एचडीएफसी बैंक के अगले CEO की रेस में कैजाद भरूचा सबसे आगे, अक्टूबर 2026 में जगदीशन के जाने के बाद संभाल सकते हैं कमान
सारांश
मुख्य बातें
एचडीएफसी बैंक के उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा बैंक के अगले प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा प्रमुख शशिधर जगदीशन के अक्टूबर 2026 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति न लेने के फैसले से यह संभावना और मजबूत हुई है।
उत्तराधिकार की प्रक्रिया कैसे होगी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत निजी क्षेत्र के बैंकों को CEO पद के लिए दो से तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में केंद्रीय बैंक को स्वीकृति हेतु भेजने होते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक जगदीशन के कार्यकाल की समाप्ति के बाद RBI को जो सूची भेजेगा, उसमें कैजाद भरूचा का नाम प्राथमिकता में सबसे ऊपर हो सकता है। अंतिम नियुक्ति RBI की मंजूरी के बाद ही होगी।
RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंक की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति को मौजूदा प्रमुख का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम छह महीने पहले उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करनी होती है, और इसमें आंतरिक तथा बाहरी दोनों प्रकार के उम्मीदवारों पर विचार अनिवार्य है।
कैजाद भरूचा: अनुभव और पृष्ठभूमि
कैजाद भरूचा एचडीएफसी बैंक के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। वह जून 2014 से बैंक के निदेशक मंडल का हिस्सा हैं और वर्तमान में उप प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। बैंक के संचालन, जोखिम प्रबंधन और व्यवसायिक रणनीति में उनकी निर्णायक भूमिका के चलते उन्हें स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है।
नियामकीय चुनौती: कार्यकाल सीमा का पेच
हालांकि, भरूचा के संभावित कार्यकाल को लेकर एक अहम नियामकीय बाधा भी सामने आ सकती है। नियमों के अनुसार किसी पूर्णकालिक निदेशक की लगातार सेवा अवधि 15 वर्षों तक सीमित होती है। चूंकि भरूचा जून 2014 में बोर्ड में शामिल हुए थे, इसलिए वे जून 2029 में इस सीमा तक पहुँच जाएंगे।
ऐसे में यदि वह अक्टूबर 2026 में CEO बनते हैं, तो उनका संभावित कार्यकाल तीन वर्ष से भी कम रह सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, यदि RBI विशेष अनुमति देता है तो इस अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं है।
2020 की उत्तराधिकार प्रक्रिया से तुलना
गौरतलब है कि 2020 में दीर्घकालीन प्रमुख आदित्य पुरी के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उत्तराधिकार प्रक्रिया में शशिधर जगदीशन सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे थे और अंततः उन्हें CEO नियुक्त किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब एचडीएफसी बैंक एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए ऐतिहासिक विलय के बाद अपने विस्तारित कारोबार के एकीकरण और विस्तार की प्रक्रिया में है।
नए CEO का चुनाव क्यों अहम है
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंक अन्य उम्मीदवारों के नामों पर भी विचार कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण दौर में नए CEO का चयन बैंक की भविष्य की रणनीति, विकास की गति और निवेशकों के विश्वास के लिए निर्णायक साबित होगा। अगले कुछ महीनों में नामांकन समिति की गतिविधियों और RBI के रुख पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।