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चावल की कीमतों पर लगाम: केंद्र ने अनिवार्य स्टॉक खुलासा और OMSS लक्ष्य दोगुना किया

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चावल की कीमतों पर लगाम: केंद्र ने अनिवार्य स्टॉक खुलासा और OMSS लक्ष्य दोगुना किया

सारांश

चावल की ऊँची कीमतों से निपटने के लिए केंद्र ने एक साथ चार मोर्चों पर कार्रवाई की है — साप्ताहिक स्टॉक खुलासा, दक्षिणी राज्यों में स्टॉक सीमा, भारत चावल की अधिक आपूर्ति, और OMSS लक्ष्य को दोगुना करना। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 6 नवंबर 2026 को चावल और धान के स्टॉक का साप्ताहिक अनिवार्य खुलासा लागू किया।
व्यापारियों, मिल मालिकों सहित सभी स्टॉकधारकों को हर शुक्रवार 'फूड स्टॉक पोर्टल' पर 6 श्रेणियों की जानकारी देनी होगी।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को 31 जनवरी 2027 तक स्टॉक सीमा लागू करने की अनुमति।
नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को भारत चावल की अतिरिक्त मात्रा आवंटित।
OMSS-डोमेस्टिक का वार्षिक लक्ष्य 25 LMT से बढ़ाकर 50 LMT किया गया।
चालू वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर तक 25 LMT चावल बिका — पिछले साल की समान अवधि के 11 LMT से दोगुने से अधिक।

केंद्र सरकार ने 6 नवंबर 2026 को चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और देशभर में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। इनमें चावल और धान के स्टॉक का साप्ताहिक अनिवार्य खुलासा, दक्षिणी राज्यों को स्टॉक सीमा लागू करने की अनुमति, सब्सिडी वाले 'भारत चावल' का अतिरिक्त आवंटन, और 'ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS-डोमेस्टिक)' के तहत बिक्री लक्ष्य को दोगुना करना शामिल है।

अनिवार्य स्टॉक खुलासा: क्या है नई व्यवस्था

सरकार के 6 नवंबर के आदेश के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत सभी व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बड़ी रिटेल चेन, प्रोसेसर्स और मिल मालिकों को अब हर शुक्रवार 'फूड स्टॉक पोर्टल' पर अपने स्टॉक की जानकारी देनी होगी।

इस खुलासे में छह श्रेणियाँ शामिल होंगी: बासमती चावल, प्रीमियम नॉन-बासमती चावल, नॉन-बासमती चावल, पारबॉइल्ड राइस, टूटा हुआ चावल, और धान। सभी संबंधित पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दी गई जानकारी सटीक हो और नियमित रूप से अपडेट की जाए।

जो इकाइयाँ पोर्टल पर पंजीकरण कराने में विफल रहती हैं या तय स्टॉक सीमा का उल्लंघन करती हैं, उनके खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

दक्षिणी राज्यों को स्टॉक सीमा की अनुमति

जमाखोरी रोकने और उचित कीमतों पर अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को अनुमति दी है कि वे ज़रूरत पड़ने पर चावल और धान के लिए स्टॉक सीमा निर्धारित कर सकें।

ये पाबंदियाँ 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन राज्यों में खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से काफी ऊँची बनी हुई हैं।

भारत चावल और OMSS में विस्तार

सरकार ने भारत चावल की उपलब्धता बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए नाफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और केंद्रीय भंडार को चावल की अतिरिक्त मात्रा आवंटित की गई है। इन एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे वितरण चैनलों का विस्तार करें, खासकर दक्षिणी राज्यों में।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए OMSS-डोमेस्टिक के तहत चावल बिक्री का लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) से बढ़ाकर 50 LMT कर दिया गया है — यानी दोगुना।

मौजूदा बिक्री के आँकड़े

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 31 अक्टूबर 2026 तक OMSS-डोमेस्टिक ई-नीलामी के ज़रिए निजी खरीदारों को 25 LMT चावल बेचा जा चुका है। गौरतलब है कि पिछले साल की इसी अवधि में केवल 11 LMT चावल बिका था — यानी इस साल की बिक्री दोगुने से भी अधिक है।

यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य महँगाई को लेकर आम उपभोक्ताओं और नीति-निर्माताओं दोनों में चिंता बनी हुई है। इन बहुआयामी उपायों का असर आने वाले हफ्तों में बाज़ार में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। 'फूड स्टॉक पोर्टल' पर साप्ताहिक खुलासे की व्यवस्था तब तक कारगर नहीं होगी जब तक पोर्टल पर दर्ज आँकड़ों की ज़मीनी जाँच नहीं होती — अतीत में इसी खाई का फायदा जमाखोरों ने उठाया है। दक्षिणी राज्यों में स्टॉक सीमा की अनुमति देना स्वीकृत दिशा है, परंतु राज्यों की प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति समान नहीं है। OMSS लक्ष्य दोगुना करना आपूर्ति बढ़ाने का स्पष्ट संकेत है, लेकिन यदि सरकारी गोदामों में पर्याप्त बफर स्टॉक न हो तो यह महज कागज़ी संख्या बनकर रह सकती है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने चावल के स्टॉक पर नई निगरानी व्यवस्था क्यों लागू की?
केंद्र सरकार ने चावल की बढ़ती खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। खासकर दक्षिणी राज्यों में कीमतें काफी ऊँची बनी हुई थीं, जिसके चलते 6 नवंबर 2026 को यह आदेश जारी किया गया।
फूड स्टॉक पोर्टल पर जानकारी न देने पर क्या कार्रवाई होगी?
जो इकाइयाँ 'फूड स्टॉक पोर्टल' पर पंजीकरण नहीं कराती हैं या तय स्टॉक सीमा का उल्लंघन करती हैं, उनके खिलाफ 'आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना और अन्य दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं।
दक्षिणी राज्यों को स्टॉक सीमा लागू करने की अनुमति कब तक है?
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को दी गई स्टॉक सीमा की यह अनुमति 31 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
OMSS-डोमेस्टिक के तहत चावल बिक्री का नया लक्ष्य क्या है?
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए OMSS-डोमेस्टिक के तहत चावल बिक्री का लक्ष्य 25 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह बाज़ार में अतिरिक्त आपूर्ति लाकर कीमतों का दबाव कम करने के इरादे से किया गया है।
भारत चावल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को भारत चावल की अतिरिक्त मात्रा आवंटित की गई है और इन एजेंसियों को वितरण चैनलों का विस्तार करने का निर्देश दिया गया है। यह विशेष रूप से उन दक्षिणी राज्यों के लिए है जहाँ सब्सिडी वाले अनाज तक पहुँच सीमित रही है।
राष्ट्र प्रेस
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