीछे खिसके।
जून में भारत का मार्केटकैप 2.75% बढ़ा; दक्षिण कोरिया में 4.7% और ताइवान में 2.3% की गिरावट।
AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में मुनाफावसूली से ताइवान-दक्षिण कोरिया की रैंकिंग प्रभावित हुई।
निफ्टी का P/E मल्टीपल 24 गुना से घटकर लगभग 18 गुना पर आया — वैल्यूएशन अधिक आकर्षक।
डॉलर के हिसाब से जून में सेंसेक्स करीब 4% और निफ्टी लगभग 3% ऊपर।

भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर वैश्विक रैंकिंग में अपनी पाँचवीं स्थिति हासिल कर ली है — 29 जून 2026 को देश का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केटकैप) $5 ट्रिलियन की सीमा पार कर गया। ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में आई तेज गिरावट ने भारत को यह बढ़त दिलाई, जो हाल के महीनों में इन दोनों बाजारों से पिछड़ गया था।

मौजूदा वैश्विक रैंकिंग

आँकड़ों के अनुसार, ताइवान का बाजार पूंजीकरण अब $4.97 ट्रिलियन और दक्षिण कोरिया का $4.66 ट्रिलियन है — दोनों भारत से पीछे। वहीं, अमेरिका और चीन के बाजार पूंजीकरण और रैंकिंग में इस दौरान कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया।

ताइवान और दक्षिण कोरिया में गिरावट की वजह

विश्लेषकों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों में पिछले कुछ महीनों की जबरदस्त तेजी के बाद निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। इसी के चलते दोनों बाजारों की वैश्विक रैंकिंग में बदलाव आया और भारत एक बार फिर पाँचवें स्थान पर आ गया।

जून में भारत बनाम वैश्विक बाजार

जून माह में वैश्विक इक्विटी बाजारों का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि भारतीय बाजार ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। इस महीने भारत का मार्केटकैप 2.75% बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया में 4.7% और ताइवान में 2.3% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य प्रमुख बाजारों में — हांगकांग में 8.3% से अधिक, जर्मनी में 5.6%, कनाडा में 3%, यूके में करीब 2%, जापान में लगभग 1% और फ्रांस में 1.1% की गिरावट आई।

भारतीय बाजार की मजबूती के कारण

कई विश्लेषकों ने भारतीय इक्विटी की इस मजबूती के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए हैं — कच्चे तेल की कीमतों में कमी, बेहतर होते वैल्यूएशन, और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर दिलचस्पी। उनके अनुसार, निफ्टी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) मल्टीपल करीब 24 गुना से घटकर लगभग 18 गुना पर आ गया है, जिससे वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गए हैं।

सेंसेक्स-निफ्टी का प्रदर्शन

डॉलर के संदर्भ में देखें तो जून माह में अब तक सेंसेक्स में करीब 4% और निफ्टी में लगभग 3% की बढ़त दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन अधिकांश प्रमुख वैश्विक सूचकांकों से बेहतर रहा है। आगे चलकर, घरेलू और वैश्विक संकेतकों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह रैंकिंग जितनी घरेलू मजबूती की कहानी है, उतनी ही ताइवान और दक्षिण कोरिया की कमजोरी की भी। AI-सेमीकंडक्टर चक्र में मुनाफावसूली एक अस्थायी घटना है — जैसे ही वह चक्र पलटेगा, भारत को फिर इन बाजारों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या भारतीय बाजार की यह मजबूती टिकाऊ आर्थिक बुनियाद पर खड़ी है या सिर्फ वैश्विक पुनर्संतुलन का फल है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय शेयर बाजार दुनिया का 5वाँ सबसे बड़ा बाजार कैसे बना?
29 जून 2026 को भारत का कुल बाजार पूंजीकरण $5 ट्रिलियन पार कर गया, जबकि ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में क्रमशः 2.3% और 4.7% की गिरावट आई। इससे दोनों देशों का मार्केटकैप भारत से कम हो गया और भारत फिर से पाँचवें स्थान पर आ गया।
ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में गिरावट क्यों आई?
विश्लेषकों के अनुसार, AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में हाल के महीनों की तेज तेजी के बाद निवेशकों ने ताइवान और दक्षिण कोरिया में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की। इसी के कारण दोनों बाजारों की वैश्विक रैंकिंग में बदलाव आया।
जून 2026 में भारतीय बाजार की मजबूती के क्या कारण हैं?
विश्लेषकों ने तीन प्रमुख कारण बताए हैं — कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, बेहतर होते वैल्यूएशन (निफ्टी P/E 24 गुना से घटकर 18 गुना), और विदेशी निवेशकों की निरंतर दिलचस्पी। डॉलर के हिसाब से सेंसेक्स करीब 4% और निफ्टी लगभग 3% ऊपर रहे।
वर्तमान में शीर्ष वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग क्या है?
फिलहाल अमेरिका और चीन शीर्ष दो स्थानों पर हैं। भारत ($5 ट्रिलियन से अधिक) पाँचवें स्थान पर है, जबकि ताइवान ($4.97 ट्रिलियन) और दक्षिण कोरिया ($4.66 ट्रिलियन) क्रमशः छठे और सातवें स्थान पर खिसक गए हैं।
क्या भारत का 5वाँ स्थान स्थायी रहेगा?
यह रैंकिंग काफी हद तक ताइवान और दक्षिण कोरिया में AI-सेमीकंडक्टर चक्र की मुनाफावसूली पर टिकी है। विश्लेषकों के अनुसार, जैसे ही वैश्विक टेक शेयरों में तेजी लौटेगी, इन बाजारों से फिर कड़ी प्रतिस्पर्धा संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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