पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सोमनाथ के मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' कहा, समुदाय में गर्व का अनुभव

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पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सोमनाथ के मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' कहा, समुदाय में गर्व का अनुभव

सारांश

सोमनाथ के मछुआरों ने 'मन की बात' में पीएम मोदी की सराहना की। उनकी पहचान से आत्मविश्वास बढ़ा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए।

Key Takeaways

  • समुद्र के योद्धा: मछुआरों को राष्ट्रीय पहचान मिली।
  • सरकारी सहायता: सब्सिडी और बीमा कवरेज ने मदद की।
  • आत्मनिर्भरता: मछुआरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हैं।
  • सुरक्षा: बेहतर उपकरणों से सुरक्षा में वृद्धि हुई।
  • गर्व की बात: प्रधानमंत्री का जिक्र मछुआरों के लिए गर्व का क्षण।

सोमनाथ, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के तटीय क्षेत्र के मछुआरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' के 132वें एपिसोड में मछली पकड़ने वाले समुदाय की सराहना का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि इस पहचान से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भूमिका की पुष्टि हुई है।

प्रसारण के दौरान, प्रधानमंत्री ने मछुआरों को 'समुद्र के योद्धा' और 'आत्मनिर्भर भारत की रीढ़' कहा, उनके आर्थिक और खाद्य सुरक्षा में योगदान की सराहना की।

उन्होंने प्रौद्योगिकी, बीमा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सरकारी सहायता पर भी जोर दिया और ओडिशा की सुजाता भुयान जैसी सफल कहानियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने मछली पालन के माध्यम से अपने जीवन को बदल दिया।

सोमनाथ और द्वारका के मछुआरों के लिए, यह जिक्र उनके लिए गर्व का कारण बना। कई लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।

द्वारका के एक मछुआरे, मुकेश भाई फुलवाड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री के शब्दों और सरकारी मदद ने समुदाय को सशक्त बना दिया है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से कहा, "हम योद्धा हैं, और 2014 के बाद से हम और भी मजबूत योद्धा बन गए हैं। सरकार ने हमें सब्सिडी और सहायता के संसाधन दिए हैं। हम आत्मनिर्भर हो गए हैं और हमेशा योद्धा बने रहेंगे।"

उन्होंने कहा कि बेहतर उपकरणों और आर्थिक मदद ने उनकी आजीविका को सुधारने में मदद की है, जिससे वे समुद्र में अधिक कुशलता और सुरक्षा से कार्य कर पाते हैं।

एक अन्य मछुआरे, किशोर भाई ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित होना उनके समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने हमें याद किया, यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम आत्मनिर्भर हैं। यह गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री हम जैसे लोगों की परवाह करते हैं।"

इस क्षेत्र के मछुआरों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में, सब्सिडी, बीमा कवरेज, और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से संबंधित पहलों ने उनके काम को अधिक टिकाऊ और कम जोखिम भरा बना दिया है। कई लोगों ने कहा कि इन उपायों ने उन्हें अपने कार्यों का विस्तार करने और अपने परिवारों के लिए स्थिर आय सुनिश्चित करने में मदद की है।

समुदाय ने यह भी बताया कि 'मन की बात' जैसे राष्ट्रीय मंच के माध्यम से मिली पहचान न केवल उनके योगदान को मान्यता देती है, बल्कि भारत के विकास की कहानी में मछली पालन क्षेत्र के महत्व की ओर भी ध्यान खींचती है।

सोमनाथ के मछुआरों का मानना है कि वे देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे, और साथ ही आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेंगे।

Point of View

जो उनकी मेहनत और योगदान को मान्यता देती है। यह एक सकारात्मक कदम है जो आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
NationPress
30/03/2026

Frequently Asked Questions

प्रधानमंत्री ने मछुआरों को क्यों 'समुद्र का योद्धा' कहा?
प्रधानमंत्री ने मछुआरों के योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 'समुद्र का योद्धा' कहा।
'मन की बात' में मछुआरों का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण है?
'मन की बात' में मछुआरों का जिक्र उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देता है।
सरकार ने मछुआरों के लिए कौनसी योजनाएँ बनाई हैं?
सरकार ने सब्सिडी, बीमा कवरेज और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की योजनाएँ बनाई हैं।
क्या मछुआरों को प्रधानमंत्री के शब्दों से आत्मविश्वास मिला?
हाँ, प्रधानमंत्री के शब्दों ने मछुआरों का आत्मविश्वास बढ़ाया है।
मछुआरों की आजीविका में सुधार कैसे हुआ है?
बेहतर उपकरणों और आर्थिक मदद से मछुआरों की आजीविका में सुधार हुआ है।
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