क्या रबी फसलों की बुआई का कुल क्षेत्रफल 650 लाख हेक्टेयर के पार पहुँच गया?

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क्या रबी फसलों की बुआई का कुल क्षेत्रफल 650 लाख हेक्टेयर के पार पहुँच गया?

सारांश

क्या रबी फसलों की बुआई का क्षेत्रफल 650 लाख हेक्टेयर के पार पहुँच गया? जानिए इस महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में जो किसानों की आय और महंगाई को प्रभावित कर सकती है।

Key Takeaways

  • कुल बुआई का क्षेत्रफल: 652.33 लाख हेक्टेयर
  • गेहूं का क्षेत्रफल: 334.17 लाख हेक्टेयर
  • दालों की खेती का क्षेत्रफल: 137 लाख हेक्टेयर
  • सरसों का क्षेत्रफल: 96.86 लाख हेक्टेयर
  • मानसून का प्रभाव: अच्छी बारिश से बुआई में वृद्धि

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रबी फसलों के अंतर्गत बुआई का कुल क्षेत्रफल (16 जनवरी तक) 20.88 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 652.33 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 631.45 लाख हेक्टेयर था। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को साझा की।

मंत्रालय के अनुसार, बुआई के क्षेत्रफल में वृद्धि से उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा और खाद्य वस्तुओं की महंगाई को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में गेहूं का क्षेत्रफल 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।

उड़द, मसूर, चना और मूंग जैसी दालों की खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की इसी अवधि के 133.18 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.82 लाख हेक्टेयर अधिक यानी 137 लाख हेक्टेयर हो गया है।

ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज की खेती का क्षेत्रफल पिछले साल की इसी अवधि के 55.93 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.79 लाख हेक्टेयर बढ़कर 58.72 लाख हेक्टेयर हो गया है।

सरसों और राई जैसी तिलहन फसलों का क्षेत्रफल पिछले साल की इसी अवधि के 93.33 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.53 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 96.86 लाख हेक्टेयर हो गया है।

इस सीजन में खेती का क्षेत्रफल बढ़ने का मुख्य कारण मानसून के दौरान हुई अच्छी बारिश है, जिसने उन क्षेत्रों में भी बुआई को आसान बना दिया है, जहाँ कम बारिश के कारण बुआई नहीं हो पाती थी।

इसके अतिरिक्त, कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (सीसीईए) ने पिछले साल 1 अक्टूबर को 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए सभी निर्धारित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दी, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

न्यूनतम समर्थन मूल्य बुआई के मौसम से पहले घोषित किए जाते हैं, ताकि किसान उसी के अनुसार अपनी फसल की योजना बना सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के लिए 600 रुपए प्रति क्विंटल की गई है, इसके बाद मसूर के लिए 300 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। रेपसीड और सरसों, चना, जौ और गेहूं के लिए क्रमशः 250, 225, 170 और 160 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए अनिवार्य रबी फसलों के लिए एमएसपी में बढ़ोतरी, केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित किया गया है।

Point of View

बल्कि यह खाद्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है। यह समय है जब सरकार को किसानों के लिए और अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है ताकि वे अपने उत्पादन को और बढ़ा सकें।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

रबी फसलों की बुआई का क्षेत्रफल कितना बढ़ा है?
रबी फसलों की बुआई का क्षेत्रफल 20.88 लाख हेक्टेयर बढ़कर 652.33 लाख हेक्टेयर हो गया है।
क्या पिछले साल की तुलना में गेहूं का क्षेत्रफल बढ़ा है?
हाँ, गेहूं का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है।
सरसों और राई का क्षेत्रफल कितना बढ़ा है?
सरसों और राई का क्षेत्रफल 3.53 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 96.86 लाख हेक्टेयर हो गया है।
किस कारण से खेती का क्षेत्रफल बढ़ा है?
इस सीजन में खेती का क्षेत्रफल बढ़ने का मुख्य कारण मानसून के दौरान अच्छी बारिश है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य में क्या वृद्धि हुई है?
कुसुम के लिए 600 रुपए प्रति क्विंटल और मसूर के लिए 300 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
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