15 अक्टूबर 2026
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पीयूष गोयल का युवाओं से आह्वान: AI और नई तकनीकें सीखें, 'विकसित भारत 2047' में निभाएँ अग्रणी भूमिका

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पीयूष गोयल का युवाओं से आह्वान: AI और नई तकनीकें सीखें, 'विकसित भारत 2047' में निभाएँ अग्रणी भूमिका

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने SRCC के सेंटेनरी कॉन्क्लेव में युवाओं को साफ संदेश दिया — AI और उभरती तकनीकों के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें। 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य उसी पीढ़ी के कंधों पर टिका है जो आज कक्षाओं में बैठी है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 15 अक्टूबर 2026 को SRCC सेंटेनरी कॉन्क्लेव , नई दिल्ली में छात्रों को संबोधित किया।
युवाओं से AI, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह।
बड़े भाषा मॉडल (LLMs) को व्यवसाय और आम नागरिकों के उपयोग-योग्य उपकरणों में बदलने पर ज़ोर।
विनिर्माण निवेश , कौशल विकास और नई तकनीकें मिलकर भारत की वैश्विक स्थिति मज़बूत करेंगी।
युवा स्टार्टअप संस्थापकों और उद्यमियों की उनकी नवाचार भावना के लिए विशेष सराहना।
'विकसित भारत 2047' के विज़न में युवाओं की भागीदारी को अपरिहार्य बताया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 'सेंटेनरी कॉन्क्लेव' के उद्घाटन समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उनसे उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुरूप खुद को तैयार करने और 'विकसित भारत 2047' के विज़न में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरंतर प्रयास, महत्वाकांक्षी लक्ष्य और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की मानसिकता ही युवाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर सृजित करने में सक्षम बनाएगी।

युवाओं को तकनीक में अग्रणी बनने की ज़रूरत

गोयल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से जुड़े कौशल अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुके हैं। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे केवल नई तकनीकों को अपनाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके विकास और क्रियान्वयन में भी अग्रणी भूमिका निभाएँ। 1990 और 2000 के दशक में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

AI और LLM को व्यावहारिक उपकरणों में बदलने की माँग

मंत्री ने कहा कि बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models — LLMs) और अन्य AI प्रणालियों को ऐसे सहज उपकरणों में रूपांतरित करने की आवश्यकता है, जिनका इस्तेमाल व्यवसाय और आम नागरिक समान रूप से कर सकें। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार 'India AI Mission' के तहत AI बुनियादी ढाँचे पर हज़ारों करोड़ रुपये निवेश कर रही है। गोयल के अनुसार, तकनीकी प्रगति को केवल कुछ बड़े उद्यमों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए — इसे समाज के हर स्तर तक पहुँचाना होगा।

विनिर्माण, कौशल विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

गोयल ने रेखांकित किया कि विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ता निवेश, नई तकनीकों को अपनाना और कौशल विकास — ये तीनों मिलकर भारतीय युवाओं के लिए रोज़गार और उद्यम के नए द्वार खोलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। गौरतलब है कि भारत वर्तमान में दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है।

उद्यमिता और जीवनपर्यंत सीखने पर ज़ोर

मंत्री ने कौशल वृद्धि को जीवनभर चलने वाली जिम्मेदारी के रूप में देखने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे व्यापार वृद्धि, कारोबार सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार से जुड़े उभरते अवसरों की सक्रिय रूप से पहचान करें। गोयल ने उन युवा स्टार्टअप संस्थापकों की विशेष सराहना की जो जोखिम उठाते हुए नवाचार-आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।

संस्कृति और सामूहिक कर्तव्यबोध

गोयल ने अपने संबोधन में भारत की संस्कृति, परंपराओं और विरासत की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि ये तत्व देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने नागरिकों के बीच सामूहिक प्रयास और कर्तव्यबोध की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देशवासियों का साझा संकल्प भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। आगे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की नीतियाँ इन अपेक्षाओं को व्यावहारिक धरातल पर किस हद तक साकार कर पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'AI कौशल सीखो' का आह्वान तब तक कितना कारगर है जब तक देश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम उस गति से नहीं बदलते जिस गति से तकनीक बदल रही है। भारत में हर साल लाखों स्नातक निकलते हैं, पर उद्योग लगातार 'रोज़गार योग्यता की कमी' की शिकायत करता है — यह अंतर नीतिगत भाषणों से नहीं, ढाँचागत सुधारों से पाटा जाएगा। 'विकसित भारत 2047' की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, लेकिन मापने योग्य बेंचमार्क — जैसे कितने संस्थानों में AI पाठ्यक्रम लागू हुआ, कितने युवाओं को प्रमाणित प्रशिक्षण मिला — इन पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने SRCC कॉन्क्लेव में युवाओं को क्या संदेश दिया?
गोयल ने छात्रों से AI, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में व्यावहारिक कौशल विकसित करने और 'विकसित भारत 2047' के विज़न में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कौशल वृद्धि को जीवनपर्यंत चलने वाली जिम्मेदारी बताया।
'विकसित भारत 2047' में युवाओं की भूमिका क्या होगी?
गोयल के अनुसार, भारत के युवा तकनीकी प्रगति को विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों में बदलने में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं। विनिर्माण, स्टार्टअप और नवाचार के ज़रिए वे देश को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान कर सकते हैं।
AI और LLM को लेकर गोयल ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs) और अन्य AI प्रणालियों को ऐसे सरल, व्यावहारिक उपकरणों में रूपांतरित करने की ज़रूरत है जिनका उपयोग व्यवसाय और आम नागरिक दोनों आसानी से कर सकें। युवाओं से अपेक्षा है कि वे इस रूपांतरण में अग्रणी बनें।
SRCC सेंटेनरी कॉन्क्लेव क्या है?
यह श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), नई दिल्ली द्वारा आयोजित एक प्रमुख शैक्षणिक आयोजन है, जिसका उद्घाटन 15 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने किया। यह कॉन्क्लेव संस्थान की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
गोयल ने स्टार्टअप संस्थापकों की सराहना क्यों की?
उन्होंने उन युवा उद्यमियों की प्रशंसा की जो जोखिम उठाते हुए चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं और नवाचार-आधारित उत्पाद व सेवाएँ विकसित कर रहे हैं। गोयल ने इसे भारत की उद्यमशीलता की उभरती संस्कृति का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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