क्या सरकार ने मेडिकल डिवाइस आयात को घटाने के लिए नई पहल की है?
सारांश
Key Takeaways
- मेडिकल डिवाइस उद्योग को सशक्त बनाने का प्रयास
- 500 करोड़ रुपए का सहायता पैकेज
- आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम
- क्लिनिकल परीक्षणों के लिए वित्तीय सहायता
- भारत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने मेडिकल उपकरणों के आयात को कम करने और देश में ही इन्हें बनाने को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत सरकार ने दो निवेश उप-योजनाओं के अंतर्गत कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इन योजनाओं की घोषणा एक साल पहले की गई थी।
वर्तमान में, भारत अपनी मेडिकल उपकरणों की जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा विदेश से मंगाता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने नवंबर 2024 में 500 करोड़ रुपए के सहायता पैकेज की शुरुआत की थी, ताकि देश में मेडिकल डिवाइस बनाने और नई तकनीक को बढ़ावा मिल सके।
हाल ही में सरकार द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, इस योजना के लिए योग्य कंपनियों को 10 जनवरी 2026 तक अपने प्रस्ताव जमा करने होंगे।
पहली उप-योजना के तहत सरकार ने 180 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिसमें करीब 30 कंपनियों को मदद दी जाएगी। इसका लक्ष्य मेडिकल उपकरण बनाने में आवश्यक कच्चे माल और पुर्जों (कंपोनेंट्स) का उत्पादन देश में ही बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
इसके अलावा, भारत की कई कंपनियां कच्चा माल और आवश्यक हिस्से विदेश से मंगाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है और सप्लाई में बाधा आती है। इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार इस योजना में परियोजना लागत का 10 से 20 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी, जो अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक होगी। यह पैसा खर्च करने के बाद वापस किया जाएगा।
यह योजना उन मेडिकल उपकरणों और जांच मशीनों पर लागू होगी, जिन्हें सरकार जरूरत पड़ने पर विदेश से खरीदने की अनुमति देती है, क्योंकि वे भारत में आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
दूसरी उप-योजना मेडिकल उपकरणों के क्लिनिकल परीक्षण (जांच) से संबंधित है। इसे मेडिकल डिवाइस क्लिनिकल स्टडीज सपोर्ट स्कीम कहा जाता है। इसके लिए कुल बजट 110 करोड़ रुपए है, जिसका लाभ बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप्स को भी मिलेगा।
इस योजना के तहत कंपनियों को जानवरों पर होने वाले अध्ययन और जांच के लिए 2.5 करोड़ रुपए तक और मरीजों पर होने वाले क्लिनिकल परीक्षण के लिए 5 करोड़ रुपए तक की मदद दी जाएगी। इसके अलावा, नई जांच किट (इन-विट्रो डायग्नोस्टिक) की गुणवत्ता जांच के लिए 1 करोड़ रुपए तक की सहायता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से देश में मेडिकल डिवाइस उद्योग मजबूत होगा, आयात कम होगा और भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।