भारत-अमेरिका ट्रेड डील से द्विपक्षीय व्यापार में बड़ी वृद्धि संभव: जॉन कवुलिच
सारांश
मुख्य बातें
ट्रेड एंड इकोनॉमिक काउंसिल के अध्यक्ष जॉन कवुलिच ने 20 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का दायरा असाधारण रूप से विस्तृत है और यदि दोनों देश व्यापार समझौते को अंजाम तक पहुँचाने में सफल होते हैं, तो द्विपक्षीय कारोबार में उल्लेखनीय इज़ाफ़ा हो सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस डील को पूरा होने में कितना वक्त लगेगा, यह अभी कहना मुश्किल है।
मुख्य वक्तव्य
कवुलिच ने कहा, 'दोनों देश संकेत दे रहे हैं कि वे एक-दूसरे के करीब हैं, लेकिन वे कूटनीतिक भाषा बोल रहे हैं। इसलिए यह समझना मुश्किल है कि वे असल में कितने करीब हैं या कुछ बड़े मुद्दों को सुलझाने में वे किस हद तक साथ हैं, या फिर वे इन बड़े मुद्दों को एक तरफ रखकर अन्य विषयों पर समझौतों की घोषणा कर सकते हैं या नहीं। हमें यह नहीं पता।' उन्होंने जोड़ा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार सैकड़ों अरब डॉलर का है और किसी भी व्यापार समझौते से इसे और आगे ले जाने की संभावना है।
व्यापार समझौते की जटिलताएँ
कवुलिच ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-अमेरिका व्यापार के इतने अधिक पहलू हैं कि एक व्यापक समझौते को आकार देना बेहद समय-साध्य प्रक्रिया हो सकती है। उन्होंने कहा, 'जब बातचीत बड़े स्तर पर हो रही होती है, तो चर्चा करना और कुछ मुद्दों को आगे बढ़ाना आसान होता है, लेकिन जब बात बारीकियों तक पहुँचती है, तो कई बार ऐसा लगता है कि आप समझौते के बहुत करीब हैं, जबकि असल में आप उससे और भी दूर होते हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएँ कई महीनों से जारी हैं।
रूसी तेल आयात पर रुख
रूसी तेल के मुद्दे पर कवुलिच ने कहा कि भारत और भारतीय कंपनियों द्वारा रूसी तेल का आयात, उसे रिफाइन और प्रोसेस कर कुछ मामलों में दूसरे बाज़ारों में निर्यात करना एक राजनीतिक समस्या ज़रूर है। हालाँकि, उनके अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह उतनी बड़ी राजनीतिक चुनौती नहीं है, जितनी कि अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों, गैर-सरकारी संगठनों, यूक्रेन और यूरोपीय संघ के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि अंततः सभी देशों को ऊर्जा की ज़रूरत होती है और वे आम तौर पर इसे वहीं से लेना पसंद करते हैं जहाँ यह सबसे सस्ती हो।
भारत-अमेरिका संबंधों का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के बीच टैरिफ, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा डिजिटल व्यापार को लेकर मतभेद लंबे समय से बने हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ने कई देशों पर टैरिफ दबाव बढ़ाया है और भारत के साथ एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को प्राथमिकता के रूप में पेश किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कोई आंशिक डील भी होती है, तो वह दोनों देशों के निर्यातकों और उद्योग जगत को राहत दे सकती है।
आगे क्या
कवुलिच की टिप्पणियाँ यह दर्शाती हैं कि वार्ता की दिशा सकारात्मक है, लेकिन अंतिम परिणाम अनिश्चित बना हुआ है। व्यापार जानकारों के अनुसार, निकट भविष्य में किसी क्षेत्र-विशेष में आंशिक समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, भले ही व्यापक ट्रेड डील में अभी और समय लगे।