क्या टेक्नोक्सियन वर्ल्डकप जैसे आयोजन भारत को टेक्नोलॉजी में लीडर बनाएंगे?: राज के शर्मा

सारांश
Key Takeaways
- टेक्नोक्सियन वर्ल्डकप विश्व की सबसे बड़ी रोबोटिक्स चैम्पियनशिप है।
- यह भारत को एक ग्लोबल टेक स्पोर्ट्स हब बनाने में मदद करेगा।
- इसमें लगभग 60 देशों के प्रतिभागी भाग लेंगे।
- भारत का डिफेंस टेक्नोलॉजी क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
- इस क्षेत्र में फंडिंग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। टेक्नोक्सियन वर्ल्डकप, विश्व की सबसे विशाल रोबोटिक्स चैम्पियनशिप है। भारत को टेक्नोलॉजी में एक लीडर बनाने और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन आवश्यक है। यह बात आयोजक राज के शर्मा ने रविवार को कही।
राज के शर्मा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन ने वर्ल्ड रोबोटिक्स ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से टेक्नोक्सियन वर्ल्डकप 9.0 का आयोजन किया है, जिसका उद्देश्य भारत को एक ग्लोबल टेक स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करना है। इस कार्यक्रम में शामिल प्रत्येक देश अपने स्तर पर नेशनल चैंपियनशिप आयोजित करता है, और वहां की सर्वश्रेष्ठ टीमों को भारत में प्रतिस्पर्धा के लिए भेजा जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य यह है कि दुनिया भारत की प्रतिभा को देख सके और भारतीय छात्र सीखें, साथ ही ज्ञान का आदान-प्रदान हो।
जानकारी के अनुसार, टेक्नोक्सियन वर्ल्डकप 9.0 का आयोजन नोएडा स्टेडियम में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में लगभग 60 देशों के प्रतिभागी शामिल होंगे, जो 15 श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। इसका उद्देश्य भारतीय छात्रों को वैश्विक स्तर पर परिचित कराना और भारत के ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनने के दृष्टिकोण को मजबूत करना है।
इसके साथ ही, भारत हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी के तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन द्वारा जारी की गई 'इंडिया मिलिट्री टेक रिपोर्ट 2025' के अनुसार, इस क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने 2025 में अब तक 192.4 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, जो इस वर्ष की शुरुआत से अब तक की सबसे बड़ी फंडिंग है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र ने 2016 से अब तक 211 फंडिंग राउंड में कुल 611 मिलियन डॉलर जुटाए हैं।
मिलिट्री टेक क्षेत्र में फंडिंग डील की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। जहां 2016 में सिर्फ 3 डील हुई थीं, वहीं 2023 में यह संख्या 36 हो गई थी, और इस साल यह आंकड़ा 20 तक पहुंच गया है।
ट्रैक्सन की सह-संस्थापक नेहा सिंह ने कहा कि भारत का डिफेंस टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम इनोवेशन, नीति समर्थन और निवेशक भागीदारी से प्रेरित होकर एक “निर्णायक चरण” में प्रवेश कर रहा है।