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एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने लीगल रिव्यू को बताया 'अनावश्यक', बोर्ड पर उठाए सवाल

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एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने लीगल रिव्यू को बताया 'अनावश्यक', बोर्ड पर उठाए सवाल

सारांश

एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने बैंक द्वारा उनके इस्तीफे की जाँच के लिए नियुक्त लीगल फर्मों को 'अनावश्यक' बताया और बोर्ड पर नियुक्ति का आधार न बताने का आरोप लगाया। यह देश के सबसे बड़े निजी बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया था।
चक्रवर्ती ने इस्तीफे के लिए बैंक की कारोबारी प्रथाओं और अपने व्यक्तिगत मूल्यों के बीच के टकराव को ज़िम्मेदार ठहराया।
उन्होंने इस्तीफे की जाँच के लिए नियुक्त लीगल फर्मों की रिपोर्ट को 'अनावश्यक' बताया और कहा कि फर्मों ने असली मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया।
बोर्ड ने उन्हें कभी नहीं बताया कि लीगल फर्मों को किस कानूनी प्रावधान के तहत नियुक्त किया गया।
दुबई एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामला उनके कार्यकाल में सामने आया था, जिस पर बैंक ने तेज़ी से सुधारात्मक कदम उठाए।
चक्रवर्ती 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे।

एचडीएफसी बैंक के पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने बैंक द्वारा उनके इस्तीफे की जाँच के लिए नियुक्त की गई लीगल फर्मों की रिपोर्ट को 'अनावश्यक' करार दिया है। उनका कहना है कि इन फर्मों ने उनके इस्तीफे के असली कारणों — बैंक की कारोबारी प्रथाओं और उनके व्यक्तिगत मूल्यों के बीच के टकराव — को दरकिनार कर केवल अनुपालन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया। 29 जून को प्रकाशित एक साक्षात्कार में चक्रवर्ती ने यह भी खुलासा किया कि बोर्ड ने उन्हें कभी नहीं बताया कि इन लॉ फर्मों को किस कानूनी प्रावधान के तहत नियुक्त किया गया था।

लीगल रिव्यू पर चक्रवर्ती की आपत्ति

चक्रवर्ती के अनुसार, लीगल फर्मों ने अपनी रिपोर्ट में बैंक के इंटरव्यू और बोर्ड मीटिंग के मिनट्स पर फोकस किया, जबकि उनके इस्तीफे का मूल उद्देश्य बैंक को आंतरिक समीक्षा के लिए प्रेरित करना था। उन्होंने कहा कि उन्होंने बोर्ड से कई बार यह जानने की कोशिश की कि इन फर्मों की नियुक्ति किन शर्तों और किस कानूनी आधार पर हुई, लेकिन बोर्ड ने इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

इस्तीफे की वजह: मूल्यों और कार्यप्रणाली में टकराव

चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा बैंक की कुछ कारोबारी प्रथाओं और उनके व्यक्तिगत मूल्यों के बीच के अंतर की वजह से था। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था, 'पिछले दो वर्षों में मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और कार्यप्रणालियाँ देखी हैं जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं हैं। यही मेरे उपरोक्त निर्णय का आधार है।' हालाँकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वे कारोबारी प्रथाएँ क्या थीं, यह कहते हुए कि 'बोर्डरूम की बातें बोर्डरूम तक ही रहनी चाहिए।'

एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामला

चक्रवर्ती ने बताया कि दुबई एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामला उनके कार्यकाल के दौरान सामने आया था। उनके अनुसार, बैंक ने उस समय तेज़ी से सुधारात्मक कदम उठाए थे। यह मामला बैंकिंग नियामक और निवेशकों के लिए संवेदनशील रहा है, क्योंकि एटी-1 बॉन्ड जटिल वित्तीय उपकरण होते हैं जिनकी बिक्री में पारदर्शिता अनिवार्य मानी जाती है।

पृष्ठभूमि: इस्तीफे की टाइमलाइन

चक्रवर्ती 2021 में एचडीएफसी बैंक के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद से 18 मार्च को इस्तीफा दिया। यह ऐसे समय में आया जब एचडीएफसी बैंक पर नियामकीय और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवाल पहले से चर्चा में थे। गौरतलब है कि किसी बड़े निजी बैंक के चेयरमैन का इस तरह सार्वजनिक रूप से आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना असामान्य माना जाता है।

आगे क्या

चक्रवर्ती के बयान के बाद एचडीएफसी बैंक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बाज़ार विश्लेषकों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों की नज़र इस पर बनी रहेगी कि बैंक का बोर्ड इस विवाद को किस तरह संभालता है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की इस मामले में क्या भूमिका रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह पारदर्शिता के किस स्तर को दर्शाता है? एचडीएफसी बैंक जैसे संस्थान, जो लाखों खुदरा निवेशकों और जमाकर्ताओं की बचत संभालते हैं, उनसे उच्चतम स्तर की जवाबदेही अपेक्षित है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए यह एक संकेत है कि निजी बैंकों में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका और बोर्ड की जवाबदेही की समीक्षा की ज़रूरत है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अतानु चक्रवर्ती ने एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा क्यों दिया?
चक्रवर्ती ने 18 मार्च को इस्तीफा देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर ऐसी घटनाएँ और कार्यप्रणालियाँ देखीं जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने इस्तीफे के माध्यम से बैंक को आंतरिक समीक्षा के लिए प्रेरित करने की कोशिश की थी।
एचडीएफसी बैंक की लीगल रिव्यू को चक्रवर्ती ने 'अनावश्यक' क्यों बताया?
चक्रवर्ती का कहना है कि लीगल फर्मों ने उनके इस्तीफे के मूल कारणों — कारोबारी प्रथाओं और मूल्यों के टकराव — को नज़रअंदाज़ कर केवल अनुपालन पहलुओं पर ध्यान दिया। साथ ही बोर्ड ने उन्हें कभी नहीं बताया कि इन फर्मों को किस कानूनी प्रावधान के तहत नियुक्त किया गया, जिससे उन्होंने पूरी कवायद को अनावश्यक करार दिया।
दुबई एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामला क्या है?
यह मामला एचडीएफसी बैंक से जुड़े एटी-1 बॉन्ड की बिक्री में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जो चक्रवर्ती के कार्यकाल के दौरान सामने आया था। उनके अनुसार, बैंक ने उस समय तेज़ी से सुधारात्मक कदम उठाए थे।
अतानु चक्रवर्ती एचडीएफसी बैंक से कब जुड़े थे और उनका पद क्या था?
चक्रवर्ती 2021 में एचडीएफसी बैंक के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हुए थे और पार्ट-टाइम चेयरमैन का पद संभाल रहे थे। उन्होंने 18 मार्च को यह पद छोड़ दिया।
इस विवाद का एचडीएफसी बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर क्या असर पड़ सकता है?
किसी बड़े निजी बैंक के पूर्व चेयरमैन द्वारा बोर्ड की पारदर्शिता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिहाज़ से गंभीर संकेत है। नियामक और निवेशक अब बैंक की प्रतिक्रिया और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की संभावित भूमिका पर नज़र रखेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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