क्या अनुपम खेर ने अपनी मां से मुलाकात के बाद उन्हें असहाय महसूस करने से रोका?
सारांश
Key Takeaways
- भावनात्मक पल हमारे रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।
- माता-पिता को असहाय नहीं महसूस कराना चाहिए।
- परिवार के साथ बिताया हुआ समय अमूल्य है।
- रिश्तों में प्यार और समर्पण की आवश्यकता होती है।
- भावनाओं का आदान-प्रदान संबंधों को और मजबूत बनाता है।
मुंबई, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने हाल ही में अपनी मां दुलारी से काफी समय बाद मुलाकात की। जैसे ही उन्होंने अपनी मां को गले लगाया, उनकी आंखों में भावनाओं का एक बवंडर उमड़ पड़ा। उन्होंने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में अनुपम खेर और उनकी मां दुलारी एक-दूसरे को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो के कैप्शन में अनुपम खेर ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा, ''जब मैंने मां को गले लगाया, तो वह इमोशनल हो गईं। उनके हाथ से बैग गिर गया और जब मैंने उसे उठाने से मना किया, तो मां नाराज हो गईं और मुझे डांट पड़ी।''
अनुपम खेर ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, ''वास्तव में माता-पिता को काम करते रहने देना चाहिए। इससे उन्हें एहसास होता है कि वे अभी भी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं और उनकी अपनी क्षमता और महत्व बना रहता है।''
उन्होंने आगे कहा, ''कभी-कभी हम बच्चे यह सोचते हैं कि हम माता-पिता के लिए अधिक सावधान बन रहे हैं, लेकिन उन्हें असल में यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे बूढ़े या असहाय हैं। माफ करना माता! आप वास्तव में परिवार की सबसे युवा सदस्य हैं।''
अनुपम खेर के इस पोस्ट पर एक प्रशंसक ने लिखा, ''इस वीडियो और कैप्शन को देखकर मुझे अपने माता-पिता के साथ बिताए हुए प्यारे पल याद आ गए।''
दूसरे ने कहा, ''यह एक बेहद प्यारा वीडियो है, क्योंकि इस तरह के छोटे पल ही रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।''
एक और ने मजाक में कहा, ''मेरी मां भी आपकी मां की तरह हैं, वह भी गुस्सा हो जाती हैं।''
अन्य प्रशंसकों ने कहा, ''जीवन में सबसे कीमती चीज समय है, जो हमें अपने माता-पिता के साथ बिताना चाहिए, क्योंकि यह पल कभी लौटकर नहीं आते।''