23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आईपीसी ने DSMNRU और CSIR-CIMAP से किए दो MOU, दिव्यांगजनों व हर्बल दवाओं की गुणवत्ता को मिलेगी नई दिशा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आईपीसी ने DSMNRU और CSIR-CIMAP से किए दो MOU, दिव्यांगजनों व हर्बल दवाओं की गुणवत्ता को मिलेगी नई दिशा

सारांश

आईपीसी ने 23 जुलाई को DSMNRU लखनऊ और CSIR-CIMAP के साथ दो MOU किए — एक दिव्यांगजनों के लिए सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस मॉड्यूल बनाने को, दूसरा हर्बल दवाओं की गुणवत्ता अनुसंधान जारी रखने को। यह 'विकसित यूपी–विकसित भारत' दृष्टिकोण को वैज्ञानिक आधार देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) ने 23 जुलाई 2026 को दो MOU पर हस्ताक्षर व नवीनीकरण किए।
डीएसएमएनआरयू, लखनऊ के साथ नए MOU का लक्ष्य दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों की गुणवत्ता-सुरक्षा प्रोटोकॉल और सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना है।
सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत MOU औषधीय पौधों के अनुसंधान और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में सहयोग जारी रखेगा।
संजय सिंह (कुलपति, DSMNRU) और डॉ.
कलैसेल्वन (सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक, IPC) उपस्थित रहे।
ये साझेदारियाँ 'विकसित उत्तर प्रदेश–विकसित भारत' परिकल्पना को संस्थागत वैज्ञानिक समर्थन देने की दिशा में आईपीसी की प्रतिबद्धता दर्शाती हैं।

भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) ने 23 जुलाई 2026 को डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (डीएसएमएनआरयू), लखनऊ के साथ एक नए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (सीएसआईआर-सीआईएमएपी) के साथ पूर्व MOU का नवीनीकरण किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन इस स्वायत्त संस्था ने इन दोनों साझेदारियों के ज़रिए 'विकसित उत्तर प्रदेश–विकसित भारत' की परिकल्पना को ठोस वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

मुख्य घटनाक्रम

समारोह में डीएसएमएनआरयू के कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन और सीएसआईआर-सीआईएमएपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों MOU एक साथ संपन्न होना इस बात का संकेत है कि आईपीसी एक साथ कई मोर्चों पर अपनी वैज्ञानिक साझेदारी का विस्तार कर रहा है।

डीएसएमएनआरयू के साथ नए MOU का दायरा

डीएसएमएनआरयू के साथ हुए नए समझौते का मूल उद्देश्य दिव्यांगजनों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सहायक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता के मूल्यांकन हेतु वैज्ञानिक प्रोटोकॉल तैयार करना है। यह सहयोग एक और महत्त्वपूर्ण पहल को भी आकार देगा — सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करना, ताकि दिव्यांगजनों में दवा सुरक्षा जागरूकता बढ़े और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग में सुधार हो।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में दिव्यांग-अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है, और नियामक ढाँचे में इस वर्ग की ज़रूरतें अब तक सीमित रूप से ही संबोधित हो पाई हैं।

सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत MOU

सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत समझौता औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में सहयोग को आगे बढ़ाएगा। गौरतलब है कि सीएसआईआर-सीआईएमएपी देश के प्रमुख हर्बल अनुसंधान संस्थानों में से एक है और लखनऊ में स्थित होने के कारण उत्तर प्रदेश की औषधीय पादप विरासत के संरक्षण व व्यावसायीकरण में इसकी केंद्रीय भूमिका है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने कहा कि ये सहयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता मानकों और संस्थागत साझेदारियों को मज़बूत करेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवा और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरने में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी पहलें सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुँच बेहतर करके 'विकसित यूपी–विकसित भारत' के दृष्टिकोण में प्रत्यक्ष योगदान देती हैं।

आम जनता पर असर और आगे की राह

इन साझेदारियों का दीर्घकालिक प्रभाव तीन स्तरों पर दिखेगा — हर्बल दवाओं की गुणवत्ता में सुधार, दिव्यांगजनों के लिए सुरक्षित सहायक उपकरण सुनिश्चित करना, और राज्य में फार्माकोविजिलेंस तंत्र को सुदृढ़ करना। आईपीसी की यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप संस्थागत क्षमता निर्माण की दिशा में एक सुनियोजित कदम है, जिसके परिणाम आने वाले वर्षों में नीति और अनुसंधान दोनों स्तरों पर दिखाई देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में संस्थागत समझौतों और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। दिव्यांगजनों के लिए सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस मॉड्यूल एक दुर्लभ और ज़रूरी पहल है — लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि ये मॉड्यूल कितने अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों तक पहुँचते हैं। हर्बल दवाओं की गुणवत्ता का मानकीकरण वर्षों से लंबित एजेंडा है; CSIR-CIMAP के साथ नवीनीकृत MOU तभी सार्थक होगा जब उसके परिणाम सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य हों।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय औषध संहिता आयोग (आईपीसी) क्या है?
आईपीसी भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जो दवाओं के गुणवत्ता मानक निर्धारित करती है और फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों की देखरेख करती है। यह भारतीय फार्माकोपिया (IP) प्रकाशित करने के लिए भी उत्तरदायी है।
आईपीसी और DSMNRU के बीच MOU से दिव्यांगजनों को क्या फायदा होगा?
इस MOU के तहत दिव्यांगजनों के सहायक उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा जाँचने के वैज्ञानिक प्रोटोकॉल बनाए जाएँगे। साथ ही सांकेतिक भाषा में फार्माकोविजिलेंस प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित होंगे, जिससे श्रवण-बाधित व्यक्ति दवा प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की रिपोर्ट कर सकेंगे।
CSIR-CIMAP के साथ नवीनीकृत MOU का उद्देश्य क्या है?
सीएसआईआर-सीआईएमएपी के साथ नवीनीकृत समझौता औषधीय पौधों के अनुसंधान, मानकीकरण और हर्बल दवाओं के गुणवत्ता मूल्यांकन में सहयोग को जारी रखेगा। यह भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक आधार देने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
ये MOU 'विकसित यूपी–विकसित भारत' से कैसे जुड़े हैं?
आईपीसी के अनुसार, ये साझेदारियाँ उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवा और दवा गुणवत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होंगी। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुँच बेहतर करके ये 'विकसित यूपी–विकसित भारत' के दृष्टिकोण में प्रत्यक्ष योगदान देती हैं।
इस समझौते में कौन-कौन से प्रमुख संस्थान शामिल हैं?
इस समझौते में तीन प्रमुख संस्थान शामिल हैं — भारतीय औषध संहिता आयोग (IPC), डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU) लखनऊ, और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंधित पादप संस्थान (CSIR-CIMAP) लखनऊ।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले