वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027: धोलेरा से परमाणु ऊर्जा तक, उद्योग जगत ने गिनाए निवेश के बड़े दांव
सारांश
मुख्य बातें
वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 की तैयारियों को लेकर नई दिल्ली में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम में उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधियों ने गुजरात को देश के सबसे प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्यों में से एक करार दिया। जनवरी 2027 में होने वाले इस वैश्विक शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में एक हजार से अधिक उद्योग प्रतिनिधि और निवेशक शामिल हुए। उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियाँ, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और सुदृढ़ बुनियादी ढाँचा इसे निवेशकों की प्राथमिक पसंद बना रहे हैं।
एसोचैम की नज़र में वाइब्रेंट गुजरात का महत्व
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात केवल एक निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि एक आर्थिक महोत्सव है जिसने पिछले डेढ़ दशक में देश-विदेश के निवेशकों को गुजरात से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल की नींव रखी थी और तब से यह लगातार विस्तार पाता रहा है।
मिंडा ने धोलेरा में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में बढ़ते निवेश को विशेष रूप से रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने साणंद में मारुति के नए ऑटोमोबाइल संयंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाएँ पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करती हैं। उनके अनुसार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ हैं और बड़े निवेशों के साथ इन इकाइयों को भी विस्तार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
डीसीएम श्रीराम का तीन दशकों का गुजरात अनुभव
डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर अजय एस. श्रीराम ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात ने वर्षों में राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर सुदृढ़ पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी पिछले तीन दशकों से गुजरात में सक्रिय है — शुरुआत में स्थापित 100 टन क्षमता की कास्टिक सोडा इकाई आज बढ़कर 2,250 टन क्षमता तक पहुँच चुकी है।
अजय श्रीराम ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में कंपनी ने गुजरात में लगभग ₹5,000 करोड़ का निवेश किया है। अब अगले चार से पाँच वर्षों में सहयोगी कंपनियों और भागीदारों के साथ मिलकर ₹8,000 से ₹10,000 करोड़ तक अतिरिक्त निवेश करने की योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि रोज़गार सृजन और आर्थिक विकास किसी भी देश की प्रगति के लिए अनिवार्य हैं और इसी दृष्टिकोण के साथ कंपनी गुजरात में विस्तार जारी रखेगी।
टाटा पावर की 3 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा योजना
टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के सीईओ एवं एमडी संजय बंगा ने बताया कि गुजरात में कंपनी की 4,000 मेगावाट क्षमता वाली मुंद्रा परियोजना राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त राज्य में कंपनी के पास लगभग 700 मेगावाट की सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएँ भी हैं।
बंगा ने बताया कि गुजरात सरकार ने हाल ही में कंपनी को 3 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए भूमि आवंटित की है। उन्होंने राज्य सरकार की उद्योग-समर्थक नीतियों और परियोजनाओं में आने वाली चुनौतियों के त्वरित समाधान की सराहना की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कंपनी ने गुजरात में एक संभावित स्थल की पहचान की है जहाँ तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का अध्ययन चल रहा है — और यदि परीक्षण सफल रहे, तो परमाणु ऊर्जा परियोजना पर भी काम आगे बढ़ाया जाएगा।
आम जनता और MSME पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और गुजरात इस दौड़ में अग्रणी राज्यों में शुमार है। गौरतलब है कि वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की शुरुआत के बाद से राज्य में औद्योगिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बड़े औद्योगिक निवेशों के साथ MSME इकाइयों को सहायक उद्योग के रूप में विकसित होने के अवसर मिलते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आय दोनों बढ़ते हैं।
आगे की राह
जनवरी 2027 में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले इस कर्टेन रेजर कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के प्रमुख उद्योग घराने गुजरात में दीर्घकालिक निवेश को लेकर गंभीर हैं। धोलेरा में सेमीकंडक्टर और AI, साणंद में ऑटोमोबाइल, और नवीकरणीय व परमाणु ऊर्जा — ये सभी क्षेत्र मिलकर गुजरात को अगले दशक के औद्योगिक विकास का केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।