नशामुक्त भारत के लिए समीर वानखेड़े की पुकार: 'युवाओं को ड्रग्स से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी'
सारांश
मुख्य बातें
आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में आयोजित एक एंटी-ड्रग जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत को नशामुक्त बनाने की लड़ाई केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — इसके लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान भी उतना ही ज़रूरी है। महाराष्ट्र के एंटी-ड्रग कैंपेन का समर्थन करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी को नशे के खतरे से बचाने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम का उद्देश्य और 'ग्राउंड जीरो' पहुँच
वानखेड़े ने बताया कि बांद्रा जैसे प्रभावित इलाकों में सीधे जाकर काम करने का मकसद उन बच्चों और युवाओं तक पहुँचना है जहाँ ड्रग्स से जुड़े मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि यह 'ग्राउंड जीरो' पर जाकर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग — स्कूली बच्चों और युवाओं — के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास करता है।
युवा आबादी पर मंडराता खतरा
वानखेड़े ने चेतावनी दी कि 18 से 35 वर्ष की आयु के युवा देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनके अनुसार, यदि इतनी विशाल युवा आबादी नशे की गिरफ्त में आती है तो इसका असर न केवल वर्तमान पर, बल्कि देश के दीर्घकालिक भविष्य पर भी पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज अगर ड्रग्स के खतरे को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।
दो-स्तरीय रणनीति की वकालत
वानखेड़े ने नशे के विरुद्ध अभियान को दो स्तरों पर आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया। उनके अनुसार, एक तरफ कानून के तहत ड्रग्स के कारोबार और आपूर्ति श्रृंखला पर 100 फीसदी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों और प्रभावित इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ कार्रवाई से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा — बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही नशे के नुकसान के बारे में शिक्षित करना अनिवार्य है।
सरकारी प्रयासों को समर्थन
वानखेड़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ड्रग्स उन्मूलन के लिए निर्धारित दो वर्ष और 100 सप्ताह की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में लगातार काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चल रहे राज्य स्तरीय प्रयासों की भी सराहना की।
अधिकारियों की जिम्मेदारी पर स्पष्ट रुख
एपडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर से तंबाकू और अन्य हानिकारक उत्पादों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए वानखेड़े ने कहा कि जो भी सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए नशीले पदार्थों के खिलाफ कदम उठाता है, वह कोई असाधारण काम नहीं कर रहा — यह हर अधिकारी की मूलभूत जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र के प्रति दायित्व और पद की जिम्मेदारी के तहत सभी अधिकारियों को इसी तरह काम करना चाहिए। यह लड़ाई दीर्घकालिक है और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी अपरिहार्य है।