14 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नशामुक्त भारत के लिए समीर वानखेड़े की पुकार: 'युवाओं को ड्रग्स से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नशामुक्त भारत के लिए समीर वानखेड़े की पुकार: 'युवाओं को ड्रग्स से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी'

सारांश

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मुंबई के बांद्रा में 'ग्राउंड जीरो' पर उतरे आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने साफ कहा — ड्रग्स के खिलाफ जंग सिर्फ छापेमारी से नहीं जीती जाएगी। 18 से 35 साल के युवाओं को नशे से बचाना देश के भविष्य की रक्षा करना है।

मुख्य बातें

आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में एंटी-ड्रग जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया।
उन्होंने नशे के विरुद्ध दो-स्तरीय रणनीति की वकालत की — कानूनी कार्रवाई और जागरूकता अभियान, दोनों समान रूप से जरूरी।
18 से 35 वर्ष के युवाओं को ड्रग्स के खतरे से बचाना राष्ट्रीय भविष्य की सुरक्षा से जोड़ा।
PM मोदी की 2 वर्ष और 100 सप्ताह की ड्रग उन्मूलन योजना का समर्थन किया; CM देवेंद्र फडणवीस के राज्य-स्तरीय प्रयासों की सराहना की।
एपडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की तंबाकू-विरोधी कार्रवाई को सरकारी अधिकारियों का सामान्य दायित्व बताया।

आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में आयोजित एक एंटी-ड्रग जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत को नशामुक्त बनाने की लड़ाई केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — इसके लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान भी उतना ही ज़रूरी है। महाराष्ट्र के एंटी-ड्रग कैंपेन का समर्थन करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी को नशे के खतरे से बचाने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और 'ग्राउंड जीरो' पहुँच

वानखेड़े ने बताया कि बांद्रा जैसे प्रभावित इलाकों में सीधे जाकर काम करने का मकसद उन बच्चों और युवाओं तक पहुँचना है जहाँ ड्रग्स से जुड़े मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है, क्योंकि यह 'ग्राउंड जीरो' पर जाकर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग — स्कूली बच्चों और युवाओं — के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास करता है।

युवा आबादी पर मंडराता खतरा

वानखेड़े ने चेतावनी दी कि 18 से 35 वर्ष की आयु के युवा देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनके अनुसार, यदि इतनी विशाल युवा आबादी नशे की गिरफ्त में आती है तो इसका असर न केवल वर्तमान पर, बल्कि देश के दीर्घकालिक भविष्य पर भी पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज अगर ड्रग्स के खतरे को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।

दो-स्तरीय रणनीति की वकालत

वानखेड़े ने नशे के विरुद्ध अभियान को दो स्तरों पर आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया। उनके अनुसार, एक तरफ कानून के तहत ड्रग्स के कारोबार और आपूर्ति श्रृंखला पर 100 फीसदी प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों और प्रभावित इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ कार्रवाई से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होगा — बच्चों और युवाओं को शुरुआत से ही नशे के नुकसान के बारे में शिक्षित करना अनिवार्य है।

सरकारी प्रयासों को समर्थन

वानखेड़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ड्रग्स उन्मूलन के लिए निर्धारित दो वर्ष और 100 सप्ताह की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में लगातार काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चल रहे राज्य स्तरीय प्रयासों की भी सराहना की।

अधिकारियों की जिम्मेदारी पर स्पष्ट रुख

एपडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर से तंबाकू और अन्य हानिकारक उत्पादों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए वानखेड़े ने कहा कि जो भी सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए नशीले पदार्थों के खिलाफ कदम उठाता है, वह कोई असाधारण काम नहीं कर रहा — यह हर अधिकारी की मूलभूत जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र के प्रति दायित्व और पद की जिम्मेदारी के तहत सभी अधिकारियों को इसी तरह काम करना चाहिए। यह लड़ाई दीर्घकालिक है और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी अपरिहार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जागरूकता कार्यक्रमों का मापने योग्य प्रभाव कैसे सुनिश्चित होगा — क्योंकि भारत में ऐसे अभियान दशकों से चलते आए हैं, फिर भी ड्रग्स की समस्या बढ़ती रही है। PM मोदी की '100 सप्ताह' योजना के क्रियान्वयन का कोई सार्वजनिक सत्यापन ढाँचा अभी तक सामने नहीं आया है। बांद्रा जैसे शहरी इलाकों में 'ग्राउंड जीरो' पहुँच सराहनीय है, परंतु ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ड्रग्स की बढ़ती पैठ इस अभियान की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समीर वानखेड़े कौन हैं और वे इस एंटी-ड्रग अभियान से कैसे जुड़े हैं?
समीर वानखेड़े एक आईआरएस अधिकारी हैं जो ड्रग्स उन्मूलन अभियानों में सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं। उन्होंने 14 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा में आयोजित एंटी-ड्रग जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लिया और युवाओं को नशे से बचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
PM मोदी की ड्रग्स उन्मूलन के लिए '100 सप्ताह' की योजना क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ड्रग्स को खत्म करने के लिए दो वर्ष और 100 सप्ताह की एक लक्ष्य-आधारित योजना निर्धारित की है। वानखेड़े ने इस योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर और प्रभावी काम करना ज़रूरी है।
नशे के खिलाफ दो-स्तरीय रणनीति से वानखेड़े का क्या आशय है?
वानखेड़े के अनुसार पहला स्तर है — कानून के तहत ड्रग्स के कारोबार और आपूर्ति श्रृंखला पर कठोर कार्रवाई। दूसरा स्तर है — स्कूलों और प्रभावित इलाकों में बच्चों व युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाना, ताकि वे नशे के संपर्क में आने से पहले ही सतर्क हो सकें।
बांद्रा में यह कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया?
बांद्रा को ड्रग्स से प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है जहाँ युवा और स्कूली बच्चे बड़ी संख्या में रहते हैं। 'ग्राउंड जीरो' पर जाकर सीधे प्रभावित समुदाय तक पहुँचना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था।
एपडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की कार्रवाई पर वानखेड़े का क्या कहना है?
वानखेड़े ने कहा कि तंबाकू और हानिकारक उत्पादों के विरुद्ध कमिश्नर मुंडे की कार्रवाई कोई असाधारण कदम नहीं, बल्कि हर सरकारी अधिकारी का मूलभूत दायित्व है। उनके अनुसार राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और पद के तहत मिले अधिकार का उपयोग करते हुए सभी अधिकारियों को इसी तरह काम करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 4 सप्ताह पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले