सिक्योरिटाइजेशन बाज़ार ने तोड़े रिकॉर्ड: FY27 H1 में ₹1.47 लाख करोड़, 42% की उछाल
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सिक्योरिटाइजेशन (प्रतिभूतिकरण) बाज़ार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1) में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया। ICRA की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कुल सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम ₹1.47 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत अधिक है। गोल्ड लोन में उछाल, वाहन ऋण की वापसी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की बढ़ती फंडिंग ज़रूरतें इस असाधारण वृद्धि की मुख्य वजहें रहीं।
दूसरी तिमाही में आई तेज़ रफ़्तार
ICRA की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) में गतिविधियों में विशेष तेज़ी देखी गई। अकेले Q2 में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम ₹86,000 करोड़ तक पहुँच गया। यह आँकड़ा दर्शाता है कि पहली तिमाही की तुलना में बाज़ार ने दूसरी तिमाही में उल्लेखनीय गति पकड़ी।
गोल्ड लोन बना सबसे बड़ा चालक
रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन गोल्ड लोन सिक्योरिटाइजेशन रहा, जो वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में सालाना आधार पर लगभग डेढ़ गुना बढ़ गया। गोल्ड लोन के अलावा, मॉर्गेज लोन, स्मॉल बिजनेस लोन और माइक्रोलोन भी प्रमुख परिसंपत्ति श्रेणियाँ रहीं, जिनकी कुल वॉल्यूम में हिस्सेदारी 12 से 15 प्रतिशत के बीच रही।
वाहन लोन ने वापस हासिल की बाज़ार हिस्सेदारी
वाहन ऋण सिक्योरिटाइजेशन ने भी अपनी खोई हुई ज़मीन काफी हद तक वापस पाई है। H1 FY27 में कुल वॉल्यूम का लगभग एक-तिहाई हिस्सा वाहन ऋणों का रहा, जबकि Q1 FY27 में यह हिस्सेदारी मात्र 25 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ऋणदाताओं ने दोबारा इस बाज़ार में प्रवेश किया, जबकि कुछ ने दूसरी तिमाही में अपनी बिक्री की मात्रा बढ़ाई।
NBFC की फंडिंग ज़रूरतें बनीं अहम कारक
ICRA के अनुसार, सिक्योरिटाइजेशन वृद्धि में NBFC की बढ़ती भूमिका एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। पारंपरिक बैंकिंग चैनलों की तुलना में NBFC ने अपनी फंडिंग ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सिक्योरिटाइजेशन मार्ग पर निर्भरता बढ़ाई है। MSME और व्यावसायिक लोन पोर्टफोलियो में भी निरंतर आकर्षण बना रहा।
पूरे वर्ष के लिए नए रिकॉर्ड का अनुमान
ICRA के वाइस प्रेसिडेंट और स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस रेटिंग्स के सह-समूह प्रमुख सचिन जोगलेकर ने कहा कि वाहन, MSME या व्यावसायिक लोन और मॉर्गेज जैसे पारंपरिक सेगमेंट भी स्थिर गति से बढ़ते रहे, जिससे कुल वॉल्यूम को मज़बूती मिली। उन्होंने कहा कि H1 के मज़बूत प्रदर्शन से ICRA के उस अनुमान को समर्थन मिलता है, जिसके अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में सिक्योरिटाइजेशन वॉल्यूम ₹2.6 लाख करोड़ से ₹2.7 लाख करोड़ के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच सकता है। लेनदेन संरचना के लिहाज़ से पास-थ्रू सर्टिफिकेट (PTC) और डायरेक्ट असाइनमेंट (DA) दोनों मार्गों की हिस्सेदारी लगभग बराबर रही, जो पिछली तिमाही के रुझान के अनुरूप है। आने वाले महीनों में गोल्ड लोन, वाहन लोन और MSME फाइनेंसिंग की मज़बूत माँग बाज़ार को और ऊँचाई देने की संभावना रखती है।