क्या शेयर बाजार में डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट का महत्व है?
सारांश
Key Takeaways
- डिविडेंड से नियमित आय प्राप्त होती है।
- बोनस इश्यू से शेयरों की संख्या बढ़ती है।
- स्टॉक स्प्लिट से शेयर की कीमत कम होती है।
- इन तत्वों की समझ निवेश में सुधार लाती है।
- शेयर बाजार में तरलता बढ़ती है।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शेयर बाजार में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण शब्द हैं जिनके बारे में निवेशकों को जानना आवश्यक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर उनकी कमाई और निवेश की वैल्यू पर प्रभाव डाल सकते हैं। इनमें डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन तीनों को सही तरीके से समझना हर निवेशक के लिए अनिवार्य है।
डिविडेंड वह हिस्सा होता है जो कंपनी अपने मुनाफे में से अपने शेयरधारकों को देती है। जब कोई कंपनी अच्छा मुनाफा कमाती है और भविष्य के लिए धन बचाने के बाद कुछ राशि शेयरधारकों में बांटती है, तो उसे 'डिविडेंड' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कंपनी ने 10 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड घोषित किया है और आपके पास उस कंपनी के 100 शेयर हैं, तो आपको कुल 1,000 रुपए का लाभ होगा जो डिविडेंड के रूप में आपको मिलेगा।
जब कोई कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों को बिना किसी अतिरिक्त पैसे के नए शेयर देती है, तो उसे 'बोनस इश्यू या बोनस शेयर' कहा जाता है। यह भी कंपनी के मुनाफे से ही दिया जाता है, लेकिन इसमें नकद की जगह शेयर मिलते हैं। मान लीजिए किसी कंपनी ने 1:1 के अनुपात में बोनस इश्यू की घोषणा की। इसका मतलब है कि अगर आपके पास उस कंपनी के 50 शेयर हैं, तो आपको 50 अतिरिक्त शेयर मुफ्त में मिल जाएंगे।
जब कंपनी अपने एक शेयर को कई छोटे हिस्सों में बांटती है, तो उसे 'स्टॉक स्प्लिट' कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि उस कंपनी के शेयर की कीमत कम हो जाए और अधिक लोग उसे खरीद सकें। इसमें शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन निवेश की कुल वैल्यू वही रहती है। जैसे, अगर किसी कंपनी का एक शेयर 1,000 रुपए का है और कंपनी 1:2 का स्टॉक स्प्लिट करती है, तो आपका एक शेयर दो शेयरों में बदल जाएगा और हर शेयर की कीमत लगभग 500 रुपए हो जाएगी।
इस प्रकार, डिविडेंड में निवेशकों को नकद पैसा मिलता है। बोनस इश्यू में बिना पैसे दिए अतिरिक्त शेयर मिलते हैं, जबकि स्टॉक स्प्लिट में शेयरों की संख्या बढ़ती है, लेकिन कोई अतिरिक्त लाभ तुरंत नहीं मिलता, केवल शेयर की कीमत कम हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिविडेंड से निवेशक को नियमित आय प्राप्त होती है। बोनस इश्यू से लंबे समय में निवेश बढ़ता है और शेयरों की संख्या अधिक हो जाती है। वहीं स्टॉक स्प्लिट से शेयर अधिक लोगों की पहुँच में आता है और बाजार में इसकी तरलता बढ़ती है।
-राष्ट्र प्रेस
डीबीपी/एबीएस