एचडीएफसी बैंक के शेयर 0.62% टूटे; राजीव कुमार बने नए चेयरमैन, सीईओ नियुक्ति अभी बाकी
सारांश
मुख्य बातें
एचडीएफसी बैंक के शेयर मंगलवार, 30 जून को शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे, जब बैंक ने पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्षों के लिए नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने की घोषणा की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 0.62% की गिरावट के साथ ₹794 के इंट्रा-डे निचले स्तर तक पहुँचे, जो निवेशकों की सतर्क मनोदशा को दर्शाता है।
शेयर बाज़ार में प्रतिक्रिया
खबर लिखे जाने तक BSE पर एचडीएफसी बैंक के शेयर 0.29% की गिरावट के साथ ₹796.65 पर कारोबार कर रहे थे। BSE के आँकड़ों के अनुसार, बैंक के शेयर ने पिछले 52 हफ्तों में ₹1,020.35 का उच्चतम और ₹726.75 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया है। गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में यह शेयर 20% से अधिक टूट चुका है, और पिछले छह महीनों में भी इसमें करीब 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
राजीव कुमार की नियुक्ति और पृष्ठभूमि
बैंक ने सोमवार, 29 जून को शेयर बाज़ार को दी गई नियामक सूचना में राजीव कुमार की पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्ति की पुष्टि की। वे पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती की जगह लेंगे, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में इस्तीफा दिया था। चक्रवर्ती ने इस्तीफे के समय कहा था कि बैंक में कुछ ऐसी कार्यप्रणालियाँ थीं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं।
मार्च में चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया था। अब राजीव कुमार की नियुक्ति के साथ बैंक को तीन वर्षों के लिए स्थायी नेतृत्व मिल गया है।
सीईओ नियुक्ति पर स्थिति
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को हुई गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) की बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की पुनर्नियुक्ति पर कोई चर्चा नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार, बैंक जल्द ही सीईओ नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ करेगा, लेकिन इससे पहले वह चाहता है कि नए स्थायी चेयरमैन पूरी तरह पदभार संभाल लें।
पूर्व चेयरमैन की चिंताएँ
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से जुड़ी कानूनी समीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह समीक्षा अत्यधिक औपचारिक थी और मुख्य रूप से नियमों के अनुपालन पर केंद्रित रही, जबकि उनकी उठाई गई व्यापक कारोबारी चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देश का सबसे बड़ा निजी बैंक नेतृत्व परिवर्तन के एक नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है। राजीव कुमार की नियुक्ति से बोर्ड-स्तरीय स्थिरता तो आई है, लेकिन सीईओ पद पर अनिश्चितता बनी रहने तक निवेशकों की सतर्कता कायम रहने की संभावना है। बाज़ार की नज़र अब NRC की अगली बैठक और सीईओ नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा पर टिकी रहेगी।