वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों ने सराहा मोदी का निवेश विजन
सारांश
मुख्य बातें
वडोदरा में 29 जून 2026 को दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आगाज हुआ, जिसमें नीति-निर्माताओं, अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय निवेश को गति देना और वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। देश-विदेश से पहुँचे प्रतिभागियों ने इस मंच को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन का व्यावहारिक प्रतिफल बताया।
अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की प्रतिक्रिया
भारत में रवांडा की उच्चायुक्त जैकलीन मुकांजीरा ने कहा, 'रवांडा और भारत के बीच उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं। भारत हमारे देश का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और रवांडा में काम करने वाले कई भारतीय, खासकर गुजरात से हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि रवांडा भारत से दवाइयाँ, आईसीटी, मशीनरी, कपड़े, चावल और चीनी जैसी वस्तुओं का आयात करता है। मुकांजीरा के अनुसार, इस सम्मेलन से रवांडा और गुजरात के बीच व्यापार की संभावनाएँ और अधिक विस्तृत हो सकती हैं।
यूक्रेनी राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने इस पहल को विश्व नेता के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के विजन का परिणाम बताते हुए कहा, 'यह एक बेहतरीन पहल है। हम वास्तव में बहुत खुश हैं कि हमें 2024 के वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलनों में शामिल होने का अवसर मिला। हम लगातार इन सभी सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं।' उन्होंने गुजरात और केंद्र सरकार को इस आयोजन के लिए बधाई दी।
यूक्रेन दूतावास के उप प्रमुख और मंत्री-काउंसलर आर्टेम नोस्को ने कहा, 'हम उस पहल की सफलता का स्वागत करते हैं जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। ये यूक्रेन और भारत को करीब ला रही है और हमारी सोसाइटी तथा व्यापार के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।'
भारतीय उद्योग जगत का नज़रिया
रूबामिन प्राइवेट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भुवन पुरोहित ने बताया कि उनकी कंपनी 2019 से गुजरात में लगातार निवेश कर रही है और अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। हाल ही में गुजरात सरकार के साथ ₹600 करोड़ का एक और एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है।
पुरोहित ने कहा, 'गुजरात सरकार की प्रगतिशील नीतियों के कारण औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है और यह मॉडल न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के व्यवसायों को आकर्षित करेगा।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 2047 विजन को उद्योगों के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश बताया, जो कंपनियों को आने वाले 10 से 25 वर्षों की दीर्घकालिक योजना बनाने में सहायक है।
सम्मेलन का महत्व और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2003 में हुई थी और यह अब एक प्रमुख वैश्विक निवेश मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। रीजनल कॉन्फ्रेंस इसी श्रृंखला का विस्तार है, जो जिला और क्षेत्रीय स्तर पर निवेशकों तक पहुँचने का प्रयास करती है।
आगे की राह
सम्मेलन के दूसरे दिन और अधिक क्षेत्रीय साझेदारियों और एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि गुजरात वैश्विक निवेश के मानचित्र पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहा है।