अमाल मलिक का खुलासा: रचनात्मक मतभेद हों तो पीछे नहीं हटता, 'आवारापन 2' के गाने पर बोले
सारांश
मुख्य बातें
संगीतकार अमाल मलिक ने 16 अगस्त 2026 को मुंबई के बीकेसी इलाके में फिल्म 'आवारापन 2' के प्रचार कार्यक्रम के दौरान बेबाकी से बताया कि वे फिल्म इंडस्ट्री में रचनात्मक मतभेदों से किस तरह निपटते हैं। इमरान हाशमी अभिनीत इस फिल्म के गीत 'ये आवारापन' को संगीत देने वाले मलिक ने कहा कि अच्छे संगीत के लिए वे किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।
मुख्य बयान
अमाल मलिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हां, रचनात्मक मतभेद होते हैं। मैं पीछे नहीं हटता। मैं यह नहीं कहता कि 'यह गलत है'। रचनात्मक मतभेद पैदा करने की क्षमता दूसरे व्यक्ति की होती है। जो लोग अहंकारी होते हैं, वे मुझे फिल्म से निकाल देते हैं। जो समझदार होते हैं, वे मेरे साथ काम करते हैं।' उन्होंने जोड़ा कि दोनों ही स्थितियाँ उन्हें स्वीकार्य हैं।
मलिक ने यह भी कहा, 'मैं यह नहीं कहता कि उनकी फिल्म मेरे बिना नहीं चलेगी, और ऐसा भी नहीं है कि अगर मैं उनकी फिल्म में काम न करूं तो मुझे कोई खास फर्क पड़ेगा। मैं उनकी फिल्मों के बिना भी अमाल मलिक हूं।' यह बयान उनके आत्मविश्वास और पेशेवर दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
इंडस्ट्री के भीतरी सच पर बेबाक राय
अमाल मलिक ने इंडस्ट्री में 'इनसाइडर' होने के कथित फायदों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'लोग सोचते हैं कि इंडस्ट्री से होने के कारण मुझे विशेषाधिकार मिलते हैं। उन्हें लगता है कि अंदरूनी लोगों को आसानी से फोन आ जाता है, एक रात में 3 फिल्में मिल जाती हैं। लेकिन 2-3 लोग हमें फोन करके फिल्मों से निकाल भी देते हैं।' उनके अनुसार, इंडस्ट्री कनेक्शन दोधारी तलवार की तरह काम करते हैं।
उन्होंने स्वीकार किया कि उनके इस रवैये के कारण काम कम मिलता है और दुश्मन बढ़ते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता हमेशा अच्छा संगीत बनाना रही है। उनके शब्दों में, 'मैं संगीत के साथ खड़ा रहना चाहता हूं।'
'आवारापन 2' और कल्ट फिल्म की विरासत
'आवारापन 2', 2007 में आई 'आवारापन' का सीक्वल है। मूल फिल्म रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी, लेकिन बाद के वर्षों में अपने संगीत और इमरान हाशमी के अभिनय की वजह से उसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिल गया। सीक्वल में हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित की भूमिका में नज़र आ रहे हैं।
आगे क्या
फिलहाल 'आवारापन 2' देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। अमाल मलिक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में नेपोटिज़्म और क्रिएटिव कंट्रोल पर बहस लगातार जारी है। उनके विचार इंडस्ट्री के उन कलाकारों के लिए प्रासंगिक हैं जो रचनात्मक स्वतंत्रता और व्यावसायिक दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं।