वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती, जीडीपी ग्रोथ 6.2%25 का अनुमान: मॉर्गन स्टेनली

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वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती, जीडीपी ग्रोथ 6.2%25 का अनुमान: मॉर्गन स्टेनली

सारांश

वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। मॉर्गन स्टेनली की नई रिपोर्ट में जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।

Key Takeaways

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।
  • जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रह सकती है।
  • ऊर्जा लागत में वृद्धि से महंगाई बढ़ने की संभावना है।
  • चालू खाता घाटा 2.5%25 तक पहुँच सकता है।
  • राजकोषीय उपायों की आवश्यकता होगी।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, और वित्त वर्ष 27 में जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास जारी रहेगा। हालांकि, ऊर्जा लागत, आपूर्ति में व्यवधान और बाहरी दबाव कुछ नई चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह पूर्व में अनुमानित 6.5 प्रतिशत से कम है। इस गिरावट का प्रमुख कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं, जिनका औसत लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा आयात की बढ़ती लागत से व्यवसायों के उत्पादन खर्च में वृद्धि हो रही है, जिससे महंगाई भी बढ़ रही है, और भारतीय रुपए पर दबाव पड़ रहा है।

अल्पकालिक आर्थिक विकास में और गिरावट का अनुमान है, जो जून 2026 की तिमाही में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत के निचले स्तर तक पहुँच सकता है।

इस मंदी का मुख्य कारण औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और लाभ मार्जिन में कमी आना है।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति की स्थिति में सुधार और सरकारी सहायता उपायों के प्रभावी होने से विकास में धीरे-धीरे सुधार संभव है।

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई में भी बढ़ोतरी की आशंका है, वित्त वर्ष 2027 में औसत खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च इनपुट लागत, मुद्रा की कमजोरी और खाद्य एवं वस्तुओं की स्थिर कीमतों के कारण मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी रहने की संभावना है।

यदि तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं, तो खुदरा ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि और व्यापक मुद्रास्फीति प्रभावों सहित और भी दबाव बढ़ सकता है।

भारत की बाहरी स्थिति पर भी दबाव संभावित है। चालू खाता घाटा पहले के लगभग 1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत होने का अनुमान है।

इसका मुख्य कारण तेल आयात बिलों में वृद्धि है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पूंजी प्रवाह में कमी के कारण भुगतान संतुलन लगातार तीसरे वर्ष घाटे में रह सकता है, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ेगा।

स्थिति को संभालने के लिए, नीति निर्माताओं द्वारा शुरू में राजकोषीय उपायों पर निर्भर रहने की उम्मीद है, जैसे कि उच्च सब्सिडी और लागत नियंत्रण उपाय, जिससे राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.3 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।

Point of View

भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाएँ हैं। हालांकि, ऊर्जा लागत और बाहरी दबावों के चलते कुछ कठिनाइयाँ भी सामने आ रही हैं। यह संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ कितनी रहने का अनुमान है?
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
कच्चे तेल की कीमतों का क्या असर होगा?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने का अनुमान है, जिससे भारतीय रुपए पर दबाव पड़ सकता है।
चालू खाता घाटा कितना बढ़ सकता है?
चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो पहले के लगभग 1 प्रतिशत से अधिक है।
क्या भारतीय अर्थव्यवस्था में और गिरावट हो सकती है?
हां, अल्पकालिक आर्थिक विकास में गिरावट की आशंका है, जो 5.9 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।
नीति निर्माता किन उपायों पर निर्भर रहेंगे?
नीति निर्माता राजकोषीय उपायों जैसे उच्च सब्सिडी और लागत नियंत्रण उपायों पर निर्भर रहने की उम्मीद कर रहे हैं।
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