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क्या 'छोरियां चली गांव' ने अनीता हसनंदानी को सभी कामों की कद्र करना सिखाया?

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क्या 'छोरियां चली गांव' ने अनीता हसनंदानी को सभी कामों की कद्र करना सिखाया?

सारांश

अनीता हसनंदानी ने 'छोरियां चली गांव' में जीत के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें विजेता बनाया। जानें इस सफर में उन्होंने क्या सीखा और कैसे अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं।

मुख्य बातें

कड़ी मेहनत का फल मीठा होता है।
संघर्ष से ही व्यक्ति की असली ताकत सामने आती है।
सच्चे रिश्ते भावनाओं को साझा करते हैं।
समाज में सकारात्मक बदलाव लाना संभव है।
अपनी सफलता का जश्न मनाना महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 4 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। टेलीविजन की प्रसिद्ध अभिनेत्री अनीता हसनंदानी ने लोकप्रिय रियलिटी शो 'छोरियां चली गांव' में विजय प्राप्त कर सभी का दिल जीत लिया है। इस शो में उनके कड़ी मेहनत, जुझारूपन और आत्मविश्वास ने न केवल उन्हें विजेता बनाया बल्कि एक नए स्तर पर उनकी छवि को भी स्थापित किया। अनीता ने राष्ट्र प्रेस से एक विशेष बातचीत में अपने इस सफर के अनुभव, चुनौतियों और भावनाओं पर खुलकर चर्चा की।

अनीता ने अपने सफर के बारे में बताया, 'यह एक अद्भुत यात्रा रही, जिसमें उतार-चढ़ाव दोनों शामिल थे। मैंने वह प्रगति हासिल की, जिसकी मुझे उम्मीद थी। यह अनुभव मेरी जिंदगी और मेरे बेटे आरव की परवरिश में भी बहुत सहायक साबित होगा। शारीरिक चुनौतियाँ खासकर काफी कठिन थीं, लेकिन जब आप मेहनत के बाद ट्रॉफी जीतते हैं, तो उस खुशी के आगे आप सबकुछ भूल जाते हैं। मैंने हर कार्य में अपनी पूरी क्षमता लगाई और इस शो को जीतकर गर्व महसूस कर रही हूं।'

उन्होंने सबसे कठिन कार्य के बारे में बताते हुए कहा, 'शारीरिक कार्य सचमुच चुनौतीपूर्ण थे। मुझे कूड़ा उठाने का काम भी करना पड़ा, जो मेरे लिए बिल्कुल नया और कठिन अनुभव था। लेकिन उस समय मुझे एहसास हुआ कि कुछ लोग इसी तरह काम करके अपना जीवन चलाते हैं। इस अनुभव ने मुझे उनकी मेहनत की कद्र करनी सिखाई।'

गुस्सा कैसे संभालती हैं, इस सवाल पर अनीता ने कहा, 'मैं गुस्सा होती हूं, लेकिन मेरा तरीका स्पष्ट होता है। मैं चिल्लाती नहीं, बल्कि अपनी बात समझाने की कोशिश करती हूं। जब मैं अपने किसी खास से लड़ती हूं तो मैं भावुक हो जाती हूं और आंसू बहने लगते हैं। यही मेरा स्वभाव है और मैंने इस शो में भी यही दिखाया।'

शो में अपने भावनात्मक पक्ष के बारे में उन्होंने बताया, 'अगर मैं किसी से सच्चा जुड़ाव महसूस करती हूं तो अपनी हंसी और आंसू दोनों जाहिर करती हूं। जब मेरा बेटा आरव शो में आया तो मैं बहुत भावुक हो गई थी। गांव के लोगों के साथ जो रिश्ते बने, वे मेरे लिए बहुत खास हैं और मैं उनकी कद्र करती हूं।'

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इन रिश्तों को आगे भी निभाएंगी, तो अनीता ने कहा, 'बिल्कुल! मैंने गांव के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने का वादा किया है और मैं इसे पूरा करने की पूरी कोशिश करूंगी। वहां पानी की कमी, खराब सड़कें और अस्पतालों की कमी जैसी कई समस्याएं हैं, लेकिन मैं जहां तक हो सके मदद करना चाहती हूं।'

अपने परिवार की प्रतिक्रिया पर खुशी जाहिर करते हुए अनीता ने बताया कि, 'मेरे पति रोहित और बेटे आरव दोनों मुझ पर गर्व महसूस कर रहे हैं। खासकर आरव हमेशा ट्रॉफी को पकड़कर सबको दिखाता है। एक मां के तौर पर इससे बेहतर कोई एहसास नहीं हो सकता। मेरा एकमात्र लक्ष्य था कि मेरा बेटा मुझ पर गर्व करे, और वह पूरा हुआ।'

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमें यह भी दिखाता है कि कैसे एक रियलिटी शो में भाग लेना व्यक्ति के दृष्टिकोण को बदल सकता है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि मेहनत और संघर्ष की कद्र कैसे की जानी चाहिए।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनीता हसनंदानी ने 'छोरियां चली गांव' में जीत कैसे हासिल की?
उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और जुझारूपन के साथ इस शो में भाग लिया और विजेता बनीं।
क्या अनीता ने गांव के लोगों की मदद करने का वादा किया है?
हां, उन्होंने गांव के बच्चों की पढ़ाई में मदद करने का वादा किया है।
अनीता हसनंदानी के परिवार की प्रतिक्रिया क्या थी?
उनके पति और बेटे दोनों उन पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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