एचडीएफसी बैंक की स्वतंत्र कानूनी समीक्षा: पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के दावे साबित नहीं
सारांश
मुख्य बातें
एचडीएफसी बैंक ने 11 जुलाई 2026 को घोषित किया कि पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे में उठाए गए मुद्दों की स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में उनके दावों की पुष्टि नहीं हुई। बैंक के अनुसार, रिकॉर्ड की विस्तृत जाँच और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के बाद आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
कानूनी समीक्षा की पृष्ठभूमि
पूर्व चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद बैंक की कॉरपोरेट गवर्नेंस व्यवस्था को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया था। इस्तीफे के तुरंत बाद केकी मिस्त्री को अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया।
बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ शशिधर जगदीशन ने बताया कि चूँकि एचडीएफसी बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADR) न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) में सूचीबद्ध हैं, इसलिए मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच अनिवार्य थी। इसी के मद्देनज़र बोर्ड ने देश और विदेश की प्रतिष्ठित कानूनी फर्मों को नियुक्त किया।
जाँच प्रक्रिया और समिति का गठन
बोर्ड ने केवल स्वतंत्र निदेशकों की एक विशेष समिति का गठन किया, जिसने पूरी कानूनी समीक्षा की निगरानी की। इस समिति ने यह सुनिश्चित किया कि बैंक और कानूनी फर्मों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।
समीक्षा के दौरान चक्रवर्ती के इस्तीफे से पूर्व के दो वर्षों के बोर्ड बैठक के मिनट्स, संबंधित दस्तावेज़, आंतरिक संवाद तथा सभी स्वतंत्र निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन के कई अधिकारियों से विस्तृत पूछताछ की गई।
समीक्षा के निष्कर्ष
26 जून को बाहरी कानूनी फर्मों ने अपनी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि चक्रवर्ती के इस्तीफे में किए गए दावे और उनसे जुड़े संकेत उपलब्ध दस्तावेज़ों तथा गवाहों के बयानों से साबित नहीं होते। यह खुलासा बैंक की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में किया गया।
शेयरधारकों को संदेश और आगे की राह
अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन केकी मिस्त्री ने शेयरधारकों को आश्वस्त किया कि बैंक मज़बूत कॉरपोरेट गवर्नेंस सिद्धांतों और मूल्यों पर आधारित संस्था है, और भविष्य में भी पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
जाँच पूरी होने के बाद बैंक के बोर्ड ने राजीव कुमार को अंशकालिक चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने का फैसला किया है। हालाँकि, यह नियुक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक के शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही प्रभावी होगी।