टिम कुक का एप्पल में 15 साल का युग समाप्त, मार्केटकैप $350 बिलियन से $4 ट्रिलियन के पार
सारांश
मुख्य बातें
एप्पल के सीईओ टिम कुक का 31 अगस्त 2026 को 15 वर्षों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। उनकी जगह जॉन टर्नस कंपनी की कमान संभालेंगे, जबकि कुक बोर्ड एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कंपनी से जुड़े रहेंगे। यह बदलाव एप्पल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है।
कुक के नेतृत्व में एप्पल का असाधारण उत्थान
टिम कुक ने यह जिम्मेदारी अगस्त 2011 में स्टीव जॉब्स की बिगड़ती सेहत के बाद संभाली थी। उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में कंपनी का मार्केटकैप $350 बिलियन से बढ़कर $4 ट्रिलियन से अधिक हो गया — यानी लगभग 11 गुना की वृद्धि। इसी अवधि में एप्पल के शेयर की कीमत $13 से बढ़कर $320 के करीब पहुँच गई, जो करीब 25 गुना की बढ़त को दर्शाती है।
यह ऐसे समय में आया जब तकनीकी उद्योग में भारी उतार-चढ़ाव रहे और कई दिग्गज कंपनियाँ प्रासंगिकता खोती रहीं। कुक के नेतृत्व में एप्पल ने न केवल अपनी स्थिति बनाए रखी, बल्कि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई।
हार्डवेयर से सर्विसेज तक का रणनीतिक बदलाव
कुक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एप्पल को एक शुद्ध हार्डवेयर कंपनी से एक विविध प्रौद्योगिकी व्यवसाय में बदलना शामिल है। ऐप स्टोर, एप्पल म्यूजिक और एप्पल पे जैसी सेवाओं ने कंपनी की आमदनी के नए रास्ते खोले। सर्विसेज सेगमेंट से अब सालाना $100 बिलियन से अधिक की कमाई होती है और इसमें हार्डवेयर के मुकाबले अधिक मार्जिन मिलता है।
इसके अलावा, कुक ने एप्पल की चिप रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव किया। कंपनी ने इंटेल पर अपनी निर्भरता समाप्त कर एप्पल सिलिकॉन प्लेटफॉर्म के तहत अपने प्रोसेसर खुद डिज़ाइन करने शुरू किए, जिससे परफॉर्मेंस और हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम पर कंपनी का नियंत्रण काफी बढ़ा।
नए उत्पाद और विस्तार
कुक के कार्यकाल में 2015 में एप्पल वॉच लॉन्च हुई, जिसने हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग को मुख्यधारा में ला दिया। 2016 में एयरपॉड्स आए, जिन्होंने वायरलेस ईयरबड्स को एक नई उपभोक्ता श्रेणी बना दिया और एप्पल के लिए राजस्व का एक और मज़बूत स्तंभ खड़ा किया।
चुनौतियाँ और असफलताएँ
हालाँकि कुक का सफर हमेशा सुगम नहीं रहा। 2012 में लॉन्च हुए एप्पल मैप्स को गलत और अधूरी जानकारी के कारण व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। 2023 में लॉन्च किए गए विज़न प्रो मिक्स्ड-रियलिटी हेडसेट को इसकी ऊँची कीमत के चलते बड़े पैमाने पर अपनाने में मुश्किलें आईं।
गौरतलब है कि कंपनी को अपना महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक और ऑटोनॉमस व्हीकल प्रोग्राम, जिसे 'प्रोजेक्ट टाइटन' के नाम से जाना जाता था, वर्षों के विकास और भारी लागत के बावजूद बंद करना पड़ा। व्यावसायिक सफलता को लेकर अनिश्चितता इसकी प्रमुख वजह रही।
जॉन टर्नस के सामने एआई की बड़ी परीक्षा
एप्पल के अगले दौर की सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। जहाँ माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और ओपनएआई ने AI को उपभोक्ता और एंटरप्राइज़ उत्पादों में तेज़ी से शामिल किया है, वहीं एप्पल ने प्राइवेसी, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और ऑन-डिवाइस कंप्यूटिंग को प्राथमिकता देते हुए अधिक सतर्क रुख अपनाया है। नए सीईओ जॉन टर्नस के लिए यह रणनीति एक बड़ी कसौटी साबित हो सकती है, क्योंकि प्रतिद्वंद्वियों की रफ्तार का मुकाबला करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।