आशा भोसले: शरारती बचपन और खाने के शौक ने कैसे बनाया उन्हें अनोखा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा की सुरों की रानी, आशा भोसले, भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अमर गाने हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे। उनके सहकर्मियों का मानना है कि आशा ताई हमेशा हंसमुख और प्रेम से भरी सिंगर थीं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके बचपन में बहुत शरारत थी। यही वजह है कि उनकी बहन लता मंगेशकर उन्हें घर में पहलवान और मोटी बिल्ली कहकर पुकारती थीं।
आशा भोसले और लता मंगेशकर के व्यक्तित्व में बड़ा अंतर था। जहां लता जी शांत और समझदार थीं, वहीं आशा जी चुलबुली और खेल-कूद में सक्रिय थीं। उनकी शरारतों के चलते उनके परिवार को स्कूल से शिकायतें आती थीं। आशा जी को गाने का शौक बचपन से ही था, और वह अपने डेस्क पर उंगलियों से तबला बजाती थीं। उनके शिक्षक हमेशा कहते थे कि उनका ध्यान पढ़ाई की तुलना में गाने-बजाने में ज्यादा रहता है।
आशा जी को खाने और पकाने का शौक भी था। इसीलिए उनके यूएई, कुवैत, बहरीन, ब्रिटेन के बर्मिंघम और मैनचेस्टर में आशा नाम के रेस्तरां हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनका बचपन खाने और खेलने में बीता और उन्हें कभी-कभी थोड़ी मंदबुद्धि माना जाता था। घर के काम में उन्हें मजा आता था और रसोई में खाना बनाना उन्हें बहुत पसंद था।
सिंगर ने आगे कहा कि लता दीदी अपनी भावनाएँ छिपा लेती थीं, लेकिन मैं अपने मन की बात सबके सामने कह देती थी। मुझे किसी बात से संकोच नहीं होता था। बचपन में मुझे मलाई खाना बहुत पसंद था और आज भी मैं खूब सारा दूध पीती हूँ। यही कारण है कि मैं आज भी गा पा रही हूँ, क्योंकि मैंने हमेशा मलाई और दूध का भरपूर सेवन किया है।