27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें हैं; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर होना चाहिए फोकस?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें हैं; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर होना चाहिए फोकस?

सारांश

केंद्रीय बजट 2026 के आगमन से पहले उद्योग जगत में उत्साह बढ़ गया है। जानिए, अमृत आचार्य की उम्मीदें और सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं। क्या यह बजट भारत की मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को नई दिशा देगा?

मुख्य बातें

यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाना चाहिए।
पीएलआई ने मैन्युफैक्चरिंग में सकारात्मक बदलाव लाया है।
सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लानी चाहिए।
भारत को 'मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट' के दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सरकारी नीतियों में स्थिरता और दूरदर्शिता आवश्यक है।

नई दिल्ली, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय बजट 2026 के प्रस्तुतीकरण में अब कुछ ही दिन बचे हैं। इससे पहले, उद्योग जगत की नज़रें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर केंद्रित हैं। विभिन्न क्षेत्रों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में, जेटवर्क के सह-संस्थापक और सीईओ अमृत आचार्य ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत की और इस बजट से कई उम्मीदें व्यक्त की हैं।

अमृत आचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता है। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर जैसी परियोजनाओं पर सरकार का भारी खर्च मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में मांग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। सरकार स्वयं एक बड़ा खरीदार है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधा लाभ मिलता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बजट में सार्वजनिक निवेश में लगातार वृद्धि हुई है और यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश न केवल उद्योगों को ऑर्डर प्रदान करता है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

अमृत आचार्य ने बताया कि हाल के वर्षों में सरकार का ध्यान प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स हो, सोलर क्षेत्र हो या ऑटो कंपोनेंट्स-पीएलआई ने मैन्युफैक्चरिंग को एक नई दिशा दी है और इसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अगला कदम केवल 'मेक इन इंडिया फॉर इंडिया' पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि 'मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट' की दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लानी चाहिए, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट योजनाएं हैं, जो निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा प्रदान करती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि निर्यातक अमेरिका और अन्य देशों में सामान भेजते समय आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें।

अमृत आचार्य ने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत यानी लोन और फंडिंग कई देशों की तुलना में अधिक है। यदि सरकार आने वाले वर्षों में इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाती है, तो उद्यमियों का जोखिम लेने का साहस बढ़ेगा और निवेश में तेजी आएगी।

उन्होंने सरकार की नीति व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि मौजूदा नीति माहौल सहयोगी, स्थिर और दूरदर्शी है। सरकार उद्योग की बात सुनती है और एक बार लिए गए फैसलों को वापस नहीं लेती। पीएलआई इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां प्रारंभिक वर्षों में भले ही परिणाम न दिखें, लेकिन दीर्घकालिक में इसका बड़ा प्रभाव सामने आता है।

आचार्य ने कहा कि आज भारत आईफोन सहित मोबाइल का सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है और यह पीएलआई जैसी नीतियों के बिना संभव नहीं था। अब सरकार पीएलआई 2.0 के माध्यम से केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर दे रही है, जिससे सोलर और अन्य उद्योगों को भी लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 से उनकी दो प्रमुख अपेक्षाएं हैं। पहली, सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में निरंतर वृद्धि और दूसरी, निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं। उनका मानना है कि इन्हीं कदमों से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई गति मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह स्पष्ट है कि सरकार की नीतियां उद्योगों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अमृत आचार्य के विचार इस बात की पुष्टि करते हैं कि सही नीतियों के माध्यम से भारत की मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय बजट 2026 में क्या खास होगा?
केंद्रीय बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में वृद्धि और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हो सकती हैं।
क्या पीएलआई योजनाओं का असर दिख रहा है?
हां, पीएलआई ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नई दिशा दी है और इसके परिणाम अब दिखने लगे हैं।
भारत में पूंजी की लागत क्यों अधिक है?
भारत में पूंजी की लागत कई देशों की तुलना में अधिक है, जिससे उद्यमियों को जोखिम उठाने में कठिनाई होती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले