साबरमती नदी पर बुलेट ट्रेन पुल का निर्माण तेज़, 36 मीटर ऊंचा ढांचा 480 मीटर लंबाई में बन रहा

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साबरमती नदी पर बुलेट ट्रेन पुल का निर्माण तेज़, 36 मीटर ऊंचा ढांचा 480 मीटर लंबाई में बन रहा

सारांश

साबरमती नदी पर 36 मीटर ऊंचा और 480 मीटर लंबा पुल — यह सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की सबसे महत्वाकांक्षी रेल परियोजना की जमीनी रफ़्तार का प्रमाण है। सभी 8 खंभे तैयार, 3 स्पैन पूरे और संतुलित कैंटिलीवर तकनीक से नदी के प्रवाह को बाधित किए बिना आगे बढ़ता 508 किलोमीटर का सपना।

Key Takeaways

साबरमती नदी पर बुलेट ट्रेन पुल की ऊंचाई 36 मीटर और लंबाई 480 मीटर है — यह 12 मंजिला इमारत के बराबर ऊंचा है। पुल के सभी 8 गोलाकार खंभे पूरे हो चुके हैं, प्रत्येक का व्यास 6 से 6.5 मीटर के बीच। 76 मीटर के 3 स्पैन पूरे; शेष स्पैन और ऊपरी संरचना पर कार्य जारी। निर्माण में संतुलित कैंटिलीवर विधि और पोस्ट-टेंशनिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। नर्मदा और ताप्ती नदियों पर पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं; 508 किलोमीटर के पूरे कॉरिडोर पर कार्य तेज़ी से जारी। परियोजना को राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल निगम लिमिटेड (NHSRCL) कार्यान्वित कर रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत साबरमती नदी पर 36 मीटर ऊंचे और 480 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य तेज़ गति से जारी है। राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल निगम लिमिटेड (NHSRCL) से जुड़े अधिकारियों ने 27 अप्रैल को यह जानकारी दी। यह पुल अहमदाबाद में पश्चिमी रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य लाइन के समानांतर बनाया जा रहा है और प्रस्तावित साबरमती तथा अहमदाबाद हाई-स्पीड रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित है।

पुल की संरचना और तकनीकी विवरण

यह पुल 12 मंजिला इमारत के बराबर ऊंचाई का है और इसमें 76 मीटर के पाँच तथा 50 मीटर के दो स्पैन शामिल हैं। प्रत्येक स्पैन का निर्माण मौके पर ही ढाले गए 23 खंडों से किया जा रहा है। पुल के सभी आठ गोलाकार खंभों का कार्य पूरा हो चुका है, जिनमें से प्रत्येक का व्यास 6 से 6.5 मीटर के बीच है। इन खंभों की ऊंचाई 31 से 34 मीटर के बीच है।

इनमें से चार खंभे नदी तल में, दो नदी के किनारों पर और दो किनारों से बाहर स्थित हैं। यह पुल साबरमती स्टेशन से लगभग एक किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर है।

संतुलित कैंटिलीवर विधि का उपयोग

इस परियोजना में संतुलित कैंटिलीवर विधि अपनाई गई है, जो लंबी नदी-पारगमन संरचनाओं के लिए उपयुक्त तकनीक मानी जाती है। यह विधि संरचना के नीचे चबूतरे (फॉल्सवर्क) की आवश्यकता के बिना निर्माण की अनुमति देती है। खंडों को क्रमिक रूप से जोड़कर और पोस्ट-टेंशनिंग कंक्रीट तकनीक द्वारा एक सतत डेक तैयार किया जाता है, जिससे नदी के प्रवाह में न्यूनतम बाधा आती है।

निर्माण की वर्तमान स्थिति

अधिकारियों के अनुसार, नींव और आधारभूत संरचना का कार्य पूरा हो चुका है। 76 मीटर के तीन स्पैन पूरे हो गए हैं, जबकि शेष ऊपरी संरचना पर पियर हेड का निर्माण और खंडों की ढलाई जारी है। गौरतलब है कि यह निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

निर्माण के दौरान साबरमती नदी में निर्बाध जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी तटबंधों पर ह्यूमे पाइप पुलिया लगाई गई हैं और एक प्राकृतिक जल निकासी चैनल भी बनाए रखा गया है।

समग्र कॉरिडोर की प्रगति

लगभग 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल निगम लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। इस परियोजना में कई नदी-पारगमन संरचनाएं शामिल हैं। नर्मदा और ताप्ती जैसी प्रमुख नदियों पर पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं।

आधिकारिक अपडेट के अनुसार, कॉरिडोर में सैकड़ों किलोमीटर के वायडक्ट और पियर का कार्य पूरा हो चुका है। स्टेशनों, डिपो और पुल स्थलों पर निर्माण कार्य एक साथ आगे बढ़ रहा है, जो परियोजना की तेज़ होती रफ़्तार का संकेत है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना वर्षों की देरी और भूमि अधिग्रहण की अड़चनों से गुज़री है, और गुजरात में तेज़ रफ़्तार के बावजूद महाराष्ट्र में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है। तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव मनाना उचित है, परंतु परियोजना की संपूर्ण समयसीमा और लागत पारदर्शिता पर भी उतना ही ध्यान देना ज़रूरी है। NHSRCL की नियमित अपडेट स्वागतयोग्य हैं, किंतु जब तक पूरे कॉरिडोर पर समान गति नहीं आती, तब तक ये आंशिक उपलब्धियाँ पूरी तस्वीर नहीं बतातीं।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

साबरमती नदी पर बुलेट ट्रेन पुल कितना ऊंचा और लंबा है?
यह पुल 36 मीटर ऊंचा और 480 मीटर लंबा है, जो एक 12 मंजिला इमारत के बराबर ऊंचाई रखता है। यह अहमदाबाद में पश्चिमी रेलवे की मुख्य लाइन के समानांतर बनाया जा रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है। इसे राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल निगम लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
साबरमती पुल निर्माण में कौन-सी तकनीक अपनाई गई है?
इस पुल में संतुलित कैंटिलीवर विधि और पोस्ट-टेंशनिंग कंक्रीट तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक नदी के नीचे चबूतरे के बिना निर्माण की सुविधा देती है और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में न्यूनतम बाधा डालती है।
साबरमती पुल पर निर्माण की अभी तक क्या स्थिति है?
अधिकारियों के अनुसार, सभी 8 खंभे और नींव का कार्य पूरा हो चुका है। 76 मीटर के 3 स्पैन तैयार हो गए हैं, जबकि शेष स्पैन और ऊपरी संरचना पर काम जारी है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में और कौन-सी नदियों पर पुल बने हैं?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में नर्मदा और ताप्ती जैसी प्रमुख नदियों पर पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं। कॉरिडोर में कई नदी-पारगमन और जटिल संरचनाएं शामिल हैं।
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