29 जून 2026
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वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों ने सराहा मोदी का निवेश विजन

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वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों ने सराहा मोदी का निवेश विजन

सारांश

वडोदरा में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आगाज — रवांडा और यूक्रेन के राजनयिकों से लेकर भारतीय उद्योगपतियों तक, सभी ने इसे मोदी के आर्थिक विजन का ठोस परिणाम बताया। ₹600 करोड़ के नए एमओयू और ₹1,000 करोड़ से अधिक के पूर्ण प्रोजेक्ट इस मंच की व्यावसायिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हैं।

मुख्य बातें

वडोदरा में 29 जून 2026 को दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन हुआ।
रवांडा की उच्चायुक्त जैकलीन मुकांजीरा ने बताया कि भारत रवांडा का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।
यूक्रेनी राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक और मंत्री-काउंसलर आर्टेम नोस्को ने सम्मेलन को भारत-यूक्रेन संबंधों के लिए सेतु बताया।
रूबामिन प्राइवेट लिमिटेड ने 2019 से अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट पूरे किए; गुजरात सरकार के साथ ₹600 करोड़ का नया एमओयू।
भागीदारों ने मोदी के 2047 विजन को उद्योगों की दीर्घकालिक योजना का आधार बताया।

वडोदरा में 29 जून 2026 को दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आगाज हुआ, जिसमें नीति-निर्माताओं, अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय निवेश को गति देना और वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। देश-विदेश से पहुँचे प्रतिभागियों ने इस मंच को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन का व्यावहारिक प्रतिफल बताया।

अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की प्रतिक्रिया

भारत में रवांडा की उच्चायुक्त जैकलीन मुकांजीरा ने कहा, 'रवांडा और भारत के बीच उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं। भारत हमारे देश का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और रवांडा में काम करने वाले कई भारतीय, खासकर गुजरात से हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि रवांडा भारत से दवाइयाँ, आईसीटी, मशीनरी, कपड़े, चावल और चीनी जैसी वस्तुओं का आयात करता है। मुकांजीरा के अनुसार, इस सम्मेलन से रवांडा और गुजरात के बीच व्यापार की संभावनाएँ और अधिक विस्तृत हो सकती हैं।

यूक्रेनी राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने इस पहल को विश्व नेता के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के विजन का परिणाम बताते हुए कहा, 'यह एक बेहतरीन पहल है। हम वास्तव में बहुत खुश हैं कि हमें 2024 के वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलनों में शामिल होने का अवसर मिला। हम लगातार इन सभी सम्मेलनों में भाग ले रहे हैं।' उन्होंने गुजरात और केंद्र सरकार को इस आयोजन के लिए बधाई दी।

यूक्रेन दूतावास के उप प्रमुख और मंत्री-काउंसलर आर्टेम नोस्को ने कहा, 'हम उस पहल की सफलता का स्वागत करते हैं जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। ये यूक्रेन और भारत को करीब ला रही है और हमारी सोसाइटी तथा व्यापार के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।'

भारतीय उद्योग जगत का नज़रिया

रूबामिन प्राइवेट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भुवन पुरोहित ने बताया कि उनकी कंपनी 2019 से गुजरात में लगातार निवेश कर रही है और अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। हाल ही में गुजरात सरकार के साथ ₹600 करोड़ का एक और एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है।

पुरोहित ने कहा, 'गुजरात सरकार की प्रगतिशील नीतियों के कारण औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है और यह मॉडल न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के व्यवसायों को आकर्षित करेगा।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 2047 विजन को उद्योगों के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश बताया, जो कंपनियों को आने वाले 10 से 25 वर्षों की दीर्घकालिक योजना बनाने में सहायक है।

सम्मेलन का महत्व और संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की शुरुआत 2003 में हुई थी और यह अब एक प्रमुख वैश्विक निवेश मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। रीजनल कॉन्फ्रेंस इसी श्रृंखला का विस्तार है, जो जिला और क्षेत्रीय स्तर पर निवेशकों तक पहुँचने का प्रयास करती है।

आगे की राह

सम्मेलन के दूसरे दिन और अधिक क्षेत्रीय साझेदारियों और एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि गुजरात वैश्विक निवेश के मानचित्र पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी एमओयू से ज़मीन पर उतरे निवेश की है। रवांडा और यूक्रेन जैसे देशों की उपस्थिति भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुँच को दर्शाती है, पर आलोचकों का कहना है कि इन सम्मेलनों में घोषित निवेशों का एक बड़ा हिस्सा कभी धरातल पर नहीं उतरता। ₹600 करोड़ के नए एमओयू जैसे ठोस आँकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन पिछले वर्षों के एमओयू-से-क्रियान्वयन अनुपात पर पारदर्शी डेटा सार्वजनिक नहीं है। जब तक यह पारदर्शिता नहीं आती, वाइब्रेंट गुजरात का असली आर्थिक प्रभाव मापना कठिन रहेगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस क्या है?
यह वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन की क्षेत्रीय शाखा है, जिसका उद्देश्य जिला और क्षेत्रीय स्तर पर निवेशकों को आकर्षित करना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ बनाना है। 29 जून 2026 को वडोदरा में इसका दो दिवसीय आयोजन शुरू हुआ।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए?
सम्मेलन में रवांडा की उच्चायुक्त जैकलीन मुकांजीरा और यूक्रेनी राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक सहित कई देशों के राजनयिक और व्यापारिक प्रतिनिधि शामिल हुए। भारतीय उद्योग जगत से भी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रवांडा और गुजरात के बीच व्यापार की क्या संभावनाएँ हैं?
रवांडा की उच्चायुक्त के अनुसार, भारत रवांडा का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और रवांडा भारत से दवाइयाँ, आईसीटी, मशीनरी, कपड़े, चावल और चीनी का आयात करता है। इस सम्मेलन से दोनों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
रूबामिन प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात में कितना निवेश किया है?
रूबामिन प्राइवेट लिमिटेड 2019 से गुजरात में निवेश कर रही है और अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट पूरे कर चुकी है। हाल ही में गुजरात सरकार के साथ ₹600 करोड़ का एक नया एमओयू भी हस्ताक्षरित हुआ है।
मोदी का 2047 विजन उद्योगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का 2047 विजन देश के लिए स्पष्ट दीर्घकालिक लक्ष्य तय करता है, जिससे कंपनियाँ अगले 10 से 25 वर्षों की योजना बना सकती हैं। यह उद्योगों को दिशा और निवेश की निश्चितता प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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