9 अक्टूबर 2026
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फोनपे और डीपीसीजीसी के बीच MOU: OTT मंचों पर नियामकीय अनुपालन और शिकायत निवारण होगा आसान

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फोनपे और डीपीसीजीसी के बीच MOU: OTT मंचों पर नियामकीय अनुपालन और शिकायत निवारण होगा आसान

सारांश

फोनपे और DPCGC के बीच हुआ यह MOU भारत के OTT क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन की खाई को पाटने की कोशिश है। IT नियम 2021 के तहत SRO सदस्यता अनिवार्य है, लेकिन जागरूकता की कमी बड़ी बाधा रही है — यह साझेदारी उसी अंतर को दूर करने का प्रयास है।

मुख्य बातें

फोनपे और DPCGC ने 9 अक्टूबर 2026 को एक MOU पर हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी का उद्देश्य OTT मंचों और OCCP के लिए SRO प्रमाणन को सरल बनाना और नियामकीय जागरूकता बढ़ाना है।
IT नियम, 2021 के तहत OTT प्रकाशकों के लिए किसी मान्यता प्राप्त SRO की सदस्यता कानूनी रूप से अनिवार्य है।
DPCGC सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत द्वितीय स्तरीय स्व-नियामक संस्था है।
सुभो रे और फोनपे पेमेंट हेड दीप अग्रवाल ने इस साझेदारी को उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी बताया।

डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के अंतर्गत कार्यरत स्व-नियामक संस्था डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (DPCGC) ने 9 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का लक्ष्य फोनपे के भुगतान गेटवे से जुड़े सभी व्यापारियों के लिए स्व-नियामक संगठन (SRO) प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाना, नियामकीय अनुपालन को मज़बूत करना और OTT क्षेत्र में जागरूकता फैलाना है।

क्यों ज़रूरी है यह साझेदारी

भारत में लागू नियमों के अनुसार, ओवर-द-टॉप (OTT) मंचों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट प्रकाशकों (OCCP) के लिए किसी मान्यता प्राप्त SRO की सदस्यता लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है — ताकि उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का प्रभावी निवारण हो सके। फोनपे पहले से ही अपनी व्यापारी पंजीकरण प्रक्रिया में इस नियामकीय अनिवार्यता को एक अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल करता है।

गौरतलब है कि DPCGC सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत गठित द्वितीय स्तरीय स्व-नियामक संस्था है और यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का OTT बाज़ार तेज़ रफ्तार से विस्तार पा रहा है और नियामकीय जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

इस MOU के तहत दोनों संस्थाएँ मिलकर मौजूदा और नए OTT व्यापारियों को लागू नियमों की जानकारी देंगी तथा DPCGC के माध्यम से उनके SRO प्रमाणन को सुगम बनाएंगी। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि इस क्षेत्र में सक्रिय अनेक व्यापारियों को SRO सदस्यता और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है।

यह संयुक्त पहल OTT पारिस्थितिकी तंत्र में अनुपालन की खाई को पाटने का प्रयास करती है और फोनपे को इस तेज़ी से बढ़ते क्षेत्र में एक विश्वसनीय और नियम-पालक भुगतान भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

IAMAI के अध्यक्ष डॉ. सुभो रे ने कहा कि DPCGC स्व-नियमन के ज़रिए OTT मंचों से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं का प्रभावी समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग आचार संहिता के बेहतर अनुपालन को प्रोत्साहित करेगा और इसके लाभ उद्योग के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं तक भी पहुँचेंगे।

फोनपे के पेमेंट हेड दीप अग्रवाल ने कहा, 'कंपनी के लिए नियमों का पालन और ग्राहकों का भरोसा सभी सेवाओं के मूल में हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि DPCGC के साथ यह समझौता OTT मंचों को जागरूक करने और ग्राहक शिकायत निवारण से जुड़े नियमों की समझ बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

आम जनता और उद्योग पर असर

इस साझेदारी से OTT उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत निवारण तंत्र अधिक सुलभ और पारदर्शी होने की उम्मीद है। OTT प्रकाशकों के लिए SRO प्रमाणन प्रक्रिया सरल होने से अनुपालन में तेज़ी आएगी और अनधिकृत प्लेटफार्मों पर लगाम लगाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत के डिजिटल कंटेंट बाज़ार की तेज़ वृद्धि को देखते हुए, यह पहल नियामकों, उद्योग और उपभोक्ताओं तीनों के हितों को साधने की कोशिश करती है। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य भुगतान गेटवे और डिजिटल मंचों के लिए भी एक मानक के रूप में देखा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली अहमियत यह है कि एक प्रमुख भुगतान गेटवे पहली बार नियामकीय अनुपालन को व्यापारी ऑनबोर्डिंग की अनिवार्य शर्त बना रहा है — यह एक संरचनात्मक बदलाव है। भारत के OTT बाज़ार में SRO अनुपालन अब तक काफी हद तक कागज़ी रहा है; भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर को इससे जोड़कर पालन सुनिश्चित करने का यह तरीका अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या DPCGC के पास छोटे OTT प्रकाशकों तक पहुँचने और प्रमाणन प्रक्रिया को वास्तव में सरल रखने की क्षमता है — अन्यथा यह छोटे खिलाड़ियों के लिए एक और बाधा बन सकती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फोनपे और DPCGC के बीच MOU का उद्देश्य क्या है?
इस MOU का उद्देश्य फोनपे के पेमेंट गेटवे से जुड़े OTT व्यापारियों के लिए SRO प्रमाणन को आसान बनाना और IT नियम, 2021 के तहत नियामकीय अनुपालन को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थाएँ मिलकर व्यापारियों में जागरूकता फैलाएंगी और शिकायत निवारण तंत्र को मज़बूत करेंगी।
DPCGC क्या है और यह OTT मंचों से कैसे जुड़ी है?
DPCGC यानी डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल, IAMAI के अंतर्गत IT नियम, 2021 के तहत गठित एक द्वितीय स्तरीय स्व-नियामक संस्था है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत है। यह OTT मंचों और ऑनलाइन कंटेंट प्रकाशकों के लिए उपयोगकर्ता शिकायतों के निवारण की देखरेख करती है।
क्या OTT प्लेटफार्मों के लिए SRO सदस्यता अनिवार्य है?
हाँ, भारत में IT नियम, 2021 के तहत OTT मंचों और ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट प्रकाशकों के लिए किसी मान्यता प्राप्त SRO की सदस्यता कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का प्रभावी और समयबद्ध निवारण सुनिश्चित करना है।
इस साझेदारी से उपयोगकर्ताओं को क्या फायदा होगा?
इस साझेदारी से OTT उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ होने की उम्मीद है। अधिक OTT मंचों के SRO-प्रमाणित होने से उनके पास शिकायत दर्ज करने का एक विश्वसनीय आधिकारिक माध्यम उपलब्ध होगा।
फोनपे इस पहल में क्या भूमिका निभाएगा?
फोनपे अपनी व्यापारी पंजीकरण प्रक्रिया में SRO प्रमाणन को अनिवार्य शर्त के रूप में लागू करता है और इस MOU के तहत DPCGC के साथ मिलकर OTT व्यापारियों को जागरूक करेगा। कंपनी का लक्ष्य OTT क्षेत्र में एक भरोसेमंद और नियम-पालक भुगतान भागीदार के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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