14 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वनवेब को स्टारलिंक से पहले मिले मंजूरी — सुनील मित्तल बोले, '5 साल पहले किया था आवेदन'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वनवेब को स्टारलिंक से पहले मिले मंजूरी — सुनील मित्तल बोले, '5 साल पहले किया था आवेदन'

सारांश

सुनील मित्तल ने खुलकर कहा — वनवेब ने 5 साल पहले आवेदन किया, नेटवर्क 3 साल से तैयार है, फिर भी मंजूरी अटकी है। एलन मस्क के 'भारतीय कारोबारियों पर रुकावट' वाले आरोपों के बीच यह टिप्पणी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की जंग को नई धार देती है।

मुख्य बातें

सुनील भारती मित्तल ने 14 अक्टूबर 2026 को 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026' में कहा कि यूटेलसैट वनवेब को स्टारलिंक से पहले भारत में नियामकीय मंजूरी मिलनी चाहिए।
वनवेब ने भारत में सेवाओं के लिए लगभग 5 वर्ष पहले आवेदन किया था; ग्राउंड नेटवर्क 3 वर्षों से तैयार है।
एलन मस्क ने पिछले सप्ताह एक्स पर आरोप लगाया था कि भारतीय कारोबारी स्टारलिंक की राह में बाधा डाल रहे हैं।
संचार मंत्रालय ने पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तीनों कंपनियाँ 'नियामकीय प्रक्रिया के एक समान चरण' में हैं।
मंजूरी की आधिकारिक समयसीमा अभी अज्ञात; TRAI और DoT की अगली कार्रवाई पर उद्योग की नज़र।

भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने 14 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट कहा कि यूटेलसैट वनवेब को भारत में स्टारलिंक से पहले नियामकीय मंजूरी मिलनी चाहिए, क्योंकि कंपनी ने लगभग पाँच वर्ष पहले आवेदन किया था और अनुमोदन प्रक्रिया में वह काफी आगे है। नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026' में एक पैनल चर्चा के दौरान मित्तल ने यह बात कही।

मित्तल का मुख्य तर्क

मित्तल ने कहा, "जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूँ, हम अपनी मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं। मेरा मानना है कि मंजूरी की कतार में हम उनसे काफी आगे हैं, क्योंकि हमने पाँच साल पहले आवेदन किया था।" उन्होंने जोड़ा कि यदि वनवेब को स्टारलिंक से कुछ दिन पहले भी आवश्यक स्वीकृतियाँ मिल जाती हैं, तो कंपनी को संतोष होगा।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यूटेलसैट वनवेब का ग्राउंड नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर पिछले तीन वर्षों से परिचालन के लिए तैयार है, और उसके सैटेलाइट लगभग पाँच वर्षों से भारत के ऊपर निर्धारित कक्षा में मौजूद हैं। इसके बावजूद, मित्तल के अनुसार, कंपनी को अब तक आवश्यक अनुमति नहीं मिल सकी है।

स्टारलिंक विवाद की पृष्ठभूमि

मित्तल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एलन मस्क की अगुवाई वाली स्टारलिंक के भारत प्रवेश को लेकर बहस तीव्र हो चुकी है। पिछले सप्ताह मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर यह आरोप लगाया था कि कुछ भारतीय कारोबारी देश में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाएँ शुरू करने की स्टारलिंक की योजना में अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भारतीय सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाज़ार को लेकर वनवेब और स्टारलिंक के बीच की यह होड़ नई नहीं है। रिलायंस जियो भी इस क्षेत्र में प्रवेश की तैयारी में है, जिससे तीन बड़े वैश्विक और घरेलू खिलाड़ियों के बीच एक बहु स्तरीय प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य बन रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

संचार मंत्रालय ने मस्क के दावों और मंजूरी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय ने कहा था, "फिलहाल तीनों संस्थाएँ व्यापक रूप से नियामकीय प्रक्रिया के एक समान चरण में हैं। ऐसे में यह कहना कि मौजूदा ढाँचा या उसका अनुपालन अनुचित अथवा भेदभावपूर्ण है, पूरी तरह निराधार और गलत है।"

मंत्रालय का यह बयान संकेत देता है कि सरकार किसी एक कंपनी को प्राथमिकता देने के बजाय एक समान नियामकीय ढाँचे के तहत सभी आवेदकों का मूल्यांकन कर रही है।

आम जनता और उद्योग पर असर

भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत उन करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो दूरदराज के इलाकों में अभी भी तेज़ इंटरनेट से वंचित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल कनेक्टिविटी को ग्रामीण भारत तक पहुँचाने पर ज़ोर दे रही है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, वनवेब को शुरुआती बढ़त मिलने से उसे ब्राँड निष्ठा और वितरण नेटवर्क स्थापित करने का पहला अवसर मिल सकता है — जो सैटेलाइट ब्रॉडबैंड जैसे उभरते बाज़ार में दीर्घकालिक रूप से निर्णायक साबित हो सकता है।

आगे क्या होगा

नियामकीय मंजूरी के समयसीमा को लेकर अभी कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। उद्योग जगत की नज़र भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की अगली कार्रवाई पर है। मित्तल की सार्वजनिक टिप्पणी इस प्रतिस्पर्धी दौड़ में वनवेब की स्थिति को और अधिक स्पष्टता से रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक गहरी व्यावसायिक चिंता है — पहले आने वाले का लाभ सैटेलाइट ब्रॉडबैंड में निर्णायक होता है। विडंबना यह है कि जिस 'स्पेक्ट्रम आवंटन बनाम नीलामी' बहस में मित्तल एक तरफ थे और मस्क दूसरी तरफ, उसी प्रक्रिया की धीमी गति अब खुद वनवेब के लिए बाधा बन रही है। मंत्रालय का 'समान चरण' वाला बयान कूटनीतिक है, लेकिन यह सवाल अनुत्तरित रहता है कि पाँच साल की प्रतीक्षा के बाद भी मंजूरी क्यों लंबित है। यदि भारत सैटेलाइट कनेक्टिविटी को ग्रामीण डिजिटल अंतर पाटने का साधन मानता है, तो यह नियामकीय जड़ता उस लक्ष्य के विपरीत है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील मित्तल ने वनवेब को पहले मंजूरी देने की माँग क्यों की?
मित्तल का तर्क है कि यूटेलसैट वनवेब ने भारत में सेवाएँ शुरू करने के लिए लगभग पाँच साल पहले आवेदन किया था, जबकि उसका ग्राउंड नेटवर्क तीन वर्षों से और सैटेलाइट पाँच वर्षों से तैयार हैं। इसलिए उनके अनुसार मंजूरी की कतार में वनवेब स्टारलिंक से काफी आगे है।
एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को लेकर क्या आरोप लगाए थे?
पिछले सप्ताह मस्क ने एक्स पर आरोप लगाया था कि कुछ भारतीय कारोबारी देश में स्टारलिंक की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत में बाधा डाल रहे हैं। हालाँकि मस्क ने किसी का नाम नहीं लिया।
भारत सरकार ने मंजूरी प्रक्रिया में भेदभाव के आरोपों पर क्या कहा?
संचार मंत्रालय ने पक्षपात के आरोपों को 'पूरी तरह निराधार और गलत' बताते हुए खारिज किया। मंत्रालय के अनुसार तीनों कंपनियाँ — वनवेब, स्टारलिंक और अन्य — नियामकीय प्रक्रिया के एक समान चरण में हैं और सभी का मूल्यांकन निष्पक्ष ढाँचे के तहत हो रहा है।
भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मंजूरी की प्रक्रिया कौन तय करती है?
भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं की नियामकीय मंजूरी मुख्यतः डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की प्रक्रियाओं के तहत दी जाती है। अभी तक किसी भी कंपनी के लिए मंजूरी की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
वनवेब और स्टारलिंक के अलावा भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाज़ार में और कौन है?
रिलायंस जियो भी भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में प्रवेश की तैयारी कर रही है। इस प्रकार घरेलू और वैश्विक तीन प्रमुख खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य तैयार हो रहा है, जिसमें पहली मंजूरी मिलने वाली कंपनी को बाज़ार में शुरुआती बढ़त मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 6 दिन पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले